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विश्व का पहला नैनो यूरिया लिक्‍विड संयंत्र

पृष्ठभूमि

  • 31 मई, 2021 को इण्डियन फाॅर्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड ‘(IFFCO)’ ने विश्व का पहला नैनो लिक्‍विड यूरिया प्रस्तुत किया था।
    • नैनो लिक्‍विड यूरिया की 500 मिलीलीटर की बोतल पारंपरिक यूरिया के कम-से-कम एक बैग की जगह लेगी।
  • ध्यातव्य है, कि जून, 2021 में इफको द्वारा कलोल संयंत्र में विश्व के प्रथम नैनो लिक्‍विड यूरिया का वाणिज्यिक उत्‍पादन प्रारंभ कर दिया गया था।
  • 1 अक्‍टूबर, 2021 को गुजरात के भावनगर में नैनो लिक्‍विड यूरिया की शुरुआत करने वाले प्रमुख सहकारी संगठन इफको ने ड्रोन के जरिए नैनो यूरिया का छिड़काव करने का पहला सफल परीक्षण किया था।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 28 मई, 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कलोल, गुजरात में विश्व के पहले नैनो यूरिया लिक्‍विड संयंत्र का उद्‍घाटन किया।
  • प्रधानमंत्री ने इस संयंत्र का उद्‍घाटन महात्मा मंदिर, गांधीनगर में सहकारी संस्थाओं के ‘सहकार से समृद्धि’ सेमिनार के दौरान किया।
  • यह संयंत्र लगभग 1 अरब 75 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित है।
  • यह संयंत्र प्रतिदिन पांच सौ  मिलीलीटर की लगभग डेढ़ लाख बोतलों का उत्पादन करेगा।

अन्य तथ्य

  • भारत विश्व में यूरिया का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है।
  • जबकि, यूरिया के उत्पादन में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है।
  • ध्यातव्य है, कि चीन विश्व का सबसे बड़ा यूरिया उर्वरक का उत्पादक एवं उपभोक्ता दोनों है।

भारत में यूरिया की खपत

  • भारत सरकार के कृषि विभाग द्वारा वर्ष 2018-19 में जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में यूरिया के प्रति हेक्टेयर खपत में पंजाब 177.11 किलोग्राम के साथ शीर्ष पर है।
  • जबकि, 170.23 किग्रा./हेक्टेयर की खपत के साथ हरियाणा दूसरे स्थान पर है। 
  • उत्तर प्रदेश 125.39 किलोग्राम/हेक्टेयर खपत करता है।

संकलन-मनीष प्रियदर्शी
 


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