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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 5 मई, 2022 को केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख माण्डविया ने ‘राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण’ (NFHS-5)  के पांचवें दौर की रिपोर्ट जारी की।
  • ध्यातव्य है, कि राष्ट्रीय परिवार सर्वेक्षण (एनएफएचएस-1) वर्ष 1991 में जारी की गई थी तथा एनएफएचएस-4 वर्ष 2018 में। एनएफएचएस-5 (NFHS-5)  में जारी आंकड़े वर्ष 2019-20 के संदर्भ में हैं।
  • इस रिपोर्ट में जनसंख्या, स्वास्थ्य और परिवार कल्‍याण तथा अन्य संबंधित क्षेत्र; जैसे जनसंख्या की विशेषताएं, प्रजनन क्षमता, परिवार नियोजन शिशु और बाल मृत्यु दर, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण तथा एनीमिया, रुग्‍णता और स्वास्थ्य देखभाल, महिला सशक्तीकरण आदि प्रमुख क्षेत्रों पर विस्तृत जानकारी शामिल है।
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के निरंतर रूप से जारी संस्करणों का मुख्य उद्देश्य भारत में स्वास्थ्य और परिवार कल्‍याण तथा अन्य उभरते क्षेत्रों से संबंधित विश्वसनीय और तुलनीय आंकड़े प्रदान करना है।
  • एनएफएचएस-5 सर्वेक्षण का कार्य 28 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों के 707 जिलों (मार्च, 2017 तक)  के लगभग 6.37 लाख घरों के नमूना सर्वेक्षण पर आधारित है।
  • एनएफएचएस-5 सर्वेक्षण में मृत्यु पंजीकरण, विद्यालय पूर्व शिक्षा, बाल टीकाकरण, बच्‍चों के लिए पोषक तत्‍वों के घटक तथा मासिक धर्म जैसे नए आयाम शामिल किए गए हैं।
  • जहां एनएफएचएस-4 (2015-16) अनुमानों का उपयोग बड़ी संख्या में सतत विकास लक्ष्य के संकेतकों के लिए आधारभूत मूल्यों (Baseline values)  के रूप में किया गया था, वहीं एनएफएचएस-5 विभिन्‍न स्तरों पर लगभग 34 सतत विकास लक्ष्यों (SDG)  के लिए आंकड़े (Data) प्रदान करेगा।

NFHS-5 के प्रमुख निष्कर्ष

  • भारत ने राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण के उपायों से उल्‍लेखनीय प्रगति की है। राष्ट्रीय स्तर पर कुल प्रजनन दर (टीएफआर), प्रति महिला बच्‍चों की औसत संख्या, NFHS-4 और NFHS-5 के मध्य 2.2 से घटकर 2.0 हो गया।
    •  भारत के सिर्फ 5 राज्यों में प्रजनन क्षमता की प्रतिस्थापन दर 2.1 से अधिक है।
    •  ये पांच राज्य-बिहार (2.98), मेघालय (2.91), उत्तर प्रदेश (2.35) , झारखण्ड (2.26) एवं मणिपुर (2.17) हैं।
    • समग्र गर्भनिरोधक प्रसार दर (CRR) देश में 54 प्रतिशत से बढ़कर 67  प्रतिशत हो गई है।
  • देश में संस्थागत जन्‍म 79 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह लगभग 87 प्रतिशत है, जबकि शहरी क्षेत्रों में 94 प्रतिशत।
  • संस्थागत जन्‍म में सर्वाधिक वृद्धि 27 प्रतिशत अरुणाचल प्रदेश में हुई है। इसके बाद असम, बिहार, मेघालय, छत्तीसगढ़, नगालैण्ड, मणिपुर, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
    • विगत 5 वर्षों में 91 प्रतिशत से अधिक जिलों में 70 प्रतिशत से अधिक जन्‍म स्वास्थ्य सुविधाओं के तहत हुए हैं।
  • NFHS-4 के 62 प्रतिशत की तुलना में NFHS-5 में 12-23 माह के 77 प्रतिशत से अधिक बच्‍चों का टीकाकरण पूर्ण हो चुका है।
    •  बच्‍चों में पूर्ण टीकाकरण आच्‍छादन (Coverage)  नगालैण्ड में 57 प्रतिशत से लेकर दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव में 95 प्रतिशत तक है।
    • ओडिशा में 91 प्रतिशत, तमिलनाडु में 89 प्रतिशत तथा पश्चिम बंगाल में 88 प्रतिशत तक टीकाकरण आच्‍छादन हो चुका है।
  • विगत चार वर्षों से भारत में 5 वर्ष से कम उम्र के बच्‍चों में ठिगनेपन (Stunting)  का स्तर 38 प्रतिशत से कम होकर 36 प्रतिशत हुआ है।
    • जहां ठिगनेपन की समस्या पुदुचेरी में सबसे कम (20%) है, वहीं मेघालय में सर्वाधिक (47%) है।
  • NFHS-4  की तुलना में NFHS-5 में अधिकांकश राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों में अधिक वजन एवं मोटापे में व्यापक वृद्धि देखी गई है।
    •  राष्ट्रीय स्तर पर यह महिलाओं में 21 प्रतिशत से बढ़कर 24 प्रतिशत और पुरुषों में 19 प्रतिशत से बढ़कर 23 प्रतिशत हो गया है।
  • महिलाओं के पास बैंक या बचत खाता होने का प्रचलन विगत 4 वर्षों में 53 से बढ़कर 79 प्रतिशत हो गया है।

​​​​​​​संकलन-मनीष प्रियदर्शी


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