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प्रथम लैवेण्डर महोत्सव

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 26 मई, 2022 को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा भद्रवाह, जिला डोडा, जम्मू-कश्मीर में देश के पहले लैवेण्डर महोत्सव का उद्‍घाटन किया गया।
  • इस महोत्सव का आयोजन वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद-भारतीय एकीकृत चिकित्सा संस्थान (CSIR-Indian Institute of Integrative Medicine) द्वारा किया गया।
  • यह महोत्सव 25-26 मई, 2022 तक मनाया गया।

लैवेण्डर क्या है ?

  • यह एक औषधीय पौधा है।
  • इसका वैज्ञानिक नाम लवण्डुला अंगुस्टिफोलिया (Lavandula Angustifolia) है।
  • लैवेण्डर मुख्यत: फ्रांस, स्पेन और इटली सहित भूमध्यसागरीय क्षेत्र के देशों का मूल पौधा है।

उपयोग

  • लैवेण्डर का उपयोग खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों के स्वाद वृद्धि के लिए तथा सौंदर्य प्रसाधन निर्माण हेतु किया जाता है।
  • इसका उपयोग चिंता, अवसाद, पाचन संबंधी लक्षणों और अन्य स्थितियों के लिए आधार पूरक के रूप में प्रचारित किया जाता है।
  • यह सामयिक उपयोग (त्वचा पर तेल का उपयोग) और अरोमाथेरेपी में उपयोग के लिए भी प्रचारित किया जाता है।

भारत में लैवेण्डर की खेती

  • भारत में लैवेण्डर की खेती को अरोमा मिशन के तहत बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • इसे बैंगनी क्रांति का भी नाम दिया गया है।
  • भारत सरकार ने वर्ष 2016 में सुगंधित औषधीय गुणों वाले पौधों; जैसे लैवेण्डर की खेती को बढ़ावा देने के लिए ‘अरोमा मिशन शुरू किया था। 
  • 9 फरवरी, 2021 को सीएसआईआर-आईआईआईएम जम्मू ने पहले चरण की सफलता के उपरांत अरोमा मिशन चरण2 की घोषणा की।
  • यह उल्‍लेखनीय है, कि अरोमा मिशन देशभर से स्टार्टअप और कृषकों को आकर्षित कर रहा है।
  • पहले चरण के दौरान सीएसआईआर ने 6000 हेक्टेयर भूमि पर खेती में मदद की और देशभर में 46 आकांक्षात्मक जिलों को कवर किया।
  • अरोमा मिशन के दूसरे चरण में देशभर में 75000 से अधिक कृषक परिवारों को लाभान्‍वित करना है। साथ ही 45000 से अधिक कुशल मानव संसाधनों का विकास करना है।
  • सीएसआईआर-आईआईआईएम ने डोडा, रामा, किश्तवाड़, कठुआ, राजौरी, पुलवामा, अनंतनाग, कुपवाड़ा और बांदीपोरा जिलों में किसानों के लिए लैवेण्डर की शुरुआत की।
  • इसने किसानों को लैवेण्डर फसल की खेती, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और विपणन पर मुफ्‍त गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री और एण्ड-टू-एण्ड प्रौद्योगिकी पैकेज प्रदान किया।
  • लैवेण्डर की खेती ने जम्मू-कश्मीर के भौगोलिक दृष्टि से दूर-दराज के इलाकों में लगभग 5000 किसानों और युवा उद्यमियों को रोजगार दिया है।
  • वर्तमान में 200 एकड़ से ज्यादा भूमि पर 1000 से ज्यादा कृषक परिवार इसकी खेती कर रहे हैं।

संकलन-मनीष प्रियदर्शी


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