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Post at: Jun 01 2022

वर्ल्ड ऑफ वर्क रिपोर्ट

परिचय

  • 23 मई, 2022 को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (International Labour Organization:ILO) द्वारा ‘वर्ल्ड ऑफ वर्क’ रिपोर्ट का 9वां संस्करण जारी किया गया।
    • ILO द्वारा महामारी (Covid-19) के दौरान रोजगार स्थिति के अवलोकन के लिए यह रिपोर्ट श्रृंखला शुरू की गई थी। 
  • ILO  द्वारा पहला संस्करण मार्च, 2020 में जारी किया गया था।
  • रिपोर्ट द्वारा एक वैश्विक अवलोकन प्रदान किया जाता है, कि कैसे एक देश असमान श्रम बाजार की चुनौतियों से निपट रहे हैं।

रिपोर्ट में प्रकाशित प्रमुख बिंदु

  • वर्ष 2021 की अंतिम तिमाही के दौरान महत्वपूर्ण लाभ के बाद वर्ष 2022 की पहली तिमाही में वैश्विक स्तर पर काम किए गए घंटों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है।
    • दर्ज गिरावट कोविड-19 से पहले के रोजगार की स्थिति से 3.8 प्रतिशत कम है।
  • इस दौरान लगभग 11.2 करोड़ नौकरियां खत्म हो गईं।
  • इसमें अनौपचारिक रोजगार अधिक प्रभावित हुआ, विशेष रूप से महिलाओं के लिए।
  • उच्‍च आय वाले देशों ने काम के घंटों में सुधार दर्ज किया है।
    • वहीं दूसरी तरफ कम और निम्न मध्यम-आय वाली अर्थव्यवस्थाओं ने कोविड-19 पूर्व रोजगार कार्य अवधि की तुलना में गिरावट दर्ज की है।
  • वर्ष 2021 के अंत और 2022 की शुरुआत में थोड़े सुधार के पश्चात वर्तमान में कार्यस्थल के बंद होने की प्रवृत्ति नीचे की ओर अग्रसर है।

उत्तरदायी प्रमुख कारण

  •  रिपोर्ट के अंतर्गत कार्य घंटों में उतार व चढ़ाव के निम्नांकित कारणें को उत्तरदायी ठहराया गया है-

भारतीय परिप्रेक्ष्य में तथ्य

  • रिपोर्ट ने रोजगार परिदृश्य में मुख्यत: भारत के लिंग अंतराल (Gender-gap) असंतुलन पर प्रकाश डाला है।
  • भारत और निम्न-मध्यम आय वाले देशों ने 2022 की दूसरी तिमाही में काम के घंटों में लिंग अंतराल (Gender Gap) में गिरावट दर्ज की है।
  • देश में महामारी से पूर्व काम करने वाली प्रत्येक 100 महिलाओं में से इस दौरान औसतन 12.3 महिलाओं ने अपनी नौकरी खो दी है।
  • इसके विपरीत प्रत्येक 100 पुरुषों पर यह आंकड़ा 7.5 है।
  • प्रभावस्वरूप, महामारी ने देश में रोजगार भागीदारी में पहले से व्याप्त लिंग अंतराल असंतुलन को और बढ़ा दिया है।
    • विशेष रूप से महामारी के दौरान भारत में महिलाओं ने स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में रोजगार में कमी दर्ज की है।
    • रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अधिकांश लोग बिना किसी सामाजिक सुरक्षा के अनुबंध पर कार्यरत हैं। 

सुधार के लिए सिफारिशें

  • श्रमिको की क्रय क्षमता में सुधार किया जाना चाहिए। भारत में वेतन संहिता, 2019 पारित हुई है, लेकिन अभी तक लागू नहीं हुई है।
  • मानवीय क्षमताओं को विकसित करने के लिए उद्यम सक्षम वातावरण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
  • त्‍वरित आवश्यक सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उपयों पर बल दिया जाना चाहिए।
  • अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का सम्मान करते हुए, श्रम बाजार संस्थानों, सामूहिक सौदेबाजी और सामाजिक संवाद में समन्‍वय स्थापित करने का प्रयास करना।
  • कमजोर समूहों पर ध्यान केंद्रित करना और अनौपचारिक रोजगार में काम करने वालों के लिए काम की स्थिति में सुधार करना।
  • अच्‍छी तरह से क्षेत्रीय नीतियों को डिजाइन करना, ताकि नौकरियों के सृजन को बढ़ावा दिया जा सके।
  • मुद्रास्फीति का मुकाबला करने के लिए समष्टि आर्थिक नीतियों को सावधानीपूर्वक समायोजित करने की आवश्यकता है।

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन

  • यह एकमात्र त्रिपक्षीय संयुक्त राष्ट्र एजेंसी है।
    • यह 187 सदस्य राज्यों की सरकारों, नियोक्ताओं और श्रमिकों को एक साथ संबद्ध करता है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1919 में वर्साय की संधि द्वारा राष्ट्र संघ की संबद्ध एजेंसी के तौर पर की गई थी।
  • वर्ष 1946 में इसे संयुक्त राष्ट्र की पहली संबद्ध विशिष्ट एजेंसी का दर्जा प्रदान किया गया।
  • वर्ष 1969 में इसे नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • इसका मुख्यालय जेनेवा, स्विट्‍जरलैण्ड में है।

संकलन-पंकज तिवारी


 


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