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राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 13 अप्रैल, 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमण्डलीय समिति ने संशोधित केंद्र प्रायोजित योजना-राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) को 1 अप्रैल, 2022 से 31 मार्च, 2026 की अवधि (15वें वित्त आयोग की अवधि) के दौरान कार्यान्वयन जारी रखने की मंजूरी दे दी है।
  • यह योजना पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) की शासन संबंधी क्षमताओं को विकसित करने में सहायक होगी।

पृष्ठभूमि

  • तत्कालीन वित्त मंत्री ने वर्ष 2016-17 के अपने बजट भाषण में, सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को पूरा करने के लिए पंचायती राज संस्थानों की शासन संबंधी क्षमताओं को विकसित करने के लिए राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) की नई पुनर्गठित योजना शुरू करने की घोषणा की थी। 
  • इस घोषणा के अनुपालन में आरजीएसए की केंद्र प्रायोजित योजना को केंद्रीय मंत्रिमण्डल द्वारा 21 अप्रैल, 2018 को वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2021-22 तक (1 अप्रैल, 2018 से 31 मार्च, 2022) लागू करने के लिए अनुमोदित किया गया था।
  • तीसरे पक्ष द्वारा आरजीएसए का मूल्यांकन 2021-22 के दौरान किया गया। मूल्यांकन रिपोर्ट ने आरजीएसए योजना के तहत किए गए क्रिया-कलापों की सराहना की और पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने के लिए इसे जारी रखने की सिफारिश की। 
  • इसके अलावा, क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण एक सतत प्रक्रिया है ; क्योंकि हर पांच साल में अधिकांश पंचायत प्रतिनिधियों को नए प्रतिनिधियों के रूप में चुना जाता है, जिन्हें स्थानीय शासन में अपनी भूमिका निभाने के लिए ज्ञान, जागरूकता, दृष्टिकोण और कौशल के मामले में सक्षम होना आवश्यक है। 
  • इसलिए, उन्हें अपने अनिवार्य कार्यों के कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से निर्वहन को लेकर सक्षम करने के उद्देश्य से उन्हें बुनियादी सामंजस्य और ओरिएंटेशन प्रशिक्षण प्रदान करना एक अनिवार्य आवश्यकता है। 
  • इसलिए, संशोधित आरजीएसए को जारी रखने का प्रस्ताव 1 अप्रैल, 2022 से 31 मार्च, 2026 (15वें वित्त आयोग की अवधि) की अवधि के दौरान कार्यान्वयन के लिए तैयार किया गया था।

वित्तीय प्रभाव 

  • इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 5,911 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र का हिस्सा 3,700 करोड़ रुपये और राज्य का हिस्सा 2,211 करोड़ रुपये है।

रोजगार सृजन क्षमता सहित प्रमुख प्रभाव

  • आरजीएसए की स्वीकृत योजना देशभर में पारंपरिक निकायों सहित 2.78 लाख से अधिक ग्रामीण स्थानीय निकायों को उपलब्ध संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर केंद्रित होगी। 
  • साथ ही यह समावेशी स्थानीय शासन के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को लेकर काम करने के लिए शासन संबंधी क्षमता विकसित करने में मदद करेगी। 
  • एसडीजी के प्रमुख सिद्धांत, यानी किसी को पीछे नहीं छोड़ना, सबसे पहले दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचना और व्यापक कवरेज करना, लैंगिक समानता के साथ-साथ प्रशिक्षण, प्रशिक्षण मॉड्‍यूल और सामग्री सहित क्षमता निर्माण के सभी क्रिया-कलापों को डिजाइन में शामिल किया जाएगा। 
  • संशोधित आरजीएसए के तहत मंत्रालय पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों को नेतृत्व की भूमिकाओं के लिए सक्षम बनाने की दिशा में अपना ध्यान केंद्रित करेगा, ताकि सरकार के प्रभावी तीसरे स्तर को विकसित किया जा सके, जिससे नौ विषयों- 

1.    गरीबी मुक्त और आजीविका के संसाधनों में वृद्धि वाले गांव, 
2.    स्वस्थ गांव, 
3.    बच्‍चों के अनुकूल गांव
4.    जल की पर्याप्त मात्रा वाले गांव 
5.    स्वच्छ और हरित गांव, 
6.    गांव में आत्मनिर्भर बुनियादी ढांचा, 
7.    सामाजिक रूप से सुरक्षित गांव, 
8.    सुशासन वाला गांव, और 
9.     गांव में महिला-पुरुष समानता आधारित विकास को मुख्य रूप से प्राथमिकता दी जाएगी।
लाभार्थियों की संख्या

  • देशभर में पारंपरिक निकायों सहित ग्रामीण स्थानीय निकायों के लगभग 60 लाख निर्वाचित प्रतिनिधि, पदाधिकारी और अन्य हितधारक इस योजना के प्रत्यक्ष लाभार्थी होंगे।

विवरण 

  • संशोधित आरजीएसए में केंद्र और राज्य के घटक शामिल होंगे। 
  • योजना के केंद्रीय घटकों को पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा। 
  • राज्य घटकों के लिए वित्तपोषण पैटर्न केंद्र और राज्यों के बीच क्रमशः 60:40 के अनुपात में होगा, इसमें पूर्वोत्तर,  पर्वतीय राज्य और केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर शामिल नहीं हैं, जहां केंद्र और राज्य का हिस्सा 90:10 होगा। 
  • हालांकि, अन्य केंद्रशासित प्रदेशों के लिए केंद्रीय हिस्सा शत-प्रतिशत होगा।
  • सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने के लिए योजना की गतिविधियों के कार्यान्वयन और निगरानी को व्यापक रूप से चिह्नित किया जाएगा। 
  • पंचायतें सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से सभी विकास गतिविधियों और विभिन्न मंत्रालयों/विभागों और राज्य सरकार की योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए केंद्र बिंदु हैं।

कार्यान्वयन रणनीति और लक्ष्य

  • केंद्र सरकार और राज्य सरकारें अपनी-अपनी भूमिकाओं के लिए स्वीकृत गतिविधियों को पूरा करने के लिए कार्रवाई करेंगी। 
  • राज्य सरकार अपनी प्राथमिकताओं और आवश्यकता के अनुसार केंद्र सरकार से सहायता प्राप्त करने के लिए अपनी वार्षिक कार्ययोजना तैयार करेगी। 
  • इस योजना को मांग आधारित प्रारूप में लागू किया जाएगा।

शामिल किए गए राज्य/जिले 

  • यह योजना देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक विस्तारित होगी और इसमें भाग IX से भिन्‍न क्षेत्रों के ग्रामीण स्थानीय शासन की संस्थाएं भी शामिल होंगी, जहां पंचायतें मौजूद नहीं हैं।

पूर्व-संचालित योजना का विवरण और प्रगति 

  • केंद्रीय मंत्रिमण्डल द्वारा 21 अप्रैल, 2018 को केंद्र प्रायोजित योजना- आरजीएसए को वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2021-22 तक कार्यान्वयन के लिए मंजूरी दी गई थी। 
  • केंद्रीय स्तर पर अन्य गतिविधियों सहित पंचायतों को प्रोत्साहन और ई-पंचायत पर मिशन मोड परियोजना इसके मुख्य केंद्रीय घटक थे। 
  • राज्य घटक में मुख्य रूप से क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण से संबंधित क्रिया-कलाप,  क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण के लिए संस्थागत तंत्र के साथ-साथ सीमित पैमाने पर अन्य गतिविधियां शामिल हैं।
  • पंचायतों को प्रोत्साहन और ई-पंचायत पर मिशन मोड परियोजना सहित आरजीएसए की योजना के तहत, राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों/पंचायतों और अन्य कार्यान्वयन एजेंसियों को वर्ष 2018-19 से 2021-22 तक (31 मार्च, 2022 तक) 2364.13 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई।
  • योजना के तहत, वर्ष 2018-19 से 2021-22 (31 मार्च, 2022 तक) के दौरान लगभग 1.36 करोड़ निर्वाचित प्रतिनिधियों, पदाधिकारियों और पंचायती राज संस्थाओं के अन्य हितधारकों ने अनेक तथा बहुविध प्रशिक्षण प्राप्त किए।

संकलन-मनीष प्रियदर्शी


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