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Post at: May 28 2022

सर्वेक्षण पोत निर्देशक

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 26 मई, 2022 को चेन्‍नई के कट्टुपल्‍ली में सर्वेक्षण पोत निर्देशक को लांच किया गया।
  • सर्वेक्षण पोत निर्देशक भारतीय नौसेना के लिए एलएण्डटी (Larsen & Toubro)  के सहयोग से गार्डन रीच शिपबिल्‍डर्स एण्ड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा निर्माणाधीन चार सर्वेक्षण पोत बृहत (Survey Vessels Large-SVL) ंपरियोजना में दूसरा पोत है।
  • इस पोत का नाम पूर्ववर्ती निर्देशक से लिया गया है जो कि भारतीय नौसेना सर्वेक्षण पोत था।
  •  यह पोत दिसंबर, 2014 में 32 वर्ष की सेवा के उपरांत सेवा मुक्त कर दिया गया था।

पृष्ठभूमि

  • 30 अक्टूबर, 2018 को रक्षा मंत्रालय और कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्‍डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) के मध्य संचार एसवीएल पोतो के निर्माण हेतु अनुबंध हस्ताक्षरित किए गए थे।
  • प्रथम श्रेणी के जहाज ‘संध्याक’ को 5 दिसंबर, 2021 को कोलकाता के जीआरएसई में लांच किया गया था।
  •  एसवीएल के चार पोतों में से तीन का आंशिक निर्माण कट्टुपल्‍ली स्थित एलएण्डटी में जीआरएसई और एलएण्डटी पोत निर्माण के बीच सार्वजनिक निजी भागीदारी  दृष्टिकोण के तहत किया जा रहा है।

निर्देशक की विशेषता

  • एसवीएल पोत, समुद्र संबंधी जानकारी एकत्र करने के लिए मौजूदा सहायक श्रेणी के सर्वेक्षण जहाजो को नई पीढ़ी के हाइड्रोग्राफिक उपकरणों में बदल देंगे।
  • इस सर्वेक्षण पोत (बृहद) की लगभग 3400 टन और 226 कर्मियों की क्षमता है।
  • इस पोत को 14 समुद्री मील की क्रूज गति और 18 समुद्री मील (नॉट) की अधिकतम गति पर परिचालित करने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • उथले पानी के सर्वेक्षण कार्यों के दौरान आवश्यक कम गति पर बेहतर कुशलता के लिए बो और स्टर्न थ्रस्टर्स को लगभग गया  है।
  • इन पोतों के पतवार स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लिमिटेड द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित डीएमआर 249-ए इस्पात से बनाया गया है।

कार्य

  • चार सर्वेक्षण मोटर नौकाओं और एक एकीकृत हेलीकॉप्टर को ले जाने की क्षमता के साथ पोतो की प्राथमिक भूमिका पत्तनों व नौवहन चैनलों के पूर्ण पैमाने पर तटीय और गहरे जल के हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करने की होगी।
  • रक्षा के साथ-साथ नागरिक अनुप्रयोगों के लिए समुद्र विज्ञान और भू-भौतिकीय डाटा एकत्र करने के लिए भी पोतों को तैनात किया जाएगा।
    आपात स्थिति के दौरान पोतो को अस्पताल के रूप में उपयोग करने में अलावा इनकी द्वितीयक भूमिका सीमित रक्षा प्रदान करने में सक्षम होना है।

आगे

  • जनवरी, 2023 तक जीआरएसई एसवीएल के पहले पोत संध्याक को सौंपने का लक्ष्य रखा है।
  • दूसरे पोत यानी निर्देशक की आपूर्ति अप्रैल 2023 तक होने की संभावना है।

​​​​​​​महत्व

  • दूसरे सर्वेक्षण पोत की लॉन्‍चिग ‘मेक इन इण्डिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की सोच के तहत स्वदेशी पोत निर्माण के भारत सरकार के संकल्‍प की पुष्टि करता है।
  • सर्वेक्षण पोत (बृहत) में लागत के आधार पर 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री होगी।
  • इसके अलावा यह भी सुनिश्चित करेगा कि बड़े पैमाने पर रक्षा उत्पादन भारतीय विनिर्माण इकाइयो द्वारा निष्पादित किया जाता है, जिससे देश के भीतर रोजगार एवं कौशल क्षमता का निर्माण होता है।

संकलन-मनीष प्रियदर्शी
 


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