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जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग की रिपोर्ट

पृष्ठभूमि

  •  6 अगस्त, 2019 को भारतीय संविधान के अनुच्‍छेद 370 के तहत, जम्मू और कश्मीर को प्राप्त विशेष दर्जा को निष्प्रभावी किया गया। 
    •  31 अक्टूबर, 2019 को ‘जम्मू  और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019’ के तहत, जम्मू और कश्मीर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों-जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित कर दिया गया।
  • विभाजन के पूर्व जम्मू और कश्मीर राज्य में द्विसदनीय विधानमण्डल अस्तित्‍व में था, जिसमें 83 सदस्यीय विधानसभा अस्तित्‍व में थी।
  • विभाजन से पूर्व राज्य में अंतिम बार चुनाव वर्ष 2014 में संपन्‍न हुआ था।
  • जम्मू और कश्मीर में अंतिम बार परिसीमन वर्ष 1981 की जनगणना के आधार पर वर्ष 1995 में संपन्‍न हुआ था, तब जम्मू और कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लागू था।
  •  ध्यातव्य है, कि कश्मीर घाटी में तनावपूर्ण स्थिति के कारण वर्ष 1991 में जम्मू और कश्मीर में जनगणना का कार्य संपन्‍न नहीं किया जा सका था।
  • अगस्त, 2019 में अनुच्‍छेद 370 के निष्प्रभावी होने के पूर्व जम्मू और कश्मीर की विधानसभा की सीटों का परिसीमन जम्मू और कश्मीर के संविधान तथा जम्मू और कश्मीर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1957 के तहत संपन्‍न होता था, जबकि लोक सभा निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन भारतीय संविधान के प्रावधानों के तहत संपन्‍न होता था।
  • वर्ष 2001 में जम्मू और कश्मीर की विधानसभा ने वर्ष 2026 तक परिसीमन की प्रक्रिया को रोकने के लिए एक कानून पारित किया था।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • मार्च, 2020 में भारत सरकार द्वारा जम्मू और कश्मीर में विधानसभा और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के उद्देश्य से तीन सदस्यीय परिसीमन आयोग का गठन किया गया।
    • सर्वोच्‍च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्‍यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई आयोग की अध्यक्ष, जबकि सुशील चंद्रा (मुख्य चुनाव अायुक्त )तथा के.के. शर्मा (राज्य चुनाव आयुक्त, केंद्रशासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर) आयोग के दो अन्य सदस्य हैं।
    •  आयोग द्वारा अपने कार्य के समुचित संचालन के लिए केंद्रशासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर से निर्वाचित लोक सभा के 5 सदस्यों को भी शामिल किया गया था, जिन्‍हें लोक सभा अध्यक्ष द्वारा नामित किया गया था।
  • ध्यातव्य है, कि परिसीमन आयोग का गठन परिसीमन अधिनियम, 2002 की धारा 3 तथा जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के भाग-5 में वर्णित प्रावधानों के अनुरूप किया गया था।
  • गौरतलब है, कि परिसीमन आयोग को वर्ष 2011 की जनगणना को आधार बनाकर विधानसभा और संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के परिसीमन का काम सौंपा गया था।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु

  • परिसीमन आयोग ने केंद्रशासित प्रदेश की सीटों की संख्या में 7 की वृद्धि कर 83 से बढ़ाकर 90 कर दिया है।
    • ध्यातव्य है, कि आयोग ने अपने रिपोर्ट में जम्मू और कश्मीर को दो डिवीजनों में विभाजित किया है : जम्मू (वर्तमान में 37 विधानसभा सीट) तथा कश्मीर (46 विधानसभा सीट)।
  • आयोग ने जम्मू क्षेत्र के लिए विधानसभा सीटों की संख्या 37 से बढ़कर 43 तथा कश्मीर क्षेत्र के लिए विधानसभा सीटों की संख्या 46 से बढ़ाकर 47 कर दिया है।
  • आयोग ने वर्ष 2011 की जनगणना को आधार मानकर विधानसभा में 7 सीटों का इजाफा किया है। 
    •  जम्मू क्षेत्र, जिसकी जनसंख्या 53 लाख (43 %) है, को 47 प्रतिशत सीटें आवंटित की गई हैं, जबकि कश्मीर क्षेत्र, जिसकी जनसंख्या 68 लाख (56%) है, को 52 प्रतिशत सीटें आवंटित की गई हैं।
  • आयोग ने केंद्र से निम्नलिखित सिफारिशें की हैं : 
    • विधानसभा में कश्मीरी प्रवासियों के समुदाय से कम-से- कम दो सदस्यों (उनमें से एक महिला हो) को नामित करने तथा ऐसे सदस्यों को केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी की विधानसभा के मनोनीत सदस्यों के समान शक्ति देने की सिफारिश की है।
    • पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर (POK)  से विस्थापित व्यक्तियों के प्रतिनिधियों को विधानसभा में नामित करने के बारे में विचार करने हेतु आयोग ने सरकार को सुझाव दिया है।
  • आयोग ने जम्मू-कश्मीर की विधानसभा मंे 7 सीट अनुसूचित जाति तथा 9 सीट अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित करने की सिफारिश की है।
    •  अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 9 सीटों में से जम्मू क्षेत्र के लिए 6 (बुघल, गुलाबगढ़, सुरनकोट, राजौरी, मेण्ढर, थानामण्डी), जबकि कश्मीर घाटी के लिए 3 (गुरेज, कंगन तथा कोकरनाग) सीटें होंगी।
    • ध्यातव्य है, कि इससे पूर्व विधानसभा में अनूसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटों का प्रावधान नहीं था।
    • आयोग ने ‘जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019’ की धारा 14 (6) के प्रावधान के अनुरूप विधानसभा में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण की सिफारिश की है।
  • आयोग ने जम्मू और कश्मीर क्षेत्र को एक एकल केंद्रशासित प्रदेश के रूप में माना है ; इसलिए जम्मू क्षेत्र के राजौरी और पुंछ को कश्मीर घाटी के अनंतनाग निर्वाचन क्षेत्र से मिलाकर एक संसदीय क्षेत्र बनाया है।
    • नए निर्वाचन क्षेत्र को ‘किश्तवाड़-राजौरी’ नाम दिया गया है।
  • आयोग ने स्थानीय प्रतिनिधियों की मांग को ध्यान में रखते हुए 13 निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्नामकरण किया है, जिसमें से तांगमर्ग एसी, जूनीमार एसी, सोनवार एसी, कठुआ नॉर्थ एसी इत्यादि शामिल हैं।

​​​​​​​निष्कर्ष

  •  केंद्रशासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के लिए गठित परिसीमन आयोग की अंतिम रिपोर्ट का क्षेत्र के लिए काफी अधिक राजनीतिक महत्व है। प्रदेश में परिसीमन अभ्यास के पूर्ण होने के बाद विधानसभा चुनाव का मार्ग प्रशस्त होगा, जो जम्मू और कश्मीर में शांति एवं स्थायित्व बनाए रखने के मद्देनजर काफी महत्वपूर्ण होगा। अब केंद्र सरकार को आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की तिथि निर्धारित करना चाहिए, जिससे निर्वाचन आयोग मतदान केंद्रों का युक्तिकरण कर सके व मतदाता सूची में संशोधन कर सके।

​​​​​​​

संकलन - वृषकेतु रॉय
 


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