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Post at: May 28 2022

‘अवसर’ योजना

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 8 अप्रैल 2022 को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) द्वारा "अवसर" (क्षेत्र के कुशल कारीगरों के लिए स्थान के रूप में हवाईअड्डा) योजना [“AVSAR” (Airport as Venue for Skilled Artisans Of The Region )]की शुरुआत की गई।
  • यह योजना महिलाओं, कारीगरों व शिल्पकारों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने और उन्हें सही अवसर प्रदान करने के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने अपने हवाईअड्डों पर स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को अपने क्षेत्र के स्व-निर्मित उत्पादों की बिक्री/प्रदर्शित करने के लिए स्थान आवंटित करने की पहल है।

योजना की मुख्य विशेषता

  • योजना के तहत, आत्मनिर्भरता के लिए अपने परिवारों को कार्यात्मक रूप से प्रभावी स्व-अर्जित समूहों में संगठित करने में जरूरतमंदों की सहायता करने का मौका प्रदान किया गया है। 
  • इस योजना के तहत, एएआई संचालित हर एक हवाई अड्डे पर 100-200 वर्ग फीट का क्षेत्र निर्धारित किया गया है। 
  • स्वयं सहायता समूहों को एक-एक कर 15 दिनों की अवधि के लिए यह स्थान आवंटित किया जा रहा है। 
  • चेन्‍नई, अगरतला, देहरादून, कुशीनगर, उदयपुर और अमृतसर हवाईअड्डे पर कुछ आउटलेट पहले ही शुरू किए जा चुके हैं। 
  • इन आउटलेटों पर हवाई यात्रियों को स्थानीय महिलाओं की एसएचजी अपने घर के बने स्थानीय उत्पादों ;जैसे, मुरमुरे, डिब्बाबंद पापड़, अचार, बांस आधारित लेडीज बैग/बोतल/लैंप सेट, स्थानीय कलाकृतियां, स्वदेशी बुनाई का प्रदर्शन और विपणन कर रहे हैं।
  • इसके अलावा अन्य कई एएआई हवाईअड्डे ऐसे स्वयं सहायता समूहों को राज्य सरकारों के समन्वय से स्थान आवंटित करने की प्रक्रिया में हैं। 
  • इनमें रांची, कोलकाता, वाराणसी, इंदौर, भोपाल, बडोदरा, बेलगावी, मदुरै, कोयंबटूर, कालीकट, सूरत, भुवनेश्वर, रायपुर, सिलचर, डिब्रूगढ़ और जोरहाट शामिल हैं।

महत्व

  • छोटे और ग्रामीण समुदायों को निर्वाह से स्थिरता की ओर बढ़ने को लेकर सशक्त बनाने के लिए स्वयं सहायता समूह भारत के सबसे शक्तिशाली माध्यम हैं। 
  • सरकार इन एसएचजी को मजबूत करने के लिए लगातार अनुकूल वातावरण का निर्माण कर रही है। 
  • ऐसे कई समूह उत्कृष्ट उत्पादक, स्थानीय कला, शिल्प, उपयोगी व गुणवत्ता वाले उत्पादों के निर्माता हैं। 
  • इनकी उपभोक्ताओं की ओर से मांग भी है और उन्हें अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए अवसर और स्थान की जरूरत होती है।
  • एएआई हवाईअड्डों पर जगह आवंटित करके एसएचजी को मजबूत करने की यह पहल इन छोटे समूहों को बड़ा मंच प्रदान करेगी और उन्हें अपने उत्पादों को व्यापक रूप से बढ़ावा देने/बाजार में बड़ी आबादी तक पहुंचने के लिए तैयार करेगी।
  • इसके लिए स्व-सहायता समूहों से आवेदन एएआई पोर्टल (हवाईअड्डा-वार) पर उस विशेष राज्य के हवाईअड्डे पर आवंटन के लिए प्राप्त होते हैं, जहां एसएचजी स्थित हैं।

​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (ए ए आई)

  • भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (ए.ए.आई.) का गठन संसद के एक अधिनियम द्वारा किया गया तथा यह तत्कालीन राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण तथा भारतीय अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण के विलय के माध्यम से 1 अप्रैल, 1995 को अस्तित्व में आया। 
  • भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को देश में जमीन पर एवं वायु क्षेत्र में भी नागर विमानन अवसंरचना के सृजन, उन्‍नयन, अनुरक्षण एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई।
  • भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण 137 विमानपत्तनों का प्रबंधन करता है, जिसमें 23 अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन (3 अंतरराष्ट्रीय सिविल एंक्‍लेव सहित), 10 सीमा शुल्क विमानपत्तन (4 सीमा शुल्क सिविल एंक्‍लेव सहित), 81 घरेलू विमानपत्तन तथा रक्षा वायु क्षेत्रों में 23 घरेलू सिविल एंक्‍लेव शामिल हैं। 
  • भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण 2.8 मिलियन वर्ग नाॅटिकल मील के हवाई अंतरिक्ष में हवाई नेविगेशन की सुविधाएं उपलब्ध कराता है।

​​​​​​​संकलन-मनीष प्रियदर्शी


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