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Post at: May 24 2022

देश का पहला अमृत सरोवर

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 13 मई, 2022 को देश के पहले ‘‘अमृत सरोवर’’ (Amrit Sarovar)  का उद्‍घाटन किया गया।
  • यह उत्तर प्रदेश के रामपुर की ग्राम पंचायत पटवाई में स्थित है।
  • वर्तमान में उत्तर प्रदेश में अमृत सरोवर हेतु पहचान की गई स्थलों की संख्या लगभग 2600 से अधिक है।
    • जिनमें, लगभग 7 से अधिक स्थलों पर कार्य शुरू हो गया है।

पृष्ठभूमि

  • भविष्य के लिए जल संरक्षण (Conserve water for the future)  की दृष्टि से प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय पंचायत दिवस के अवसर पर 24 अप्रैल, 2022 को ‘मिशन अमृत सरोवर’ नामक नई पहल की शुरुआत की।
  • इस पहल की शुरुआत जम्मू एवं कश्मीर से की गई थी।

अमृत सरोवर

  • इस पहल का उद्देश्य ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के उत्सव के रूप में देश के प्रत्येक जिले में 75 जल निकायों का विकास एवं कायाकल्प (Rejuvenation) करना है।
    • इसके साथ ही यह सतह एवं भूमिगत दोनों पर जल की उपलब्धता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
  • प्रत्येक अमृत सरोवर का ‘तालाब क्षेत्र’ (Pondage area)  न्यूनतम 1 एकड़ (0.4 हेक्टेयर) होगा।
    • इनकी जलधारण क्षमता (water holding capacity)  लगभग 10,000 क्‍यूबिक मीटर होगी। 
  • देशभर में कुल लगभग 50,000 अमृत सरोवरों का निर्माण या कायाकल्प किया जाएगा।
  • सभी अमृत सरोवरों के निर्माण/कायाकल्‍प को अमृत वर्ष की समाप्‍ति; अर्थात 15 अगस्त, 2023 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित है।
  • अमृत सरोवर पोर्टल एवं मोबाइल ऐप का प्रयोग जिलों में मिशन की प्रगति/प्रदर्शन का पता लगाने में किया जाएगा।
    • इस पोर्टल व ऐप का विकास ‘भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्‍यूट ऑफ स्पेस एप्‍लीकेशन एण्ड जियोइन्‍फॉर्मेटिक्‍स-नेशनल’ (BISAG-N) द्वारा किया गया है।
  • इन सरोवरों के निर्माण में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) की भूमिका होगी।

मिशन के कार्यान्वयन में शामिल निम्नलिखित संस्थाएं

1. ग्रामीण विकास मंत्रालय
2. जल शक्ति मंत्रालय
3.संस्कृति मंत्रालय
4. पंचायती राज मंत्रालय
5. पर्यावरण,वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
6. भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्‍यूट ऑफ स्पेस एप्‍लीकेशन एण्ड जियोइन्‍फॉर्मेटिक्‍स-नेशनल (BISAG-N)  

  •  इस योजना पर अमल हेतु ग्रामीण विकास मंत्रालय को नोडल (Nodal)  मंत्रालय नामित किया गया है।

निष्कर्ष

  • इन सरोवरों के निर्माण से पर्यटन के साथ-साथ रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। पानी की उपलब्धता और पानी की किल्‍लत किसी भी देश की प्रगति और गति को निर्धारित करती है ; इसलिए जल को बचाने एवं भूगर्भ जल की कमी नहीं होने देने के उद्देश्य से यह पहल मील का पत्थर साबित होगी।

संकलन- आदित्य भारद्वाज
 


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