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ऑपरेशन दुधी

पृष्ठभूमि

  • ऑपरेशन दुधी एक आतंकरोधी अभियान है, जो असम राइफल्‍स द्वारा जम्मू और कश्मीर में वर्ष 1990-92 तक चलाया गया था।
  • 5 मई, 1991 को असम राइफल्स ने जम्मू और कश्मीर में एक ही काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशन में 72 आतंकवादियों को खत्म कर दिया था।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 9 मई, 2022 को ऑपरेशन दुधी के जीवित सैनिकों को असम राइफल्स द्वारा सम्मानित किया गया।
  • यह सम्मान उन्हें ऑपरेशन दुधी की 31वीं बरसी पर शिलांग में दिया गया।

प्रमुख बिंदु

  • 3 मई, 1991 को ऑपरेशन दुधी, नायब सूबेदार पद्म बहादुर छेत्री की कमान में असम राइफल्स की 7वीं बटालियन की 15 सैनिकों की एक टीम द्वारा शुरू किया गया था।
  • यह किसी भी सुरक्षा बल द्वारा अब तक चलाया गया सबसे सफल आतंकवाद रोधी अभियान है।

असम राइफल्स के बारे में

  • असम राइफल्स केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के तहत अर्धसैनिक बल है।
  • असम राइफल्स भारतीय सेना की सबसे पुरानी शाखा है, जो ब्रिटिश राज के तहत 1835 ई. में कछार लेवी के नाम से स्थापित की गई थी।
  • असम राइफल्स का वर्तमान नाम वर्ष 1917 से इस्तेमाल किया गया है। 
  • यह रक्षा मंत्रालय के अधीन है।
  • वेतन और बुनियादी ढांचा रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रदान किया जाता है, लेकिन कर्मियों की तैनाती, पोस्टिंग, स्थानांतरण और प्रतिनियुक्ति भारतीय सेना द्वारा तय की जाती है।
  • बल की कमान भारतीय सेना के एक लेफ्‍टिनेंट जनरल के पास होती है।
  • असम राइफल्‍स के प्रमुख योगदान के अंतर्गत : 

(i) अभियान भारत-चीन युद्ध, 1962 के दौरान
(ii)  वर्ष 1987 में श्रीलंका में भारतीय शांति सेना अभियान में।
(iii) भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में शांति स्थापना की भूमिका में।

  • ध्यातव्य है, कि नवंबर, 2019 में गृह मंत्रालय द्वारा इसे भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के साथ विलय करने का प्रस्ताव दिया गया था।

संकलन-पंकज तिवारी
 


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