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Post at: May 14 2022

पल्‍ली भारत की पहली ‘कार्बन-न्यूट्रल पंचायत’

कार्बन न्यूट्रल (तटस्थता)

  • कार्बन तटस्थता मानवजनित कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के संतुलन को संदर्भित करता है।
    • यह कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को इसके निष्कासन (प्राय: कार्बन ऑफसेटिंग के माध्यम से) या समाज द्वारा उत्सर्जन को समाप्त करके संतुलित करके प्राप्त किया जाता है।
  • कार्बन तटस्थता शब्द में अन्य ग्रीन हाउस गैसें भी शामिल हैं, जो आमतौर पर कार्बन आधारित होती हैं, जिन्हें उनके कार्बन डाइऑक्साइड तुल्‍यता के संदर्भ में मापा जाता है।
  • इसका उपयोग उद्योग, ऊर्जा उत्पादन, परिवहन और कृषि से जुड़ी कार्बन डाइआॅक्साइड-विमोचन प्रक्रियाओं के संदर्भ में किया जाता है।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 24 अप्रैल, 2022 को जम्मू  के सांबा जिले का पल्‍ली गांव कार्बन न्यूट्रल बनने वाला देश का पहला पंचायत बन गया है।
  • यह पंचायत पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित है।
  • ग्रामीण समुदाय की मदद से तीन सप्ताह के रिकॉर्ड समय में 500 किलोवॉट का सौर संयंत्र स्थापित किया गया।

प्रमुख बिंदु

  • केंद्र सरकार के ‘ग्राम ऊर्जा स्वराज’ अभियान के तहत पल्‍ली में कुल 6,408 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में 1500 सोलर पैनल लगाए गए हैं।
  • ये सोलर पैनल पंचायत में स्थित 340 घरों में स्वच्‍छ बिजली मुहैया कराएंगे।
  • पल्‍ली गांव की यह उपलब्धि ‘सब का प्रयास’ नारे का सफल उदाहरण है।

महत्व

  • पल्‍ली ने देश को कार्बन-न्यूट्रल बनाने के ग्‍लासगो लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।
  • यह पेरिस समझौते के लक्ष्य पूर्व औद्योगिक स्तरों की तुलना में वैश्विक तापन को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
  • यह ग्‍लासगो सम्मेलन [COP-26] में भारत द्वारा ‘पंचामृत’ लक्ष्य की प्राप्ति को अभिप्रेरित करता है।
  • पल्‍ली को अब एक आदर्श पंचायत के रूप में देखा जाएगा, जो भारत की अन्य पंचायतों को कार्बन न्यूट्रल बनने के लिए प्रेरित करेगा।

नेट जीरो (शुद्ध शून्य उत्सर्जन)

  • ‘शुद्ध शून्य’ (Net Zero) उत्सर्जन का उपयोग कार्बनीकरण और जलवायु कार्रवाई के लिए अधिक व्यापक प्रतिबद्धता का वर्णन करने के लिए किया जाता है।
  • शुद्ध शून्य उत्सर्जन तब प्राप्त होता है, जब ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन (GHGs)  उत्पादन और वायुमण्डल के बाह्य क्षेत्र के ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन के बीच एक समग्र संतुलन स्थापित हो। 
  • इसके लिए सर्वप्रथम मानवजनित ग्रीन हाउस उत्सर्जन को यथासंभव शून्य के करीब लाना चाहिए।
    • साथ ही शेष ग्रीन हाउस गैस को अवशोषित कर (जंगलों की पुनर्स्थापना) संतुलित किया जाना चाहिए।

क्रियाविधि

  • कार्बन तटस्थता प्रमुखत: दो तरीकों से प्राप्त की जाती है।
  • कार्बन ऑफसेटिंग- इसके अंतर्गत उत्सर्जित होने वाली ग्रीन हाउस गैसों को कम करने या उससे बचने की प्रक्रिया या अन्यत्र उत्सर्जन के लिए वातावरण से कार्बन डॉइऑक्साइड को हटाने की प्रक्रिया को शामिल करते हैं।

जैसे- जंगलों की पुनर्स्थापना, CO2 को महासागरों के तली या जमीन के नीचे जमा कर भण्डारित कर देना इत्यादि।

उत्सर्जन में कमी

  • कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों और स्वच्‍छ तकनीक को अपनाकर उत्सर्जन को स्रोत पर ही कम करने का प्रयास किया जाता है।

उदाहरण-जलविद्युत और व पवन ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा को शामिल किया जाता है।

ग्‍लासगो (CoP-26) सम्मेलन 

  • ग्‍लासगो सम्मेलन में प्रधानमंत्री द्वारा भारत के जलवायु परिवर्तन (कार्रवाई) प्रतिबद्धता को ‘पंचामृत’ लक्ष्य के तौर पर परिभाषित किया गया।

​​​​​​​पंचामृत के तहत, भारत प्राप्त करेगा :-

​​​​​​​

संकलन-पंकज तिवारी


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