Contact Us - 0532-246-5524,25 | 9335140296
Email - ssgcpl@gmail.com
|
|

Post at: May 06 2022

स्वदेश निर्मित उपग्रह नेविगेशन प्रणाली ‘गगन’ का सफलतापूर्वक उपयोग

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 28 अप्रैल, 2022 को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा किशनगढ़ हवाई अड्डे (राजस्थान) पर स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम ‘गगन’ का उपयोग करते हुए सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया गया।
  • भारत  ऐसी सफलता हासिल करने वाला एशिया प्रशांत क्षेत्र का पहला देश बन गया।

प्रमुख बिंदु

  • भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने यह उपलब्धि गगन (GPS Aided GEO Augmented Navigation)  आधारित एलपीवी (Localizer Performance with Verticle Guidance) प्रक्रियाओं का उपयोग करके प्राप्त की।
  • इण्डिगो स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम ‘गगन’ का उपयोग करके विमान उतारने वाली देश की पहली एयरलाइन बन गई है।
  • भारत, अमेरिका और जापान के बाद उपग्रह आधारित ऑग्मेंटेशन सिस्टम (Augmentation System)  रखने वाला विश्व में तीसरा देश बन गया है।
  • इण्डिगो एयरलाइंस द्वारा एटीआर विमान का उपयोग करते हुए गगन सेवा के माध्यम से 250 फीट के मिनिमा के साथ एक इंस्ट्रूमेंट एप्रोच प्रोसीजर (आईएपी) उड़ान काे तय किया गया।
  • इस प्रकार अब कोई भी हवाई अड्डा जिस पर लैण्डिंग के लिए उच्‍च दृश्यता की आवश्यकता होगी, वह एलपीवी के कारण लैण्डिंग के लिए सहज होगा।
  • महत्व
  • अब विमान लैण्डिंग के दौरान बेहतर सुरक्षा, ईंधन की खपत में कमी, देरी, दिशा में बदलाव और रद्दीकरण आदि पहलुओं पर बेहतर सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
  • गगन’ नेविगेशन प्रणाली विमानों के 250 फीट तक की ऊंचाई, खराब मौसम और कम दृश्यता की स्थिति में परिचालन का पर्याप्त लाभ प्रदान करता है।

एलपीवी (Localizer Performance with Verticle Guidance)

  • एलपीवी एक उपग्रह आधारित प्रक्रिया है, जिसका उपयोग विमान के द्वारा हवाई अड्डे पर उतरने के उद्देश्य से किया जाता है।
  • यह जमीन आधारित उड़ान संबंधी बुनियादी ढांचे की आवश्यकता के बिना, विमान निर्देशित दृष्टिकोण की अनुमति देता है।
  • एलपीवी पद्धति से उन हवाई अड्डों पर उतरना संभव हो जाएगा जहां विमान उतारने की महंगी प्रणाली (Instrument landing system)  नहीं है।
  • यह सेवा इसरो (ISRO)  द्वारा शुरू किए गए जीपीएस और गगन भू-स्थिर उपग्रहों की उपलब्धता पर निर्भर करती है।

गगन  (GPS Aided  GEO  Augmented  Nevigation)

  • गगन एक भारतीय उपग्रह आधारित संवर्धन प्रणाली (एसबीएएस) है।
  • इसे भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और इसरो ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।
  • गगन सिस्टम को डीजीसीए (Directorate General of Civil Aviation)  ने वर्ष 2015 में एप्रोन विद वर्टिकल गाइडेंस और एन रूट संचालन के लिए प्रमाणित किया था।
  • यह एक सैटेलाइट-आधारित ऑग्मेंटेशन सिस्टम है, जो नागरिक उड्डयन अनुप्रयोगों के लिए आवश्यक निरंतरता और सटीकता के साथ सैटेलाइट आधारित नेविगेशन सेवाएं प्रदान करता है।
  • अपलिंक और संदर्भ स्टेशनों का उपयोग करके, यह प्रणाली ग्‍लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) सिग्‍नल में सुधार करती है। 
  • इस प्रणाली के उपयोग के माध्यम से भारतीय हवाई क्षेत्र में बेहतर वायु यातायात प्रबंधन प्रदान किया जा सकता है।

​​​​​​​

निष्कर्ष

  • आत्मनिर्भर भारत की केंद्र सरकार की पहल के अनुरूप भारतीय नागरिक उड्डयन क्षेत्र को और अधिक आत्मनिर्भर बनाने के लिए सभी नागरिक हवाई अड्डों के लिए एलपीवी प्रक्रियाओं को विकसित किया जा रहा है।
  • भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण भारत में इस तरह के तकनीकी विकास के जरिए हवाई संचालन (एयर नेविगेशन) सेवाओं की उपलब्धता, निरंतरता और अखण्डता सुनिश्चित करने के लिए सभी उत्तरोत्तर प्रयास कर रहा है। इसके साथ ही भारत एशिया का पहला देश बन गया है, जिसके पास उपग्रह आधारित लैण्डिंग प्रक्रिया है।

संकलन- पंकज तिवारी
 


Comments
List view
Grid view

Current News List