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Post at: May 06 2022

देश का पहला सी-वीड पार्क

पृष्ठभूमि

  • राष्ट्रीय बजट, 2021 में समुद्री शैवाल की खेती को बढ़ावा देने के लिए तमिलनाडु में एक बहुउद्देशीय समुद्री शैवाल पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव किया गया था।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 16 अप्रैल, 2022 को मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री ने तमिलनाडु में देश का पहला सी-वीड पार्क (Sea Weed Park)  स्थापित करने की घोषणा की।
  • इस पार्क की स्थापना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत की जाएगी।
  • यह पार्क मछुआरों की आजीविका सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेगा।

प्रमुख बिंदु

  • सी-वीड पार्क को, विशेषज्ञ आर्थिक क्षेत्र (SEZ)  दर्जे के तहत स्थापित किया जाएगा।
  • राज्य में मत्स्यपालन परियोजनाओं ; जैसे शीत भण्डारण, मछली प्रसंस्करण संयंत्र की स्थापना और गहरे समुद्र में जलीय कृषि के लिए 20,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
  • मछली पकड़ने पर प्रतिबंध अवधि के दौरान केंद्र सरकार की ओर से राहत सहायता के रूप में 1500 रुपये प्रदान किए जाएंगे।
  • मछुआरों के लिए एक समूह बीमा योजना लागू की जाएगी। 
  • मछली स्टॉक बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत एक परियोजना लागू की जाएगी।

समुद्री सी-वीड (सिवार)

  • समुद्री सी-वीड (सिवार) बिना फल वाले आदिम समुद्री शैवाल को कहा गया है। इसमें जड़, तना और पत्तियां नहीं होती । 
  • ये लाल, हरे और काले अलग-अलग रंगों के होते हैं। ये जल के नीचे सूक्ष्म से लेकर बड़े समूहों के रूप में मौजूद होते हैं।
  • ये समुद्री पारिस्थितिक तंत्र में एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
  • बड़े सी-वीड (सिवार) जल के भीतर घने वनों का निर्माण करते हैं। इन्हें केल्प वन कहा जाता है।
  • ये मछली, आॅक्टोपस, समुद्री घोंघे तथा अर्चिन जैसे जीवों के लिए नर्सरी के रूप में कार्य करते हैं।
  • ये अधिकांश समुद्र के उथले और गहरे जल एवं ज्वारनदमुख (Estualee)  तथा पश्च जल (Back waters) तथा अंतर्ज्वारीय क्षेत्र में पाए जाते हैं।

भारत में समुद्री सिवार की प्रजातियां

  • भारत में व्यावसायिक रूप से पोषित समुद्री शैवाल प्रजातियों में प्रमुख रूप से कप्‍पकाइकस, अल्वारेंजी, ग्रेसिलेरिया एडुलिस, गेलिडिएला एसरोसा, सरगुसम एसपीपी शामिल है।

समुद्री शैवाल का महत्व

 प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना

  • 10 सितंबर, 2020 को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत की गई थी।
    •  इसके लिए प्रावधान केंद्रीय बजट 2019-20 में किया गया था।
  • इस योजना का उद्देश्य पांच वर्ष (2020-25) की अवधि में मत्स्यपालन क्षेत्र के सतत विकास के माध्यम से नीली क्रांति लाना है।
  • यह मत्स्यपालन क्षेत्र को विकसित करने के लिए एक छत्र (Umbrella) योजना है- इसके दो घटक हैं-

(i)  केंद्रीय क्षेत्र योजना (सीएस)

  •  गैर-लाभार्थी उन्मुख योजना
  • लाभार्थी उन्मुख योजना (सामान्य श्रेणी के लिए केंद्रीय सहायता-40 %, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/महिला-60 %)

(ii) केंद्रीय प्रायोजित योजना (सीएसएस) :- ंपूर्वोत्तर (राज्यों के लिए केंद्रीय सहायता 90% अन्य राज्य -60 % और केंद्रशासित-100 % )

  •  गैर-लाभार्थी उन्मुख योजना
  •  लाभार्थी उन्मुख योजना ।
  • केंद्रीय प्रायोजक योजना घटक में तीन व्यापक उप-घटक शामिल होंगे-

लाभार्थियों में शामिल होंगे-

संकलन- पंकज तिवारी
 


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