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आईएनएस वाग्‍शीर नौसेना में शामिल

पनडुब्बी 

  • पनडुब्बी एक प्रकार का जलयान है, जो पानी के अंदर रहकर काम कर सकता है।
  • पनडुब्बी प्राय: सतह पर डीजल इंजन और जल के अंदर विद्युत मोटरों पर चलती है।
  • परमाणु शक्ति के विकसित हो जाने के बाद इनके परिचालन में नाभिकीय रिएक्टरों का उपयोग भी होने लगा है।
  • परमाणु पनडुब्बियां जल सतह के नीचे दीर्घावधि तक संचालित रह सकती हैं।
  • सामान्य गश्त (Normal Patrols) की स्थिति में इन पनडुब्बियों की सतह से नीचे संचालित रह पाने की अवधि 100 दिवसों तक बढ़ाई जा सकती है।
  • जबकि, परंपरागत डीजल-विद्युत चालित पनडुब्बियों को अपनी बैटरियां रिचार्ज करने के लिए ऑक्सीजन हेतु प्रत्येक तीन-चार दिन के अंतराल पर जल सतह के ऊपर आना अनिवार्य होता है।

प्रोजेक्ट 75

  • वर्तमान में मुंबई स्थित मझगांव डाॅक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा फ्रांस के मेसर्स नेवल ग्रुप (Naval Group)  के सहयोग से प्रोजेक्ट 75 के तहत, कलवरी श्रेणी की 6 पनडुब्बियों का निर्माण किया गया है।
  • ये डीजल-इलेक्‍ट्रिक पनडुब्बियां फ्रांस की स्काॅर्पीन श्रेणी (Scorpene Class) की पनडुब्बियों पर आधारित हैं:  
  • यह 6 पनडुब्बियां हैं-कलवरी, खंदेरी, करंज, वेला, वागीर और वाग्शीर।
  • स्कॉर्पीन श्रेणी की इन पनडुब्बियों के निर्माण के लिए अक्टूबर, 2005 में भारत और फ्रांस के मध्य 3.75 बिलियन डाॅलर के समझौते पर हस्ताक्षर  किए गए थे।

स्कॉर्पीन पनडुब्बी

  • स्काॅर्पीन वास्तव में 1500 टन भार वर्ग की पारंपरिक पनडुब्बियां होती हैं।
  • यह पनडुब्बियां जल में  300 मीटर की गहराई तक जा सकती हैं।
  • इस श्रेणी की पनडुब्बियों का निर्माण फ्रांस के नेवल ग्रुप (पूर्व में DCNS)  द्वारा किया गया है।
  • स्कॉर्पीन पनडुब्बियां अत्यधिक ताकतवर पनडुब्बियां हैं, जो आधुनिक स्टील्थ (Stealth)  क्षमताओं से युक्त होती हैं।
  • ये पनडुब्ब्यिं लंबी दूरी के निर्देशित टारपीडो तथा पोत-रोधी मिसाइलों से भी लैस होती हैं।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 22 अप्रैल, 2022 को मुंबई स्थित नौसैनिक पोतगाह पर आयोजित समारोह में स्वदेश निर्मित पनडुब्बी INS  वाग्‍शीर को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया।
  • यह पनडुब्बी ‘पश्चिमी नौसेना कमान’ (Western Naval Command)  के पनडुब्बी बेड़े का अंग होगी।

INS वाग्‍शीर

  • INS वाग्शीर भारतीय नौसेना हेतु प्रोजेक्ट 75 के तहत, निर्माणाधीन 6 पनडुब्बियों की श्रृंखला की अंतिम पनडुब्बी है।
  • यह एक डीजल-इलेक्ट्रिक स्टील्थ पनडुब्बी है, जो रडार की पहंुच से बचकर निकल सकती है।
  • इसका नाम सैण्डफिश परिवार की मछली के नाम पर रखा गया हैं, जो गहरे पानी की घातक समुद्री शिकारी है।
  • उल्‍लेखनीय है, कि इसी नाम की एक पनडुब्बी रूस निर्मित भारतीय नौसेना में वर्ष 1974-97 के मध्य तैनात थी।

प्रोजेक्ट 75 के तहत अन्य पनडुब्बियां

  • स्काॅर्पीन श्रेणी की पहली पनडुब्बी, INS  कलवरी है, जिसे दिसंबर, 2017 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।
  • द्वितीय पनडुब्बी INS  खंदेरी की भारतीय नौसेना में तैनाती 28 सितंबर, 2019 को हुई थी।
  • इस श्रेणी की तृतीय पनडुब्बी INS करंज को 10 मार्च, 2021 को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।
  • चतुर्थ पनडुब्बी 'INS वेला ’ को 25 नवंबर, 2021 को शामिल किया गया।
  • जबकि, पांचवीं पनडुब्बी ‘INS वागीर’ को फरवरी, 2022 में शामिल किया गया।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  •  गौरतलब है, कि वर्ष 1999  में केंद्रीय मंत्रिमण्डल द्वारा भारतीय नौसेना के 30 वर्षीय पनडुब्बी कार्यक्रम को मंजूरी दी गई थी।
    • उक्त कार्यक्रम के तहत, वर्ष 2029 तक 24 पनडुब्बियों का निर्माण किया जाना है।
    • परियोजना 75 के तहत, 6 पनडुब्बियों का निर्माण उक्त कार्यक्रम का पहला भाग है।
    • परियोजना 75 के साथ ही 6 अतिरिक्त पनडुब्बियों का स्वदेश में निर्माण परियोजना 75-1 के तहत किया जाना है।
  • रक्षा मंत्रालय द्वारा ‘सामरिक भागीदारी नीति’ के अंतर्गत परियोजना 75-1 के तहत, निर्मित की जाने वाली पनडुब्बियों का निर्माण निजी क्षेत्र को आवंटित किया गया है।

निष्कर्ष 

  • यह ‘मेक इन इण्डिया’ कार्यक्रम को बढ़ावा देने में एक बड़ी परियोजना के रूप में सफल रही है।
  • यह ‘आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को सुनिश्चित करता है।
    •  जहां आयात पर वर्तमान निर्भरता को कम करता है और धीरे-धीरे स्वदेशी स्रोतों से आपूर्ति की निर्भरता सुनिश्चित करता है।
  • यह चीन और पाकिस्तान का मुकाबला करने और इण्डो पैसिफिक (Indo-Pacific)  की रक्षा के लिए निवारक तंत्र के रूप में सहायक साबित होगा।

संकलन-पंकज तिवारी
 


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