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Post at: Apr 30 2022

आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 18 अप्रैल, 2022 को राष्ट्रपति ने आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक, 2022 को स्वीकृति प्रदान की। 
  • इस प्रकार यह विधेयक अधिनियम बन गया।
  • विदित हो कि संशोधित अधिनियम ने कैदियों की पहचान अधिनियम (Identification of Prisoners Act) में संशोधन किया है, जो वर्ष 1920 में लागू किया गया था।
  • यह अधिनियम काफी पुराना है एवं यह दोषी व्यक्तियों की सीमित श्रेणी को केवल फिंगरप्रिंट एवं पदचिह्न (Foot Print)  लेने की अनुमति प्रदान करता था।
  • आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 मूल अधिनियम का स्थान लेता है।

आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 के प्रमुख प्रावधान

  • नवीन अधिनियम पुलिस एवं कारागार अधिकारियों को रेटिना तथा आईरिस स्कैन सहित भौतिक एवं जैविक प्रतिदर्शों (Samples)  को संग्रहित करने एवं विश्लेषण करने की अनुमति प्रदान करता है।
  • अधिनियम के अंतर्गत नमूना देने से इंकार करना भारतीय दण्ड संहिता, 1860  की धारा 186 के तहत अपराध करना माना जाएगा।
  • भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 186 के अनुसार, जो भी कोई किसी लोकसेवक के सार्वजनिक कृत्यों के संचालन में बाधा उत्पन्‍न करेगा, उसे एक निश्चित अवधि हेतु कारावास की सजा प्रदान की जा सकती है। यह सजा तीन महीने तक हो सकती है।
  • ध्यातव्य है, कि नवीनतम अधिनियम के प्रावधान किसी भी निवारक निरोध कानून के तहत, पकड़े गए व्यक्तियों पर भी लागू होंगे।
  • उल्‍लेखनीय है, कि परीक्षण या माप को रिकॉर्ड करने के लिए हेड कांस्टेबल रैंक के पुलिस कर्मियों, अधिकृत किया गया है।
  • राष्ट्रीय आपराधिक रिकॉर्ड ब्यूरो 75 वर्ष तक भौतिक एवं जैविक प्रतिदर्शों को संरक्षित कर सकता है।

दण्डाधिकारी की शक्ति (Power of megistrate)

  • अधिनियम के तहत, एक मजिस्ट्रेट किसी व्यक्ति को CRPC के तहत जांच या कार्यवाही हेतु विवरण देने का निर्देश दे सकता है। 
  • मजिस्ट्रेट मेट्रोपॉलिटिन मजिस्ट्रेट, प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट या कार्यकारी मजिस्ट्रेट हो सकते हैं।

नियम बनाने की शक्ति

  • मूल अधिनियम जांच से संबंधित नियम  को राज्य पर छोड़ता है। वर्तमान अधिनियम नियम  बनाने की शक्ति को विस्तार देता है।
  • अधिनियम के अंतर्गत केंद्र भी नियम बना सकता है।
  • केंद्र एवं राज्य सरकारें निम्नलिखित मामलों पर नियम बना सकती हैं-

​​​​​​​(i)  विवरण एकत्र करने का तरीका।
(ii)  NCRB  द्वारा विवरण के संग्रह, भण्डारण, संरक्षण, विनाश, प्रसार एवं निपटान का तरीका।

संकलन-आलोक त्रिपाठी
 


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