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Post at: Apr 29 2022

सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट तकनीक का सफलतापूर्वक परीक्षण

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 8 अप्रैल‚ 2022 को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के तट पर चांदीपुर में स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (Integrated Test Range : ITR) से सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट तकनीक का सफलतापूर्वक परीक्षण किया।
  • परीक्षण ने जटिल मिसाइल प्रणाली (Complex Missile System) में शामिल सभी महत्वपूर्ण घटकों (Critical Components) के विश्वसनीय कामकाज का प्रदर्शन किया और मिशन के सभी उद्देश्यों को पूरा किया।
  • एकीकृत मिसाइल टेस्ट (ITR) द्वारा तैनात टेलीमेट्री (Telemetry), रडार (Radar) और इलेक्ट्रो ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम (Electro Optical Traking System) जैसे कई उपकरणों द्वारा लिए गए डाटा से प्रणाली के प्रदर्शन की पुष्टि की गई है।

सॉलिड फ्यूल डक्टेट रैमजेट (SFDR) क्या है?

  • यह तकनीक एक मिसाइल प्रणोदन प्रणाली (Missile Propulsion System) है‚ जो रैमजेट (Ramjet) सिद्धांत की अवधारणा पर कार्य करता है।
  • रैमजेट वायु श्वास (Air breathing) जेट इंजन का एक रूप है‚ जो घूर्णन कंप्रेसर (Rotating Compresser) के बिना दहन (Combustion) के लिए आने वाली हवा को संपीडित (Compress) करने के लिए वाहन की आगे की गति का उपयोग करता है।

  • ईंधन को दहन कक्ष (Combustion Room) में प्रवेश कराया जाता है‚ जहां यह गर्म संपीडित हवा के साथ मिश्रित होता है और प्रज्वलित होता है।
  • रैमजेट में दहनशील की प्रक्रिया में बाहरी हवा को ’रैमिग’’ करके उच्च दबाव उत्पन्न किया जाता है। 
  • परिणामस्वरूप प्रणोदन प्रणाली में लाई जाने वाली बाहरी हवा कार्यशील द्रव (Working Fluid) बन जाती है।
  • एक रैमजेट संचालित वाहन को एक रॉकेट की तरह सहायक टेक ऑफ की आवश्यकता होती है‚ जिससे इसे गति में तेजी लाने में मदद मिलती है और जहां यह जोर पैदा (Thrust) करता है।
  • यह प्रणाली ठोस ईंधन वाले वायु श्वास रैमजेट इंजन का उपयोग करता है।
  • ठोस प्रणोदक रॉकेट के विपरित‚ रैमजेट उड़ान के दौरान वायुमण्डल से ऑक्सीजन (O2) लेता है।
  • परिणामस्वरूप‚ यह वजन में हल्का होता है और अधिक ईंधन ले जा सकता है।

महत्व

  • तकनीक का सफल परीक्षण भारत को कुछ चुनिंदा देशों के क्लब में प्रवेश को सुनिश्चित करता है‚ जो अगली पीढ़ी की मिसाइल तकनीक का उपयोग करते हैं।
  • यह सुपरसोनिक गति (1.2 से 5 मैक) से लंबी दूरी पर हवाई खतरे को लक्ष्य करने में सक्षम बनाता है।
  • हवा-से-हवा मार करने वाली मिसाइलें SFDR तकनीक का उपयोग करके लंबी दूरी तक मार कर सकती हैं।
  • अब भारत के पास दो श्रेणियों (Layer) में सबसे तेज लंबी दूरी की मिसाइल सुरक्षा तंत्र हो सकती है।
  • जो शत्रुतापूर्ण हमलों में पूर्ण और बहुस्तरीय हवाई सुरक्षा प्रदान करती है।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • यह तकनीक भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित एक मिसाइल प्रणोदन तकनीक है।
  • एस.एफ.डी.आर. (SFDR) को रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला‚ हैदराबाद द्वारा अन्य डीआरडीओ (DRDO) प्रयोगशालाओं; जैसे- अनुसंधान केंद्र इमारत‚ हैदराबाद और उच्च सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला‚ पुणे के सहयोग से विकसित किया गया है।

रॉकेट इंजन व रैमजेट

  • पहले रॉकेट इंजन को ताकत देने के लिए ईंधन के तौर पर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को मिलाकर प्रयोग किया जाता था।
    • परिणामस्वरूप‚ रॉकेट का वजन बढ़ जाता था।
    • इसका असर गति और क्षमता पर पड़ता था।
    • आर्थिक रूप से यह महंगा भी साबित होता था।
  • वहीं‚ रैमजेट में ’एयरो थर्मोडायनामिक डक्ट’ तकनीक का उपयोग किया जाता है‚ जिसमें ऑक्सीजन को बाहर से संपीडित कर उपयोग किया जाता है।
  • परिणामस्वरूप‚ ऑक्सीडाइजर का उपयोग नहीं होने से रॉकेट का वजन कम हो जाता है।
  •  ईंधन वहन क्षमता अधिक होने से रॉकेट उच्च गति व लंबी दूरी तक मार कर सकता है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)

  • इसकी स्थापना वर्ष 1958 में रक्षा विज्ञान संगठन (Defence Science Organisation) के साथ भारतीय सेना के तकनीक विकास प्रतिष्ठान (Establishment) और तकनीक विकास और उत्पादन निदेशालय (DTDP) के समामेलन के बाद की गई थी।
  • यह भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय का ’आर एण्ड डी विंग’ (अनुसंधान व विकास शाखा) है।
  • जो रक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करता है।
  • यह भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रणालियों के विकास तथा समाधानों के विकास से देश रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर व अग्रणी बनाता है।

​​​​​​​संकलन — पंकज तिवारी


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