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दिल्‍ली नगर निगम (संशोधन) अधिनियम, 2022

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 18 अप्रैल, 2022 को भारत के राष्ट्रपति ने दिल्‍ली नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2022 को मंजूरी प्रदान की। इस प्रकार यह विधेयक अधिनियम बन गया।
  • इससे पूर्व 30 मार्च, 2022 को लोक सभा तथा 5 अप्रैल, 2022 को राज्य सभा से यह विधेयक पारित हुआ था।

अधिनियम का उद्देश्य:  दिल्‍ली में नगर निगमों का एकीकरण

  • विदित हो कि प्रस्तुत अधिनियम दिल्‍ली नगर निगम अधिनियम, 1957 में संशोधन करता है।
  • मूल अधिनियम में वर्ष 2011 में दिल्‍ली विधानसभा ने एक संशोधन किया था।
  • इस संशोधन के द्वारा दिल्‍ली नगर निगम को तीन भागों में बांट दिया गया था-

(i) उत्तरी दिल्‍ली नगर निगम
(ii) दक्षिणी दिल्‍ली नगर निगम
(iii) पूर्वी दिल्‍ली नगर निगम

  • दिल्‍ली नगर निगम (संशोधन) अधिनियम, 2022 इन तीन नगर निगमों को एक नगर निगम में परिवर्तित करने का प्रावधान करता है।

दिल्‍ली सरकार की अधिकारिता

  • वर्ष 2011 में संशोधित अधिनियम दिल्‍ली सरकार को यह अधिकार देता है, कि वह अधिनियम के अंतर्गत कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर फैसला ले सकती है।

वे मुद्दे इस प्रकार हैं-
(i) पार्षदों की कुल सीटों की संख्या तथा अनुसूचित जाति के सदस्यों हेतु आरक्षित सीटों की संख्या
(ii) निगमों के क्षेत्र को परिक्षेत्रों (जोनों) एवं वार्डों में विभाजित करना
(iii)  वाड्‍र्स का परिसीमन
(iv)  कमिश्नर के भत्ते एवं अवकाश से संबंधित मुद्दा 
(v)  निगम के वित्त में नुकसान के संदर्भ में क्षतिपूर्ति का मुद्दा

  • नवीन अधिनियम उपर्युक्त शक्तियों को केंद्र के अधीन कर देता है।
  • अधिनियम पार्षदों की संख्या को 272 से घटाकर 250 तक कर देता है।
  • नवीनतम अधिनियम स्थानीय निकायों के निदेशक के प्रावधान को हटाता है।
  • नवीनतम अधिनियम एक नया प्रावधान करता है, कि जब तक अधिनियम के लागू होने के बाद निगम की पहली बैठक नहीं होती, तब तक केंद्र सरकार निगम की शक्तियों का प्रयोग करने हेतु एक विशेष अधिकारी की नियुक्ति कर सकती है।
  • नवीनतम अधिनिमय नगर निगम के कार्यों में ई-गवर्नेंस की भूमिका को बढ़ाने पर जोर देता है।
  • मूल अधिनियम में प्रावधान है, कि किसी भवन की सफाई करने हेतु नियुक्त सफाई कर्मचारी को अपनी सेवा को समाप्त करने से पूर्व उचित कारण बताना होगा या 14 दिन का समय देना होगा।
  • नवीनतम अधिनियम इस प्रावधान को समाप्त कर देता है।

संकलन-आलोक त्रिपाठी


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