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संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (संशोधन)

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 8 अप्रैल‚ 2022 को जारी संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (संशोधन) विधेयक राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृत हो गया।
  • इस प्रकार यह विधेयक अधिनियम बन गया।

पृष्ठभूमि

  • ज्ञातव्य है‚ कि इस विधेयक को 7 फरवरी‚ 2022 को लोक सभा में प्रस्तुत किया गया था।
  • 28 मार्च‚ 2022 को यह विधेयक लोक सभा से एवं 6 अप्रैल‚ 2022 को यह विधेयक राज्य सभा द्वारा पारित कर दिया गया।

विधेयक का उद्देश्य- त्रिपुरा में अनुसूचित जनजातियों की सूची में कुछ समुदायों को शामिल करना

  • संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (संशोधन) अधिनियम‚ 2022 मूल अधिनियम 1950 की अनुसूची के भाग XV में संशोधन करता है।
  • विदित हो कि अधिनियम अनुसूचित जनजातियों की सूची में ‘डार्लोंग’ समुदाय को ‘कूकी’ की उप-जनजाति के रूप में मान्यता देता है।
  • यह संशोधन इसलिए किया गया; क्योंकि त्रिपुरा के पहाड़ी क्षेत्रों में कूकी समुदाय के कई उप-समुदायों को अनुसूचित जातियों के रूप में मान्यता नहीं प्राप्त है।

त्रिपुरा में जनजातीय आबादी

  • त्रिपुरा में लगभग 20 आदिवासी समुदाय निवास करते हैं।
  • ये आदिवासी समुदाय 18 जनवरी‚ 1982 को गठित ‘त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (Tripura Tribal Areas Autonomous District Council) में निवास करते हैं।
  • त्रिपुरा की प्रमुख जनजातियां हैं- रियांग‚ नोआतिया‚ चकमा‚ मोग‚ लुशाई‚ कूकी‚ हलाम‚ संथाल‚ भूटिया‚ चैमल‚ लेप्चा‚ गारो‚ खासी‚ जयंतिया आदि।

भारत में अनुसूचित जनजातियों की स्थिति

  • अनुसूचित जनजाति शब्द का उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 में मिलता है।
  • संविधान के अनुच्छेद 342 के अनुसार‚ अनुसूचित जनजातियां वे आदिवासी या आदिवासी समुदाय या उनके भाग या समूह हैं‚ जिन्हें राष्ट्रपति द्वारा एक सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा इस प्रकार घोषित किया गया हो।
  • ज्ञातव्य है‚ कि अनुसूचित जनजातियां देश की कुल आबादी का लगभग 8.14 प्रतिशत हैं‚ जबकि ये देश के लगभग 15 प्रतिशत भाग पर निवास करते हैं।

अनुसूचित जनजातियों की शैक्षणिक स्थिति


अनुसूचित जनजातियों के लिए भारत में विभिन्न कानून

संकलन- आलोक त्रिपाठी

 


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