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महिलाओं के लिए नि:शुल्क विधिक सहायता क्‍लीनिक

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 29 मार्च, 2022 को राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने दिल्‍ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (Delhi State Legal Services Authority: DSLSA) के सहयोग से एक कानूनी सहायता क्‍लीनिक शुरू किया है। 
  • यहां महिलाओं को नि:शुल्क कानूनी सहायता प्रदान की जाएगी।
  • राष्ट्रीय महिला आयोग, अन्य राज्य महिला आयोगों में भी इसी तरह के कानूनी सेवा क्‍लीनिक (Legal Aid Clinic) स्थापित करने की योजना पर कार्य कर रही है।

कानूनी सहायता क्‍नीलिक (Legal Aid Clinic)

  • क्‍लीनिक, महिलाओं की शिकायतों के समाधान के लिए एकल खिड़की सुविधा (Single Window Facility) के तौर पर काम करेगा। 
  • कानूनी सहायता क्‍लीनिक, नई दिल्‍ली में आयोग के कार्यालय से संचालित होगा।
  • डीएसएलएसए (DSLSA) के पैनल में कानूनी सेवा प्रदान करने वाले अधिवक्ता महिलाओं की मदद करेंगे।
  • क्‍लीनिक, महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें कानूनी परामर्श और सहायता प्राप्त करने के लिए वन स्टाॅप सेंटर (One Stop Center) प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। 

अखिल भारतीय कानूनी जागरूकता कार्यक्रम

  • अक्टूबर, 2021 में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW)  ने राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA)  के साथ अखिल भारतीय कानूनी जागरूकता कार्यक्रम (All India Legal Awarness Programme) शुरू किया।
  • कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्‍न महिलाओं से संबंधित कानूनों के तहत प्रदान किए गए कानूनी अधिकारों और उपचारों के बारे में व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना है।
    • इससे पहले, आयोग ने 15 अगस्त, 2020 को जमीनी स्तर पर महिलाओं के लिए ‘नालसा’ के सहयोग से एक पायलट परियोजना ‘कानूनी जागरूकता कार्यक्रम’ शुरू किया था।

कानूनी जागरूकता के माध्यम से महिलाओं का सशक्तीकरण (Empowerment) 

  • 30 अक्टूबर, 2021 को वाराणसी, उत्तर प्रदेश में ‘‘कानूनी जागरूकता के माध्यम से महिलाओं का सशक्तीकरण’’ कार्यक्रम की शुरुआत की गई।
  • यह कार्यक्रम राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के संयुक्त कार्यक्रम में शुरू किया गया।
    • कार्यक्रम का उद्देश्य देशभर के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में महिलाओं को न्याय वितरण प्रणाली की विभिन्‍न्‍ा मशीनरी को निवारण के लिए उपलब्ध कराया जा सके।

अन्य महत्वपूर्ण पहल

  • राष्ट्रीय महिला आयोग ने ‘‘महिलाओं से संबंधित विधियों के बारे में कानूनी जागरूकता कार्यक्रम के लिए मानकीकृत माॅड्‍यूल’’ विकसित किया है। 
  • इस माॅड्‍यूल में नए विधानों और संशोधनों ; जैसे कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम, 2013 और दण्ड संशोधन विधि, 2013 आदि सहित विवरण/ विधियों को शामिल किया गया है। 

राष्ट्रीय महिला आयोग

  • आयोग की स्थापना ‘राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990’ (भारत सरकार का वर्ष 1990 का अधिनियम संख्या 20) के तहत, जनवरी, 1992 में की गई है।
  • आयोग एक सांविधिक निकाय है।

प्रमुख कार्य

  • महिलाओं के लिए संवैधानिक और विधायी सुरक्षा उपायों की समीक्षा करना।
  • उपचारी विधायी उपायों की सिफारिश करना।
  • शिकायतों के निवारण को सुकर बनाना।
  • महिलाओं को प्रभावित करने वाले सभी नीतिगत मामलों पर सरकार को सलाह देना।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA)

  • समाज के कमजोर वर्गों को मुफ्त कानूनी सेवाएं प्रदान करने और विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए लोक अदालतों का आयोजन करने के लिए कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत गठन किया गया है।
    • वर्तमान में माननीय न्यायमूर्ति एन.वी. रमणा, भारत के मुख्य न्यायाधीश संरक्षक-इन-चीफ (Patron-in-Chief)  हैं।
  • राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण का नेतृत्व संबंधित उच्‍च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश करते हैं।
  • जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रत्येक जिले में जिला न्यायालय परिसर में स्थित है और संबंधित जिले के जिला न्यायाधीश की अध्यक्षता में है।
    • ‘नालसा’ की स्थापना, भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 39 (क) के अनुरूप लोगों को मुफ्‍त कानूनी सेवाएं देने और राज्यों में लोक अदालतों का संचालन करके समान अवसर के आधार पर न्याय को बढ़ावा देने आदि उद्देश्यों के लिए हुई है।

संकलन- पंकज तिवारी
 


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