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चेहरा पहचान प्रणाली

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • अप्रैल‚ 2022 में नागरिक उड्डयन मंत्री  ने लोक सभा को सूचित किया है‚ कि चेहरा पहचान प्रणाली (Facial Recognition System-FRS) को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना है।
  • FRS प्रथम चरण में मार्च‚ 2023 तक निम्न 7 हवाई अड्डों पर स्थापित की जाएगी।

  • चेहरा पहचान प्रणाली नागरिक उड्डयन मंत्रालय की डिजी यात्रा पहल का हिस्सा है।
  • यह प्रणाली यात्रियों को हवाई अड्डों पर निर्बाध और परेशानी मुक्त अनुभव प्रदान करेगी।
  • साथ ही‚ यह सुरक्षा व्यवस्था में भी सुधार करेगी।

डिजी यात्रा पहल

  • नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 4 अक्टूबर‚ 2018 को ‘डिजी यात्रा पहल’ की घोषणा की थी।
  • नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ‘डिजी यात्रा पहल’ हवाई अड्डों पर यात्रियों के बायोमेट्रिक आधारित डिजिटल प्रसंस्करण पर एक नीति है‚ जो यात्रियों के लिए सहज यात्रा अनुभव को बढ़ाने और साथ-ही-साथ सुरक्षा में सुधार के लिए एक जुड़े पारिस्थितिकीय तंत्र की परिकल्पना करती है।
  • इस पहल का उद्देश्य कागज रहित और परेशानीमुक्त हवाई यात्रा को बढ़ावा देना है।
  • डिजी यात्रा पहल निम्न चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है-

(i) यात्री संबद्धता (Connected Passenger)
(ii) हवाई पत्तन संबद्धता (Connected Airport)
(iii) उड़ान संबद्धता (Connected Flying)
(iv) प्रणाली संबद्धता (Connected System)

  •  इस पहल के साथ‚ नागरिक उड्डयन मंत्रालय टिकट बुकिंग‚ हवाई अड्डा परिसर में प्रवेश‚ बोर्डिंग पास‚ सिक्योरिटी चेक-इन आदि को डिजिटल बनाने पर विचार कर रही है।

​​​​​​​चेहरा पहचान प्रणाली (FRS)

  • चेहरे की पहचान एक बायोमेट्रिक तकनीक है‚ जो किसी व्यक्ति की पहचान करने के लिए विशिष्ट चेहरे की विशेषताओं का उपयोग करती है।
  • इसका उपयोग फोटो‚ वीडियो या रीयल-टाइम में लोगों की पहचान करने के लिए किया जा सकता है।

प्रक्रिया

  • कंप्यूटर एल्गोरिदम‚ चेहरे पर मौजूदा विशिष्ट चिह्नों; जैसे कि चीकबोन (आँख के नीचे की हड्डी) के आकार‚ होंठों की आकृति आदि को मैप (खाका तैयार) करते हैं।
  • ये फिर इन्हें एक संख्यात्मक कोड में बदलते हैं‚ जिसे फेसप्रिंट कहा जाता है।
  • इसके बाद सत्यापन या पहचान के लिए‚ यह सिस्टम फेसप्रिंट के एक बड़े मौजूदा डाटाबेस के साथ‚ ‘फेसप्रिंट’ की तुलना करता है।

चेहरा पहचान प्रणाली (FRS) के उपयोग

(i) इससे एंट्री प्वॉइंट्‌स‚ सुरक्षा जांच आदि; जैसे चेक 
प्वॉइंट्‌स पर ऑटोमेटिक प्रोसेसिंग संभव हो पाएगी।
(ii) इससे अपराध की जांच करने में मदद मिलेगी तथा यह आसान और तेज विश्लेषण के लिए सूचना उपलब्ध कराएगी।
(iii) अपराधियों‚ लापता बच्चों/व्यक्तियों‚ अज्ञात शवों आदि की पहचान में मदद मिलेगी।
FRS से संबंधित संभावित चिंताएं
(i) सरकार इसका इस्तेमाल व्यापक निगरानी की लिए कर सकती है।
(ii) इससे निजता का उल्लंघन हो सकता है।
(iii) चूंकि भारत में अभी कोई डाटा संरक्षण कानून नहीं है‚ अत: इसके अभाव में ड्‌यू प्रॉसेस (वैध प्रक्रिया) का उल्लंघन किया जा सकता है।

संकलन- शिशिर अशोक सिंह


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