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रैंप (RAMP) योजना

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • हाल ही में (मार्च‚ 2022) केंद्रीय मंत्रिमण्डल द्वारा "MSME के प्रदर्शन को बेहतर करना और इसकी गति में तेजी लाना यानी RAMP योजना को मंजूरी प्रदान की गई है।
  • RAMP : Raising and Accelerating MSME Performances.
  • RAMP, केंद्रीय क्षेत्रक की एक नई योजना है।
  • इसकी शुरुआत वित्त वर्ष 2022-23 में होगी।
  • इस योजना की अवधि 5 वर्ष है।
  • इसे विश्व बैंक की सहायता से शुरू किया गया है।
  • RAMP योजना कोविड-19 वैश्विक महामारी से निपटने और इससे उबरने के लिए सूक्ष्म‚ लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय के अलग-अलग प्रयासों को सहायता प्रदान करती है।

RAMP योजना के उद्देश्य

क्रियान्वयन

  • RAMP योजना की निगरानी और नीतिगत समीक्षा ’’राष्ट्रीय MSME परिषद’’ नामक एक शीर्ष निकाय द्वारा की जाएगी।
  • इसकी अध्यक्षता MSME मंत्री करेंगे।
  • इस परिषद में अन्य मंत्रालयों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
  • इसकी सहायता के लिए एक सचिवालय भी होगा।

RAMP योजना का महत्व

(i)     RAMP योजना निम्नलिखित के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत मिशन में सहायता प्रदान करेगा।

  •  नवाचार को बढ़ावा देकर
  • औद्योगिक मानकों को सुधार करके
  • घरेलू विनिर्माण आदि को बढ़ावा देकर।

​​​​​​​(ii)     यह योजना MSMEs हेतु अधिक प्रभावी और किफायती हस्तक्षेपों के लिए नीति तैयार करने में सहायता प्रदान करेगी।

  • इससे MSMEs की प्रतिस्पर्धात्मकता और व्यावसायिक संधारणीयता में सुधार होगा।

(iii)    इसके तहत‚ राज्यों में MSMEs के विस्तार को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।
(iv)   इसके तहत‚ MSMEs को अधिक प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए आवश्यक तकनीकी इनपुट्‌स उपलब्ध कराए जाएंगे।
(v)    यह योजना रोजगार पैदा करने‚ बाजार को आगे बढ़ाने और वित्त की उपलब्धता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • यह कमजोर वर्गों और हरित पहलों को भी समर्थन प्रदान करेगी।

​​​​​​​सूक्ष्म‚ लघु और मध्यम उद्योगों की परिभाषा

  • 1 जुलाई‚ 2020 को केंद्र सरकार एतदद्वारा सूक्ष्म‚ लघु और मध्यम उद्यमों के लिए निम्नलिखित मानदण्डों को अधिसूचित करती है‚ नामत:–

​​​​​​​i.     सूक्ष्म उद्यम वह है‚ जिसमें संयंत्र और मशीनरी अथवा उपस्कर में एक करोड़ रुपये से अधिक का निवेश नहीं होता है तथा उसका कारोबार पांच करोड़ रुपये से अधिक नहीं होता है।
ii.     लघु उद्यम वह है‚ जिसमें संयंत्र और मशीनरी अथवा उपस्कर में दस करोड़ रुपये से अधिक का निवेश नहीं होता है तथा उसका कारोबार पचास करोड़ रुपये से अधिक नहीं होता है।
iii.     मध्यम उद्यम वह है‚ जिसमें संयंत्र और मशीनरी अथवा उपस्कर में पचास करोड़ रुपये से अधिक का निवेश नहीं होता है तथा उसका कारोबार दो सौ पचास करोड़ रुपये से अधिक नहीं होता है।

अन्य तथ्य

(i)     भारत में लगभग 40 प्रतिशत सूक्ष्म‚ लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के पास वित्त तक पहुंच नहीं है। 

  • जबकि MSMEs भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।

​​​​​​​(ii)  MSMEs देश के विनिर्माण सकल घरेलू उत्पाद (Manufacturing GDP) में लगभग 6.11 प्रतिशत और सेवा गतिविधि सकल घरेलू उत्पाद में 24.63 प्रतिशत और साथ ही भारत के विनिर्माण उत्पादन में 33.4 प्रतिशत का योगदान करते हैं।
(iii)   MSMEs लगभग 120 मिलियन लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं और भारत से होने वाले कुल निर्यात में लगभग 45 प्रतिशत का योगदान करते हैं। 
(iv)  लगभग 20 प्रतिशत MSMEs ग्रामीण क्षेत्रों से बाहर स्थित हैं।

  • जो कि इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण ग्रामीण कार्यबल के नियोजन को इंगित करता है।

संकलन — शिशिर अशोक सिंह
 


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