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पारे पर मिनामाता अभिसमय : Cop-4

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • पारे पर मिनामाता अभिसमय (Minamata Convention on Mercury) के पक्षकारों का चौथा सम्मेलन (COP-4) 21 से 25 मार्च‚ 2022 तक इण्डोनेशिया के बाली में हुआ। 
    • यह सम्मेलन पहले ऑनलाइन खण्ड के समापन के बाद फिर से शुरू हुआ‚ जो नवंबर‚ 2021 में आयोजित किया गया था।

Cop-4 के मुख्य निष्कर्ष

  • बाली में आयोजित सम्मेलन में‚ इण्डोनेशिया के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र ने भी एक वैश्विक बाली घोषणा-पत्र प्रस्तुत किया है।
    • इसमें मिनामाता अभिसमय के पक्षकारों से वैश्विक स्तर पर हो रहे पारे के गैर-कानूनी व्यापार से निपटने का आह्वान किया गया है।
  • हालांकि‚ यह घोषणा-पत्र गैर-बाध्यकारी है। इसमें पक्षकारों से निम्नलिखित आह्वान किया गया है—

(i)    पारे के व्यापार की निगरानी और प्रबंधन के लिए निम्नलिखित को विकसित करें—

  • व्यावहारिक उपकरण का विकास करें।
  • अधिसूचना जारी करें।
  • सूचनाओं को साझा करने की एक प्रणाली विकसित करें।

(ii)    पारे के गैर-कानूनी व्यापार से निपटने से संबंधित अनुभवों और तरीकों का आपस में आदान-प्रदान करें।
(iii)    दस्तकारी और छोटे पैमाने पर सोने के खनन में पारे के उपयोग को कम करें।
(iv)    सभी परियोजनाओं‚ गतिविधियों और कार्यक्रमों के तहत जेण्डर को मुख्यधारा में लाने के प्रयासों पर भी केंद्रित किया गया।
पारे पर मिनामाता अभिसमय

  • पारे पर मिनामाता अभिसमय को जेनेवा में वर्ष 2013 में अपनाया गया था।
  • यह मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को पारे के प्रतिकूल प्रभावों से बचाने के लिए विश्व की पहली कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि है।
    • इस अभिसमय का नाम उस जापानी शहर (मिनामाता) के नाम से रखा गया है‚ जो 1950 के दशक में मिनामाता रोग का केंद्र बन गया था।
    • मिनामाता रोग‚ पारे की गंभीर विषाक्ता के कारण होने वाली एक तंत्रिका संबंधी बीमारी है।
  • भारत ने वर्ष 2014 में इस अभिसमय पर हस्ताक्षर किए थे और वर्ष 2018 में इसकी अभिपुष्टि (Ratify) की थी।
  • यह अभिसमय वर्ष 2017 में लागू हुआ था।

पारे के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्य

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (Who) ने पारे को उन शीर्ष 10 रसायनों या रसायनों के समूहों में शामिल किया है‚ जो लोक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चिंता का कारण हैं।
  • यह तंत्रिका तंत्र‚ पाचन और प्रतिरक्षा प्रणाली‚ फेफड़े‚ गुर्दे‚ त्वचा एवं आंखों पर विषाक्त प्रभाव डाल सकता है।
  • विश्व में संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद भारत पारे का सबसे अधिक उपयोग करने वाला दूसरा देश है।

संकलन — शिशिर अशोक सिंह


 


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