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विश्व जल विकास रिपोर्ट, 2022

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 9वें विश्व जल मंच (9th World Water Forum)  के दौरान 21 से 26 मार्च, 2022 तक डाकर, ‘‘सेनेगल में ‘भूजल : अदृश्य को दृश्यमान बनाना’ (Ground Water: Making the Invisible visible) नामक संयुक्त राष्ट्र विश्व जल विकास रिपोर्ट (WWDR, 2022) जारी की गई।
  • उल्‍लेखनीय है, कि इस रिपोर्ट का पहला संस्करण वर्ष 2003 में जारी किया गया था।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • भूजल (Ground water)  पृथ्वी के सभी तरल मीठे पानी का लगभग 99 प्रतिशत है, जिसमें समाज को सामाजिक/ आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ और अवसर प्रदान करने की क्षमता है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, भूजल पहले से ही पेयजल सहित घरेलू उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले कुल जल का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करता है।
  • WWDR, 2022 में भूजल को निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों का केंद्र बताया गया-
    •  गरीबी के खिलाफ लड़ाई
    • खाद्य एवं जल सुरक्षा
    • रोजगार सृजन
    • सामाजिक-आर्थिक विकास केंद्र
    • जलवायु परिवर्तन के प्रति समाज और अर्थव्यवस्थाओं का लचीलापन
  • एशिया-प्रशांत क्षेत्र विश्व का सबसे बड़ा भूजल क्षेत्र है, इसमें 10 देश शामिल हैं, जिनमें से 7 देशों (बांग्‍लादेश, चीन, भारत, इण्डोनेशिया, ईरान, पाकिस्तान और तुर्की) द्वारा सबसे अधिक भूजल का दोहन किया जाता है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, सिंचाई हेतु निकाले गए संपूर्ण जल का लगभग 25 प्रतिशत विश्व की 38 प्रतिशत सिंचित भूमि की सिंचाई कर रहा है।
  • वैश्विक मीठे पानी (Freshwater) की निकासी (Extraction) में महाद्वीपों की हिस्सेदारी प्रतिशतवार निम्नलिखित है-

  • संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों में लक्ष्य 6.6 अपने शब्दों में भूजल का स्पष्ट संदर्भ देता है।

भूजल पर सम्मेलन

  • सतत विकास में भूजल के महत्व को उजागर करने हेतु निम्नलिखित प्रमुख सम्मेलन वैश्विक पहल का हिस्सा हैं :-

(i)    मई, 2022 में आयोजित होने वाले ‘‘भूजल: सतत विकास लक्ष्यों की कुंजी’’ (Ground water: key to the Sustainable Development Goals)
(ii)इसके अतिरिक्त दिसंबर, 2022 में होने वाला ‘‘भूजल पर संयुक्त राष्ट्र-जल शिखर सम्मेलन (UN-Water Summit on Ground water)  

सर्वाधिक अनुमानित वार्षिक भूजल निष्कर्षण वाले शीर्ष 5 शहर (2010)

भूजल में भारत की स्थिति

  • 248.69 बिलियन क्‍यूबिक मीटर (2017) के वार्षिक भूजल निष्कर्षण (Ground Water  extraction) के साथ भारत विश्व में भूजल के सबसे बड़े उपयोगकर्ताओं में से एक है।  
  • गौरतलब है, कि निष्कर्षित किए गए भूजल का लगभग 89 प्रतिशत सिंचाई के लिए और शेष घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए उपयोग किया जाता है।
  • भारत में लगभग 60 प्रतिशत क्षेत्र की सिंचाई भूजल के माध्यम से की जाती है।
  • केंद्रीय भूजल बोर्ड के अनुसार, वार्षिक भूजल निकासी को तब सुरक्षित माना जाता है, जब निष्कर्षण दर वार्षिक पुन: पूर्ति योग्य पुनर्भरण (replenishable recharge) के 70 प्रतिशत से कम हो। 
  • उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 में देश के लिए निष्कर्षण का स्तर 63 प्रतिशत था, जो वर्ष 2004 में 58 प्रतिशत था। 
  • नीति आयोग ने वर्ष 2030 तक 70 प्रतिशत निष्कर्षण मूल्य प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

निष्कर्ष

  • ध्यातव्य है, कि वर्तमान में सभी क्षेत्रों में जल की बढ़ती मांग तथा वर्षा पैटर्न में व्यवधान के कारण भूजल पर निर्भरता बढ़ गई है। जिसके चलते उचित प्रबंधन और स्थायी रूप से उपयोग हेतु उचित कार्रवाई के साथ ठोस प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

संकलन-आदित्य भारद्वाज
 


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