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निर्यात तैयारी सूचकांक, 2021

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 25 मार्च, 2022 को नीति आयोग ने प्रतिस्पर्धा संस्थान (Institute of Competitiveness) के साथ साझेदारी में ‘निर्यात तैयारी सूचकांक, 2021’ (Export Preparedness Index, 2021) जारी किया।
  • निर्यात तैयारी सूचकांक, उप-राष्ट्रीय निर्यात संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण मूलभूत क्षेत्रों की पहचान करने के लिए एक डाटा संचालित प्रयास है।

  • इस सूचकांक में राज्यों को चार श्रेणियों में बांटा गया है।
  • समूह A- तटीय (Coastal) राज्य, जिनमें गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
  • समूह B-भू-अबाद्ध (Landlocked) राज्य, जिनमें राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, तेलंगाना तथा असम शामिल हैं।
  • समूह C-हिमालयी राज्य (Himalayan States), जिनमें हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, सिक्‍किम, त्रिपुरा, नगालैण्ड तथा अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं।
  • समूह D- केंद्रशासित प्रदेश/शहर राज्य (UT/City-State), जिनमें जम्मू एवं कश्मीर, लद्दाख, दिल्‍ली, चण्डीगढ़, दादरा एवं नागर हवेली, दमन एवं दीव, पुदुचेरी, गोवा तथा अण्डमान एवं निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार, समग्र रैंकिंग में शीर्ष चार राज्यों में गुजरात 78.86 के कुल स्कोर के साथ पहले स्थान पर है, जबकि महाराष्ट्र 77.14 के स्कोर के साथ द्वितीय, कर्नाटक 61.72 स्कोर साथ के तृतीय एवं तमिलनाडु 56.84 स्कोर के साथ चतुर्थ स्थान पर हैं। 
  • भू-आबद्ध राज्य में हरियाणा 53.20 स्कोर के साथ शीर्ष पर है, वहीं उत्तर प्रदेश 51.09 स्कोर के साथ द्वितीय स्थान पर  (समग्र रैंकिंग में छठे स्थान पर) है।
  • बिहार भू-आबद्ध राज्यों की श्रेणी में 32.06 अंकों के साथ 10वें स्थान पर है, जबकि समग्र रैंकिंग में 22वें स्थान पर है।
  • समग्र रैंकिंग में सबसे निचले स्थान (36) पर लक्षद्वीप है, जबकि अरुणाचल प्रदेश एवं मिजोरम क्रमश: 35वें एवं 34वें स्थान पर हैं।

निर्यात तैयारी सूचकांक में शीर्ष 5 राज्य

  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत के निर्यात को बढ़ावा देने में तीन प्रमुख चुनौतियों की पहचान की गई है, जो निम्न हैं-

1-निर्यात आधारभूत संरचना में क्षेत्र-विशेष एवं अंतर-क्षेत्र में असमानताएं
2-राज्यों में कमजोर व्यापार समर्थन व विकास उन्‍मुख आकांक्षा
3- जटिल और विशिष्ट निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान एवं विकास की आधारभूत संरचना की कमी।

  • इस रिपोर्ट का प्राथमिक लक्ष्य -सभी भारतीय राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा पैदा करना है, ताकि निर्यात्‍ा संवर्धन के लिए अनुकूल नीतियों का निर्माण किया जा सके।
  • उप-राष्ट्रीय निर्यात-संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए नियामक ढांचे को आसान बनाया जा सके।
  • निर्यात के लिए आवश्यक अवसंरचना तैयार की जा सके और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार के लिए राजनीतिक सिफारिशों की पहचान करने में सहायता प्रदान की जा सके।
  • यह प्रतिस्पर्धी संघवाद और राज्यों/केंद्रशासित क्षेत्रों के बीच निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है।

संकलन-मनीष प्रियदर्शी


 


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