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Post at: Apr 05 2022

भारत की पहली ‘स्टील स्लैग रोड’

पृष्ठभूमि

  • वर्ष 2018 में नीति आयोग द्वारा स्टील धातुमल (स्लैग) के पुन: चक्रण (Recycling)  पर रणनीतिक पेपर (Strategy Paper)  जारी किया गया था।
  • नीति अायोग के निर्देशन में इस्पात मंत्रालय ने सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए स्टील स्लैग अपशिष्ट परियोजना को मंजूरी दी।
  • राष्ट्रीय स्टील (इस्पात) नीति, 2017 में वर्ष 2030 तक 300 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष स्टील उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है।
  • नीति आयोग के अनुसार, हर वर्ष देश में विभिन्‍न संयंत्रों द्वारा 12 मिलियन टन स्टील अपशिष्ट लैण्डफिल (भराव क्षेत्र) में जाता है।
  • यह वर्ष 2030 तक 50 मिलियन टन तक बढ़ सकता है।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 15 जून, 2022 को केंद्रीय इस्पात मंत्री द्वारा देश के पहले ‘स्टील स्लैग रोड’ (Steel Slag Road) का उद्‍घाटन गुजरात के सूरत में किया गया।
    • सड़क का निर्माण हजीरा औद्योगिक क्षेत्र सूरत, में किया गया है, जो पत्तन को शहर से जोड़ती है।
    • यह 1 किलोमीटर लंबा व छह लेने वाला एक प्रायोगिक (पायलट) परियोजना है।
  • इसमें 100 प्रतिशत प्रसंस्कृत इस्पात अपशिष्ट का उपयोग किया गया है।
  • इसका निर्माण आर्सेलर मित्तल निप्‍पॉन स्टील इण्डिया ने सीएसआईआर इण्डिया (वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद) और केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान एवं सरकारी थिंक टैंक नीति आयोग के साथ मिलकर किया गया है।

स्टील स्लैग 

  • स्टील स्लैग, स्टील निर्माण उद्योग से प्राप्त एक औद्योगिक उपोत्पाद है, जिसे अपशिष्ट पदार्थ के रूप में माना जाता है।
  • लैण्डफिल में धातुमल (स्लैग) का निपटान पर्यावरण के लिए विशेष रूप से खतरनाक है।
  • प्रसंस्कृत धातु स्लैग संयोजन (Bonding) शुद्ध विकास सामग्री के विकल्प के रूप में अच्‍छी क्षमता प्रदर्शित करता है।

सड़क निर्माण में स्लैग उपयोग से लाभ

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • CSIR (वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद) सड़क निर्माण के अन्य संधारणीय तकनीकों पर भी कार्य कर रही है; जैसे-
    • स्लैग एग्रीगेट्‍स रिक्‍लेम्ड डामर (Slag Aggregates Reclaimed Damar) 
    • वेस्ट प्‍लास्टिक क्रम्ब रबर (Waste Plastic Crumb Rubber)
    •  सीमांत और मिश्रित सामग्री (Marginal and Mixed Ingredients) इत्यादि।

निष्कर्ष

  •  स्लैग का उपयोग सड़क निर्माण में करना, सरकार द्वारा चलाए जा रहे वेस्ट टू वैल्थ (Waste to Wealth)  (अपशिष्ट से धन) और स्वच्‍छ भारत मिशन दोनों अभियानों को सशक्त बनाने में मददगार साबित होगी, जो भारत के संधारणीय विकास लक्ष्य-8 के पूरक हैं।

संकलन-पंकज तिवारी
 


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