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ग्रेट बैरियर रीफ (GBR) में ’व्यापक विरंजन’

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (IPCC) द्वारा प्रकाशित हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा गया है‚ कि ग्रेट बैरियर रीफ एक ’’व्यापक विरंजन घटना’’ (Mass Bleaching Event) का सामना कर रही है।
  • वर्ष 2016 से ग्रेट बैरियर रीफ में प्रवाल विरंजन की यह चौथी घटना है।
  • ग्रेट बैरियर रीफ दुनिया की सबसे बड़ी प्रवाल भित्ति है।
  • इससे पहले हीटवेव (लू) के कारण ग्रेट बैरियर रीफ को वर्ष 2016, 2017 और 2020 में तीन व्यापक विरंजन घटनाओं का सामना करना पड़ा था। 

ग्रेट बैरियर रीफ के बारे में

  • ग्रेट बैरियर रीफ‚ क्वींसलैण्ड‚ ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्वी तट के समांतर लगभग 2,300 किमी. से अधिक की लंबाई में फैली हुई है।
  • विश्व की यह सबसे बड़ी मूंगे की दीवार है और मोटे तौर पर 348,000 वर्ग किमी. में विस्तृत है।
  • ग्रेट बैरियर रीफ की संरचना कोरल  पॉलिप्स (Coral Polyps) नामक अरबों अत्यंत छोटे जीवों से बनी हुई है।
  • इसके अद्‌भुत सार्वभौमिक मूल्य के कारण इसे वर्ष 1981 में यूनेस्को द्वारा एक ’’विश्व धरोहर स्थल’’ (वर्ल्ड हेरिटेज एरिया) घोषित किया गया था।

प्रवाल भित्ति या प्रवाल/मूंगा/कोरल के बारे में

  • प्रवाल भित्तियां अत्यंत छोटे व नरम शरीर वाले अकशेरुकी (Invertebrate) जीवों की बड़ी कॉलोनी होती है।
  • इन जीवों को कोरल पॉलिप्स कहते हैं।
  • ये जीव जूजैंथिली (Zooxanthellae) नामक छोटे शैवाल जैसे सजीवों के साथ सहजीवी संबंध बनाकर रहते हैं।
  • कोरल पॉलीप्स‚ पोषक तत्वों के बदले में जूजैंथिली को संरक्षण प्रदान करते हैं। साथ ही जूजैंथिली भी प्रवालों को अलग-अलग रंग प्रदान करते हैं।
  • प्रवाल भित्तियों का निर्माण सागरीय जीव मूंगा या कोरल पॉलिप के अस्थि-पंजरों द्वारा होता है।
  • जो कि चूना-पत्थर एवं डोलोमाइट से बने होते हैं।
  • प्रवाल भित्तियां छिछले समुद्री पारितंत्र की महत्वपूर्ण विशेषता हैं‚ जो समुद्री पारितंत्र की बेजोड़ आधारशिला होती हैं।
  • प्रवाल की जैव विविधता और पारिस्थितिकीय उत्पादकता अधिक होने के कारण ही‚ इन्हें ’समुद्र का वर्षावन’ कहते हैं।
  • प्रवाल भित्तियां तटरेखाओं के लिए प्राकृतिक अवरोधक (नेचुरल बैरियर्स) के रूप में कार्य करते हैं।
  • ये तटों को तूफान‚ हरिकेन और चक्रवात से होने वाले नुकसान एवं बाढ़ से बचाते हैं।

प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching) क्या है?

  • प्रवाल पर निर्भर रहने वाले रंगीन जूजैंथले शैवाल जब पर्यावरणीय घटकों (जैसे-तापमान‚ सूर्य के प्रकाश‚ पोषक तत्वों में बदलाव इत्यादि) के नकारात्मक प्रभाव के कारण उनके ऊपर से हट जाते हैं‚ तो प्रवाल अपने वास्तविक रंग (अर्थात सफेद) में आ जाते हैं। 
  • इसे ही प्रवाल विरंजन कहते हैं।

प्रवाल विरंजन के कारणों में निम्नलिखित शामिल हैं—

  • ग्लोबल वार्मिंग
  • कोरल खनन
  • मछली पकड़ने की अवैज्ञानिक पद्धति
  • अवसादों की वृद्धि
  • एलनीनो
  • भारी वर्षा एवं बाढ़
  • विवर्तनिकी उत्थान‚ इत्यादि।
  • समुद्री पारितंत्र में प्रवाल एक की-स्टोन प्रजाति माना जाता है।
  • वर्तमान प्रवाल विरंजन की घटना की खास बात यह है‚ कि यह ऐसे समय घटित हो रही है‚ जब ऑस्ट्रेलिया में ला-नीना का प्रभाव देखा जा रहा है।
  • ज्ञातव्य है‚ कि ला-नीना समुद्री जल को ठण्डा करने वाली एक भौगोलिक परिघटना है।

संकलन — शिशिर अशोक सिंह

 

 


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