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चक्रवात आसनी (Cyclone Asani)

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • चक्रवात आसनी, 2022 का पहला उष्ण कटिबंधीय चक्रवात है, जो बंगाल की खाड़ी के ऊपर 21 मार्च, 2022 को स्वरूप में आया।
  • भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा तूफान के प्रभाव क्षेत्र में अण्डमान सागर के साथ-साथ उत्तर की ओर म्यांमार और दक्षिण बांग्‍लादेश तट को शामिल किया गया है।
  • इस चक्रवात में हवाओं की गति प्रभावित क्षेत्रों में 70-80 किमी. से 90 किमी. प्रति घंटे की रफ्‍तार से चलने की संभावना है। 
  • आईएमडी (IMD) के अनुसार, चक्रवात आसनी का लैण्डफाल क्षेत्र म्यांमार का बंदरगाह शहर थण्डवे और दक्षिण बांग्‍लादेश तट होने की संभावना है।
  • आईएमडी के अनुसार, मार्च माह में 1891 और 2020 के बीच केवल आठ चक्रवात बने हैं। दो अरब सागर में और छह बंगाल की खाड़ी में।
  • मार्च, आमतौर पर चक्रवातों का महीना नहीं होता है। वे आम, तौर पर अप्रैल और मई में बनते हैं।
  • इस तूफान का ‘आसनी’ नामकरण श्रीलंका द्वारा किया गया है। ‘आसनी’ का अर्थ ‘सिंहल में क्रोध’ (Wrath in Sinhala) है।

तूफान का नामकरण

  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO), संयुक्त राष्ट्र की एशिया एवं प्रशांत आर्थिक और सामाजिक निकाय (UNESCAP) आदि चक्रवात के नाम का निर्धारण करते हैं।
  • उपर्युक्त के अलावा क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र (RSMC) एवं उष्णकटिबंधीय चक्रवात चेतावनी केंद्र भी नाम का निर्धारण करते हैं।
  • IMD-विश्व के छ: (6) RSMC में से एक है, जो उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नाम का निर्धारण करते है।
  • वर्ष 2000 में मस्कट में सत्ताईसवें (27) सत्र में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों पर WMO/ESCAP पैनल ने सैद्धांतिक रूप से बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नाम पर सहमति व्यक्त की।
  • उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का नामकरण सितंबर, 2004 में सदस्य देशों के बीच व्यापक परामर्श के बाद शुरू हुआ।
  • WMO और UNESCAP में भारत, म्यांमार, बांग्‍लादेश, श्रीलंका, थाईलैण्ड, पाकिस्तान और ओमान शामिल थे। वर्ष 2018 में इसमें ईरान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यमन भी शामिल हो गए।
  • पिछले वर्ष IMD  द्वारा 169 नए चक्रवातों की सूची जारी की गई थी, जिसका नाम बारी-बारी से उपर्युक्त 13 देशों द्वारा दिया गया था।

चक्रवात का वर्गीकरण

  • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) चक्रवातों का वर्गीकरण उनकी लैण्डफाल के समय की अधिकतम गति के आधार पर करता है। जिसकी मुख्यत: चार श्रेणियां हैं-

 चक्रवात-

  • मौसम विज्ञान के अनुसार, चक्रवात एक ऐसी वायुमण्डलीय घटना है, जिसमें एक निम्न वायुदाब के चारों ओर कई समतापीय रेखाओं का निर्माण होता है, जिसमें निम्न वायुदाब क्षेत्र के चारों ओर की हवाएं तेजी से ऊपर उठती हैं।
  • यदि यह घटना समुद्र या महासागर में हो, तो तेज हवाओं के साथ काफी वर्षा होती है।

चक्रवात के प्रकार

(i) बहिरूष्ण कटिबंधीय चक्रवात (शीतोष्ण चक्रवात)
(ii) उष्णकटिबंधीय चक्रवात

(i) बहिरूष्ण कटिबंधीय चक्रवात की विशेषताएं

  • मध्य एवं उच्‍च अक्षांशों में विकसित
  • ये ध्रुवीय वाताग्र के साथ निर्मित होते हैं।
  • इसके निर्माण में एक उष्ण तथा एक शीत वाताग्र होता है।
  • इसमें कपासी मेघ का निर्माण होता है।

(ii) उष्णकटिबंधीय चक्रवात की विशेषता 

  • ये आक्रामक तूफान है, जिसकी उत्पत्ति  उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के महासागरों में होती है। 
  • ये महासागर से तट की ओर गतिमान होते हैं।
  • ये चक्रवात आक्रामक पवनों के कारण विनाशकारी होते है।
  • हिंद महासागर में इन्‍हें चक्रवात, अंटलांटिक महासागर में हरिकेन, दक्षिण चीन महासागर में टाइफून तथा पश्चिमी आॅस्ट्रेलिया में विली-विलीज के नाम से जाना जाता है। 
  • उत्तरी गोलार्द्ध में इनकी गति घड़ी की सूई की दिशा के विपरीत; अर्थात वामावर्त तथा दक्षिणी गोलार्द्ध मे दक्षिणावर्त होती है।

​​​​​​​इनकी उत्पत्ति के लिए अनुकूल दशाएं

  • बृहत समुद्री सतह जहां  तापामन 27 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो।
  • कोरिआलिस बल का होना।
  • उर्ध्वाधर पवनों की गति में अंतर कम होना।
  • कमजोर निम्न दाब क्षेत्र या निम्न स्तर का चक्रवातीय परिसंचरण 
  • समुद्री तल तंत्र पर ऊपरी अपसरण

उष्ण कटिबंधीय चक्रवात एवं शीतोष्ण चक्रवात में अंतर

अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी में चक्रवात की तुलना 

(i) पिछले 150-200 वर्षो में अरब सागर की तुलनाम ें बंगाल की खाड़ी में चार गुणा ज्यादा  चक्रवात का निर्माण हुआ है।
(ii) बंगाल की खाड़ी में अधिक तूफान आने का कारण उसका अरब सागर की तुलना में ज्यादा भू-बद्ध (Land locked)  होना है। 
(iii)    बंगाल की खाड़ी को प्रशांत महासागर से भी कई टाइफून मिलते हैं, जो बंगाल की खाड़ी में आने से पूर्व कम दबाव वाले होते है; परंतु यहां बेहतर दशा पाकर चक्रवात में बदल जाते हैं।
(iv)    भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के अनुसार, अरब सागर का बढ़ता तापमान चक्रवातों की बारंबारता में वृद्धि करेगा ; जैसे वर्ष 2019 में अरब सागर में 5 तथा बंगाल की खाड़ी में 3 चक्रवात आए।

चक्रवात तौक्ते

  • मई माह (2021) को भारत के पश्चिमी गुजरात तट पर गुजरात अरब सागर से उत्पन्‍न चक्रवाती तूफान तौक्ते टकराया।
  • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने इस चक्रवात को अत्यंत गंभीर चक्रवात (Extremely Severe Cyclone) की श्रेणी में शामिल किया है।
  • जब यह मुख्य भूमि से टकराया, तब इसकी सर्वाधिक गति 160-180 किमी./घंटा थी।
  • इस चक्रवात का नाम ‘तौक्ते’ नामकरण ‘म्यांमार’ द्वारा दिया गया है, जिसका अर्थ ‘शोर करने वाली छिपकली गेको (GECKO)’  है।

​​​​​​​भारतीय मौसम विभाग

  • इसकी स्थापना 1875 ई. में की गई थी।
  • IMD का मुख्यालय विभाग, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन कार्य करता है।
  • यह मौसम  पूर्वानुमान, चक्रवात चेतावनी, भूकंप विज्ञान, मौसम संबंधी अवलोकन के लिए जिम्मेदार प्रमुख एजेंसी है।

संकलन-पंकज तिवारी
 


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