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Post at: Mar 31 2022

केंद्रीय बजट‚ 2022-23 भाग-1

  • 21वीं सदी के नए दशक का दूसरा आम बजट भारतीय अर्थव्यवस्था के अमृत यात्रा का दूसरा पड़ाव है। यह बजट विश्वास से भरे कोविड काल के पहले बजट की ही निरंतरता है‚ जिसका लक्ष्य समग्र दृष्टिकोण के साथ-साथ विगत सात वर्षों में तैयार की गई आधारशिला से एक ऐसी नींव तैयार करना है‚ जहां नीतिगत सुधारों से आधारभूत संरचना (Infrastructure) को गति‚ रोजगार सृजन और विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन मिले। साथ ही‚ विज्ञान-तकनीक के बेहतर प्रयोग से कृषि‚ कारोबारी सुगमता (Ease of doing Business) और जीवन की सुगमता (Ease of living) को भी नए आयाम मिले‚ ताकि चरणबद्ध तरीके से अगले 25 वर्षों तक विकास यात्रा में प्रवाह बना रहे और आजादी के स्वर्णिम वर्ष (2047) में ‘सबका प्रयास’ की भावना से आत्मनिर्भर भारत की नींव पर आधुनिक नए भारत का निर्माण हो सके। कोविड के साए में लगातार दूसरे वर्ष लीक से हटकर आम बजट पेश किया गया‚ जो भारत की आजादी की शताब्दी वर्ष (वर्ष 2047) तक का विजन दस्तावेज बनकर उभरा है। जिसकी सोच में सरकार नहीं, बल्कि देश का हर आम नागरिक भागीदार है।
  • 1 फरवरी‚ 2022 को संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट अनुमान वर्ष 2022-23 का आकार 39.45 लाख करोड़ रुपये है‚ जिसका अर्थ है‚ कि सरकार द्वारा कुल 39.45 लाख करोड़ रुपये की प्राप्ति एवं इतनी ही राशि का व्यय किया जाएगा। 
    • कुल प्राप्तियों को यदि राजस्व और पूंजीगत प्राप्तियों में बांटा जाए‚ तो कुल प्राप्तियों में 55.88 प्रतिशत हिस्सा राजस्व प्राप्तियों का है‚ जबकि शेष 44.12 प्रतिशत हिस्सा पूंजीगत प्राप्तियों का है।
    • इसी तरह कुल व्यय में से 80.98 प्रतिशत राजस्व खाते पर‚ जबकि मात्र 19.02 प्रतिशत पूंजी खाते पर व्यय करने का अनुमान है।
    • उपर्युक्त आंकड़ों को देखकर एक बात तो स्पष्ट है‚ कि भारत सरकार की न लौटाने योग्य प्राप्ति‚ जिसे आय भी माना जा सकता है‚ कुल बजट का 55.88 प्रतिशत है‚ जबकि अनुत्पादक व्यय 80.98 प्रतिशत है। ऐसे में भारत में घाटे की स्थिति तो स्वाभाविक ही है‚ तो एक नजर सरकार के बजटीय घाटों पर भी डालते हैं- 

1. राजकोषीय घाटा (Fiscal deficit)

  • किसी वर्ष विशेष में सरकार द्वारा लिए गए समस्त आंतरिक एवं बाह्य ऋणों का योग ही ‘राजकोषीय घाटा’ कहलाता है; अर्थात राजकोषीय घाटा उस राशि को प्रदर्शित करता है‚ जिसे सरकार अपने व्ययों को पूरा करने हेतु ऋण रूप में लेती है। वर्ष 2022-23 के बजट में 16.61 लाख करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा अनुमानित है‚ जो इसी वर्ष की अनुमानित जीडीपी का 6.4 प्रतिशत है।
  • वर्ष 2022-23 हेतु अनुमानित‚ भारत का राजकोषीय घाटा विगत वर्ष के संशोधित अनुमान (15.91 लाख करोड़ रुपये) की तुलना में लगभग 70.11 हजार करोड़ रुपये अधिक है।

2. राजस्व घाटा (Revenue Deficit)
राजस्व प्राप्तियों की तुलना में राजस्व व्यय के अधिक हो जाने से यह घाटा उत्पन्‍न होता है; क्योंकि इस घाटे से न तो किसी संपत्ति का सृजन होता है और न ही किसी तरह के दायित्व में कमी आती है। वर्ष 2022-23 हेतु प्रस्तुत बजट में 9.90 लाख करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुमानित है‚ जो वर्ष 2022-23 हेतु अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 3.8 प्रतिशत है। 
3. प्रभावी राजस्व घाटा
राजस्व घाटे की बेहतर तस्वीर प्रस्तुत करने हेतु वर्ष 2011-12 के बजट से प्रभावी राजस्व घाटे की गणना की जाने लगी है। वर्ष 2022-23 के बजट अनुमान में प्रभावी राजस्व घाटा जीडीपी का 2.6 प्रतिशत अनुमानित है‚ जो पूर्व वर्ष (2021-22) के संशोधित अनुमान से लगभग 1.78 लाख करोड़ रुपये कम है।
4. प्राथमिक घाटा (Primary Deficit)
    भारत में प्राथमिक घाटे की अवधारणा वर्ष 1997-98 के बजट से प्रारंभ की गई है। प्राथमिक घाटा प्राप्त करने हेतु राजकोषीय घाटे में से उस वर्ष के ब्याज भुगतान की राशि को घटा दिया जाता है। यदि देखा जाए‚ तो प्राथमिक घाटा वर्ष 2022-23 में जीडीपी का मात्र 2.8 प्रतिशत अनुमानित किया गया है। यह पिछले वर्ष (2021-22) के संशोधित प्राथमिक घाटे की तुलना में लगभग 56.75 हजार करोड़ रुपये कम है।

  • बजट वर्ष 2022-23 में भी आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह पूर्व की भांति ही लागू रहेगा। 

सब्सिडी (Subsidy)

ब्याज भुगतान (Interest Payment)

  • बजट‚ 2022-23 में ब्याज भुगतान हेतु लगभग 9.41 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है‚ जो वर्ष 2021-22 के बजट अनुमान (8.1 लाख करोड़ रुपये) से लगभग 16.17 प्रतिशत‚ जबकि उसी वर्ष के संशोधित अनुमान (8.12 लाख करोड़ रुपये) से लगभग 15.59 प्रतिशत अधिक है। विगत वर्षों में ब्याज भुगतान राशि में निरंतर वृद्धि की प्रवृत्ति रही है। 

संकलन-शिवशंकर तिवारी

 

 

 

 

 

 

 


 

 

 


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