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Post at: Jan 15 2022

यूएनएससी के पांच स्थाई सदस्यों का संकल्प

परिचय

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, संयुक्त राष्ट्र का एक प्रमुख अंग है, जिसका प्राथमिक कार्य अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखना है । सुरक्षा परिषद की स्थापना संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के साथ ही वर्ष 1945 में की गई थी।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य हैं, जिसमें 10 अस्थाई तथा 5 स्थाई (चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन एवं अमेरिका) सदस्य हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी सदस्यों को समान मत (1मत) का अधिकार प्राप्त है तथा परिषद के किसी भी निर्णय के लिए 9 सदस्यों (स्थाई एवं अस्थाई) की सहमति होना अनिवार्य है।
  • यद्यपि पांच स्थाई सदस्यों में से कोई भी सदस्य विपक्ष (वीटो) में वोट देता है, तो प्रस्ताव पारित नहीं होता है।

वर्तमान परिदृश्य

  • 3 जनवरी, 2022 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 5 स्थाई सदस्यों (चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका) ने परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने एवं परमाणु संघर्ष रोकने का संकल्प लिया।
  • यह संकल्प परमाणु अस्‍त्र अप्रसार संधि (NPT) की नवीनतम समीक्षा के बाद लिया गया है।
    • ध्यातव्य है, कि परमाणु अस्‍त्र अप्रसार संधि की समीक्षा 4 जनवरी, 2021 को की जानी थी, जिसे कोविड-19 के कारण इस वर्ष (2022) तक के लिए स्थगित कर दिया गया था।

महत्व

  • रूस द्वारा यूक्रेन की सीमा पर सेना तैनात किए जाने के बाद से ही रूस एवं संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) के मध्य तनाव बढ़ गया है।
  • ताइवान को लेकर चीन एवं यूएसए के बीच नए संघर्ष के संकेत मिल रहे हैं।
  • उल्‍लेखनीय है, कि चीन ताइवान को अपने राज्य क्षेत्र का हिस्सा मानता है, जबकि यूएसए ताइवान की संप्रभुता का समर्थक है।
  • यह संकल्प उपर्युक्त संघर्षों में परमाणु अस्‍त्रों के हस्तक्षेप को कम करने में सहायक सिद्ध हो सकता है।

संकल्‍प

  • परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना
  • परमाणु हथियार संपन्‍न देशों के मध्य किसी भी प्रकार के युद्ध को टालना एवं सामरिक जोखिमों को टालना
  • परमाणु हथियारों का प्रयोग रक्षात्मक उद्देश्यों के लिए करना
  • परमाणु हथियारों के अनधिकृत प्रयोग को रोकने के लिए देशों द्वारा मजबूत उपायों को अपनाना।

परमाणु अस्‍त्र अप्रसार संधि

  • नाभिकीय अप्रसार एवं शस्‍त्र परिसीमन के लिए अनेक अंतरराष्ट्रीय संधियां संपन्‍न हुईं, जिसमें वर्ष 1968 ( समझौतांे पर हस्ताक्षर किए गए) की परमाणु अस्‍त्र अप्रसार संधि (NPT), जो कि मार्च, 1970 में अस्तित्व में आई सर्वाधिक महत्वपूर्ण थी।
  • यह संधि प्रारंभ में 25 वर्षों के लिए थी, जिसे वर्ष 1995 में अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया गया।
  • वर्तमान में इसके 191 सदस्य देश हैं।
  • भारत इसका सदस्य नहीं है। भारत के अतिरिक्त पाकिस्तान, उत्तर कोरिया, इस्राइल एवं दक्षिणी सूडान भी इस संधि के सदस्य नहीं हैं।

संधि के बारे में

  • परमाणु अस्‍त्र अप्रसार संधि (Treaty on th Non-Proliferation Nuclear Weapons :NPT) एक बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य परमाणु हथियारों को सीमित करना है।
  • यह संधि तीन सिद्धांतों पर आधारित है-
    •  परमाणु हथियार एवं हथियार प्रौद्योगिकी के प्रसार को रोकना,
    •  निरस्‍त्रीकरण ,
    •  परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना।
  • इन सिद्धांतों  से आशय है कि-
    •  जिन देशों के पास परमाणु हथियार नहीं हैं, वे इन्हें हासिल नहीं करेंगे।
    • परमाणु हथियार संपन्‍न राष्ट्र, निरस्‍त्रीकरण के मार्ग का पालन करेंगे।
  • सभी राष्ट्र को सुरक्षा उपायों सहित शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु प्रौद्योगिकी उपयोग करने का अधिकार होगा

प्रावधान

  • 1 जनवरी, 1967 से पूर्व परमाणु हथियारों से संपन्‍न राष्ट्र को परमाणु हथियार संपन्‍न राष्ट्र के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • शेष सभी राष्ट्रों को गैर-परमाणु हथियार संपन्‍न राष्ट्र के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • इस प्रकार परमाणु हथियार संपन्‍न केवल 5 राष्ट्र चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम एवं संयुक्त राज्य अमेरिका हैं।
  • संधि सदस्य राष्ट्रों के शांतिपूर्ण उद्देश्यों हेतु परमाणु ऊर्जा के उत्पादन, विकास एवं उपयोग संबंधी अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगी।

भारत का पक्ष

  • भारत ने इस संधि पर अभी तक हस्ताक्षर नहीं किया है।
  • भारत इस संधि को भेदभावपूर्ण मानता है।
  • भारत परमाणु अप्रसार के उद्देश्य से लागू की जाने वाली 

अंतरराष्ट्रीय संधियों का विरोध करता है ; 
क्‍योंकि ये भेदभावपूर्ण तरीके से गैर-परमाणु संपन्‍न राष्ट्रों पर थोपी जाती हैं तथा पांच परमाणु हथियार संपन्‍न राष्ट्रों के एकाधिकार को वैध बनाती हैं।

संकलन-अशोक कुमार तिवारी
 


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