Contact Us - 0532-246-5524,25 | 9335140296
Email - ssgcpl@gmail.com
|
|

Post at: Jan 15 2022

चुनाव-व्यय सीमा में वृद्धि

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 6 जनवरी, 2022 को निर्वाचन आयोग ने संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवारों के लिए मौजूदा चुनाव-व्यय की सीमा में बढ़ोत्तरी की घोषणा की।
  • यह व्यय सीमा आगामी सभी चुनावों में लागू होंगी।
  • कोविड-19 महामारी के कारण वर्ष 2020 में 10 प्रतिशत वृद्धि को छोड़कर उम्मीदवारों के लिए व्यय सीमा में अंतिम बड़ा परिवर्तन वर्ष 2014 में किया गया था।

पृष्ठभूमि 

  • निर्वाचन आयोग ने चुनाव-व्यय सीमा का अध्ययन करने के लिए अक्टूबर, 2020 में एक दो सदस्यीय समिति का गठन किया था।
  • समिति में पूर्व राजस्व सेवा अधिकारी और महानिदेशक (अन्वेषण) हरीश कुमार और महासचिव तथा महानिदेशक (व्यय) उमेश सिन्हा शामिल थे।
  • समिति ने अपने अध्ययन में पाया कि वर्ष 2014 के बाद से मतदाताओं की संख्या, चुनावी लागत एवं मुद्रास्फीति सूचकांक में काफी वृद्धि हुई है।

नए दिशा-निर्देश
बड़े राज्य

  • बड़े राज्यों में संसदीय चुनाव-व्यय सीमा को 70 लाख रुपये से बढ़ाकर 95 लाख रुपये कर दिया गया है।
  • जबकि विधानसभा क्षेत्रों के व्यय सीमा को 28 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये कर दिया गया है।

छोटे राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश 

  • छोटे राज्यों एवं केंद्रशासित (दिल्‍ली एवं जम्मू-कश्मीर को छोड़कर) में संसदीय चुनाव-व्यय सीमा को 54 लाख रुपये से बढ़ाकर 75 लाख रुपये कर दिया गया है।
  • जबकि छोटे राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी में विधानसभा क्षेत्रों के लिए व्यय सीमा को 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 28 लाख रुपये कर दिया गया है।

नोट :- अरुणाचल प्रदेश, गोवा, सिक्‍किम एवं केंद्रशासित प्रदेश (अण्डमान और निकोबार, चण्डीगढ़, दादरा और नागर हवेली तथा दमन और दीव, लक्षद्वीप, पुदुचेरी एवं लद्दाख) छोटे राज्यों की श्रेणी में शामिल हैं।
 शेष राज्यों को बड़े राज्यों की श्रेणी में शामिल किया गया है।
 दिल्‍ली एवं जम्मू-कश्मीर को भी बड़े राज्यों की श्रेणी में रखा गया है।
चुनाव-व्यय सीमा

  • वह अधिकतम राशि जिसे उम्मीदवार (संसदीय या विधानसभा चुनाव का) अपने चुनाव अभियान के दौरान कानूनी रूप से खर्च कर सकता है, उसे चुनाव-व्यय की सीमा के रूप में परिभाषित किया जाता है।
  • इस खर्च में सार्वजनिक सभाओं, रैलियों, विज्ञापनों, पोस्टर, बैनर एवं वाहनों आदि पर खर्च शामिल हैं।
  • लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (RPA), 1951 की धारा 77 के तहत, प्रत्येक उम्मीदवार को नामित होने की तिथि से परिणाम की घोषणा की तिथि के बीच किए गए सभी खर्चों का एक अलग एवं पारदर्शी लेखा रखना होता है। 
  • चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के 30 दिन के भीतर सभी उम्मीदवारों (संसद एवं विधानसभा) को अपने व्यय का विवरण निर्वाचन आयोग के पास प्रस्तुत करना होता है।
  • नकली खाता या अधिकतम सीमा से अधिक खर्च करने पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 10 A  के तहत निर्वाचन आयोग द्वारा उम्मीदवार को 3 वर्ष के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

निर्वाचन आयोग 

  • भारतीय संविधान के भाग 15 में अनुच्‍छेद 324 से 329 तक निर्वाचन आयोग तथा निर्वाचन संबंधी प्रावधान किए गए हैं।
  • निर्वाचन आयोग में एक निर्वाचन आयुक्त तथा समय-समय पर राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित संख्या में निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किए जाएंगे।
  • वर्तमान में भारतीय निर्वाचन आयोग तीन सदस्यीय संस्था है, जिसमें एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा दो निर्वाचन आयुक्त शामिल होते हैं।
  • मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य आयुक्तों का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष (जो भी पहले हो) निर्धारित किया गया है।

चुनाव सुधार से संबंधित समितियां

 संकलन-अशोक तिवारी


 


Comments
List view
Grid view

Current News List