Contact Us - 0532-246-5524,25 | 9335140296
Email - ssgcpl@gmail.com
|
|

Post at: Jan 13 2022

आईएनएस विशाखापत्तनम भारतीय नौसेना में शामिल

क्या है परियोजना-15 ए?
    परियोजना-15 के तहत‚ निर्मित दिल्‍ली श्रेणी के पोतों (INS दिल्‍ली‚ INS मैसूर तथा INS मुंबई) के अग्रवर्ती एवं परिष्कृत संस्करण के विकास हेतु परियोजना-15ए प्रारंभ की गई थी। सरकार का उद्देश्य भारतीय नौसेना को ऐसे पोतों से लैस करना है‚ जिनमें दिल्‍ली श्रेणी के पोतों की तुलना में उच्‍चस्तरीय वायु-रक्षण‚ पनडुब्बी-रोधी और पोत-रोधी क्षमताएं हों। परियोजना-15ए के तहत‚ तीन पोतों यथा- INS कोलकाता‚ INS कोच्‍चि एवं INS चेन्‍नई का निर्माण किया गया है। चूंकि INS कोलकाता इस श्रेणी का पहला एवं मुख्य पोत है; इसलिए परियोजना-15ए के तहत‚ निर्मित पोतों को कोलकाता श्रेणी के विध्वंसक पोतों के नाम से भी जाना जाता है।
परियोजना-15बी

  • सुरक्षा मामलों पर मंत्रिमण्डलीय समिति ने कोलकाता श्रेणी के पोतों के उन्‍नत संस्करण के विकास को भी मंजूरी प्रदान की है।
  • इन पोतों का निर्माण ‘परियोजना-15बी’ (Project-15B) के तहत किया जा रहा है।
  • परियोजना-15बी के तहत‚ निर्मित प्रथम निर्देशित मिसाइल विध्वंसक पोत INS विशाखापत्तनम का जलावतरण 20 अप्रैल‚ 2015 को संपन्‍न हुआ था।
  • जबकि इस श्रेणी के दूसरे पोत INS मोरमुगाओ का जलावतरण 17 सितंबर‚ 2016 को किया गया है।
  • परियोजना-15बी के तहत‚ वर्तमान में मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड पर चार निर्देशित मिसाइल विध्वंसक पोतों का निर्माण किया जा रहा है।
  • परियोजना-15 बी के तहत‚ निर्मित पोतों को विशाखापत्तनम श्रेणी के विध्वंसक युद्धपोतों के नाम से भी जाना जाता है।
  • इस श्रेणी के दो अन्य युद्धपोत INS इंफाल तथा INS सूरत हैं।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य 

  • 21 नवंबर‚ 2021 को मुंबई स्थित नौसैनिक पोतगाह में आयोजित एक समारोह में INS विशाखापत्तनम को भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया गया।
  • पूर्वी तट पर स्थित आंध्र प्रदेश के ऐतिहासिक शहर विशाखापत्तनम - ‘द सिटी ऑफ डेस्टिनी’ के नाम पर ही इस युद्धपोत का नामकरण किया गया है।

विशेषताएं

  • इस युद्धपोत को भारतीय नौसेना के इन-हाउस संगठन ‘नौसेना डिजाइन निदेशालय’ (Directorate of Naval Design) द्वारा डिजाइन किया गया है।
  • इस पोत के निर्माण में स्वदेशी इस्पात DMR 249A का प्रयोग किया गया है।
  • यह पोत लगभग 75 प्रतिशत स्वदेशी उपकरणों द्वारा निर्मित है।
  • INS विशाखापत्तनम जिन प्रमुख स्वदेशी प्रणालियों/उपकरणों से लैस है‚ उनमें शामिल हैं :- ‘युद्ध प्रबंधन प्रणाली’ (Combat Management System)‚ रॉकेट लांचर‚ टॉरपीडो ट्‌यूब लांचर‚ एकीकृत प्‍लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली‚ स्वचालित विद्युत प्रबंधन प्रणाली इत्यादि।
  • 163 मीटर की कुल लंबाई‚ 17 मीटर चौड़ाई तथा 7400 टन से अधिक वजन के साथ‚ यह भारत में निर्मित सबसे बड़े विध्वंसक युद्धपोतों में से एक है।
  • यह पोत ‘संयुक्त गैस एवं गैस’ (COGAG : Combined Gas & Gas) विन्यास में चार शक्तिशाली गैस टर्बाइन इंजन द्वारा संचालित किया जाता है।
  • यह पोत 30 नॉट से अधिक गति प्राप्त करने में सक्षम है।

हथियार प्रणाली

  • यह पोत सतह-से-सतह पर मार करने वाली मिसाइलों और सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलों सहित अत्याधुनिक हथियारों एवं सेंसरों से लैस है।
  • स्वदेशी रूप से विकसित रॉकेट लांचर‚ टॉरपीडो लांचर आदि इस युद्धपोत को पनडुब्बी-रोधी (anti-Submarine) युद्धक क्षमताएं प्रदान करते हैं।
  • यह पोत परमाणु‚ जैविक तथा रासायनिक युद्ध परिस्थितियों से निपटने हेतु युद्ध क्षमताओं से लैस है।
  • INS विशाखापत्तनम पर तैनात कुछ प्रमुख स्वदेशी हथियारों में शामिल हैं :-

(i)    मध्यम दूरी की सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलें (BEL‚बंगलुरू) 
(ii)    ब्रह्मोस सतह-से-सतह पर मार करने वाली मिसालें (ब्रह्मोस एरोस्पेस‚ नई दिल्‍ली)
(iii)    स्वदेशी टॉरपीडो ट्‌यूब लांचर (लार्सन एण्ड टूब्रो‚ मुंबई)
(iv)    पनडुब्बी-रोधी स्वदेशी रॉकेट लांचर (लार्सन एण्ड टूब्रो‚ मुंबई)
(v)    76 mm सुपर रैपिड गन माउंट (BHEL‚ हरिद्वार)
निष्कर्ष

  • हिंद महासागर क्षेत्र में बदलते शक्ति समीकरणों के मध्य INS विशाखापत्तनम भारतीय नौसेना की गतिशीलता‚ पहुंच तथा लचीलेपन में वृद्धि करेगा।
  • यह युद्धपोत समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगा तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा।
  • यह युद्धपोत भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति का एक प्रतीक है और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इण्डिया‚ मेक फॉर द वर्ल्ड’ दृष्टिकोण को प्राप्त करने में एक मील का पत्थर साबित होगा।

संकलन-सौरभ मेहरोत्रा


Comments
List view
Grid view

Current News List