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बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक, 2021

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 21 दिसंबर, 2021 को बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक, 2021 [The Prohibition of Child Marriage (Amendment) Bill, 2021)] प्रस्तुत किया गया।
  • इस विधेयक का उद्देश्य महिलाओं की विवाह की आयु को 18 से 21 वर्ष तक बढ़ाने के लिए बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 में संशोधन करना है।
  • विदित हो कि यह विधेयक लोक सभा में प्रस्तुत करने के पश्चात संवीक्षा (Scrutiny) हेतु संसद की स्थाई समिति के पास भेज दिया गया।

कारण

  • ध्यातव्य है, कि यह विधेयक जून, 2020 में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा गठित टास्क फोर्स की सिफारिश के आधार पर लाया गया है। 
  • टास्क फोर्स का गठन लड़कियों की विवाह की उम्र तथा उनके पोषण से संबंधित मुद्दों के आकलन हेतु किया गया था।
  • इस समिति की अध्यक्षता समता पार्टी की पूर्व अध्यक्ष जया जेटली ने की थी।
  • उक्त कारण के अतिरिक्त विवाह संबंधी लैंगिक भेद-भाव को समाप्त करना, शिक्षा का अधिक अवसर प्रदान करना, बेहतर शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना इस विधेयक को लाए जाने के कारणों में शामिल है।

भारत में विवाह हेतु वैधानिक ढांचा :  पृष्ठभूमि

  • भारत में विवाह की आयु का निर्धारण सर्वप्रथम शारदा अधिनियम, 1929 द्वारा किया गया था। कालांतर में इस अधिनियम का नाम परिवर्तित कर बाल विवाह प्रतिबंध अधिनियम, 1929 कर दिया गया।
  • इस अधिनियम में लड़कियों एवं लड़कों हेतु विवाह की न्यूनतम आयु को क्रमश: 14 एवं 18 वर्ष निर्धारित किया गया।
  • वर्ष 1978 में इस अधिनियम में संशोधन किया गया एवं विवाह की न्यूनतम आयु लड़कियों एवं लड़कों हेतु क्रमश : 18 वर्ष एवं 21 वर्ष कर दिया गया। 
  • वर्ष 2006 में बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 नामक कानून बनाया गया।

भारत में विभिन्‍न धर्मों में विवाह की न्यूनतम आयु 

  • हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 विवाह हेतु लड़कियों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष एवं लड़कों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित करता है।
  • मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्‍लीकेशन अधिनियम, 1937 युवावस्था प्राप्त कर चुके लड़के एवं लड़कियों के विवाह को वैध मानता है।
  • भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम, 1872 विवाह हेतु न्यूनतम आयु को 21 वर्ष (दूल्हे के लिए) एवं 18 वर्ष (दुल्हन के लिए) निर्धारित करता है।

विधेयक से संबंधित प्रमुख प्रावधान

  • बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक, 2021 लड़कियों हेतु विवाह की न्यूनतम उम्र को 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष करने का प्रयास करता है।
  • यह विधेयक निम्नलिखित कानूनों में संशोधन का प्रयास करता है-
  1. भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम, 1872
  2. पारसी विवाह एवं तलाक अधिनियम, 1936
  3. मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्‍लीकेशन अधिनियम, 1937
  4. विशेष विवाह अधिनियम, 1954
  5. हिंदू विवाह अधिनियम, 1955
  6. विदेशी विवाह अधिनियम, 1956

महिलाओं के लिए विवाह हेतु न्यूनतम आयु बढ़ाने के लाभ

  • इस विधेयक के अधिनियम बन जाने से महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आर्थिक निर्भरता को लेकर अधिक सशक्‍त हो सकेगी।
  • वैश्विक स्तर पर भारत में बहुतायत बाल विवाह होते हैं, इस कानून के जरिए बाल विवाह पर अंकुश संभव हो सकेगा।

संकलन- आलोक त्रिपाठी


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