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Post at: Jan 13 2022

24वां ई-गवर्नेंस राष्ट्रीय सम्मेलन

परिचय
ई-गवर्नेंस

  • ई-गवर्नेंस का अर्थ है-सभी स्तरों पर सूचना तथा लेन-देन संबंधी आदान-प्रदान की दक्षता, प्रभावशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना । ये आदान-प्रदान इस प्रकार हैं-
    • सरकार के अंदर; अर्थात सरकार तथा राष्ट्रीय, राज्य नगर निगम और स्थानीय स्तरों की सरकारी एजेंसियों के बीच,
    • नागरिकों और सरकार के बीच, 
  • ई-गवर्नेंस का लक्ष्य सूचना की पहुंच और उपयोग के माध्यम से नागरिकों का सशक्तीकरण है।

ई-गवर्नेंस से अपेक्षाएं

  • ई-गवर्नेंस द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएं, एक वहनीय लागत पर और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप, समाज के सभी वर्गों के लिए एक सामान रूप से उपलब्ध होनी चाहिएं। 
  • इनके द्वारा दी जाने वाली सेवाएं भरोसेमंद, प्रमाणित और समय पर एक रूप और आकार में होनी चाहिएं, जो प्रयोक्ताओं के लिए सुविधाजनक है।
  • ई-गवर्नेंस सेवा आपूर्ति एम-गवर्नेंस की ओर अग्रसर है,जो ई-गवर्नेंस सेवाओं की अनिवार्यता और पहुंच किसी भी समय, कहीं भी मोबाइल डिवाइस, लैपटॉप, पाम टॉप, मोबाइल फोन आदि का प्रयोग करके सुनिश्चित करेगी।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 7-8 जनवरी, 2022 को तेलंगाना कि राजधानी  हैदराबाद में स्थित हैदराबाद इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एचआईसीसी) में 24वां ई-गवर्नेंस राष्ट्रीय सम्मेलन (एनसीईजी), 2021 का आयोजन किया गया।
  • ध्यातव्य है कि पहला राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन वर्ष 1997, हैदराबाद में आयोजित किया गया था।
  • सम्मेलन का आयोजन  प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई), भारत सरकार तथा तेलंगाना सरकार के आपसी सहयोग से हुआ।
  • इस सम्मेलन का विषय ‘भारत का टेकेड : महामारी उपरांत की दुनिया में डिजिटल गवर्नेंस’(India’s Techade: Digital Governance in a Post Pandemic World) है। 
  • दो दिवसीय सम्मेलन में आयोजित सत्रों के दौरान गहन विचार-विमर्श के बाद ई-गवर्नेंस समापन सत्र में 8 जनवरी,2022 को ‘हैदराबाद घोषणा’ को स्वीकार किया गया।

सम्मेलन के महत्वपूर्ण निष्कर्ष

  • इस दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान पूर्ण सत्र में छह उप-विषयों पर विचार-विमर्श किया गया, जो निम्नवत हैं –

  • समानांतर सत्रों का भी आयोजन हुआ, जहां केंद्र, राज्य और जिले के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार, 2021 के पुरस्कार विजेताओं ने अपनी पुरस्कार विजेता प्रविष्टियों का प्रदर्शन किया। 
  • इन सत्रों का आयोजन, 2021 के यूनिकॉर्न : नवाचार की शक्ति, जिला स्तर पर डिजिटल उत्कृष्टता का प्रदर्शन, निर्बाध प्रौद्योगिकी नवाचार पारिस्थितिकीय-तंत्र का निर्माण, तकनीकी हस्तक्षेप के माध्यम से मानव हस्तक्षेप के बिना शुरू से अंत तक सेवा वितरण, ई-गवर्नेंस-सर्वोत्तम कार्य-प्रणाली में प्रतिकृति और स्थिरता के विषयों पर किया गया था।
  • ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए वॉल ऑफ फेम सहित एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। 
  • ई-गवर्नेंस की पहलों के कार्यान्वयन को मान्यता देने के लिए उद्‍घाटन सत्र के दौरान राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार, 2021 प्रदान किए गए। 
  • केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों, राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों, जिलों, स्थानीय निकायों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों को पुरस्कार योजना की 6 श्रेणियों के तहत, 26 पुरस्कार प्रदान किए गए। 
  • इसमें 12 गोल्ड, 13 सिल्वर और 1 जूरी अवॉर्ड शामिल हैं।
  • 24वें एनसीईजी ने प्रतिनिधियों के लिए एक मंच प्रदान किया, जिसमें देशभर के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, उद्योग के दिग्गज और शोधकर्ता शामिल हैं, जो सर्वोत्तम कार्य-प्रणालियों, नवीनतम प्रौद्योगिकी विकास को साझा करते हैं।
  • इस प्रकार प्रभावी गवर्नेंस और सार्वजनिक सेवा वितरण प्राप्त करने के लिए उनका लाभ उठाते हैं। 
  • सभी सत्रों का केंद्र नागरिकों के लाभ के लिए प्रभावी ई-गवर्नेंस उपकरण साझा करने के अनुभव द्वारा सीखने और प्रधानमंत्री नरेेंद्र मोदी के ’मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के विजन को हासिल करने पर था।

हैदराबाद घोषणा

  • सम्मेलन ने सर्वसम्मति से दो दिवसीय कार्यक्रम में आयोजित सत्रों के दौरान गहन विचार-विमर्श के बाद निम्नलिखित हैदराबाद घोषणा को स्वीकार किया है।
  • सम्मेलन ने संकल्प लिया कि भारत सरकार और राज्य सरकारें निम्नलिखित में सहयोग करेंगी:

1. डिजिटल प्‍लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों और सरकार को करीब लाना।
2. आधार, यूपीआई, डिजिलॉकर, उमंग (यूनिफाइड मोबाइल एप्‍लीकेशन फॉर न्यू-एज गवर्नेंस), ई-हस्ताक्षर और सहमति रूपरेखा सहित इण्डिया स्टैक की कलाकृतियों का लाभ उठाकर प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से नागरिक सेवाओं को बदलना।
3. संबद्ध सेवाओं के लिए ओपन इंटर-ऑपरेबल आर्किटेक्चर को अपनाकर स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि आदि प्रमुख सामाजिक क्षेत्रों, राष्ट्रीय स्तर के सार्वजनिक डिजिटल मंच का तेजी से कार्यान्वयन करना
4. सरकारी संस्थाओं के भीतर डाटा साझा करने की सुविधा के लिए डाटा गवर्नेंस ढांचे का संचालन करना और एक नकारात्मक सूची को छोड़कर सभी पर डाटा उपलब्ध कराना। 

  • डाटा संग्रह, डाटा हार्वेस्टिंग, डाटा गोपनीयता, डाटा को गुमनाम रखने, डाटा सुरक्षा और डाटा संरक्षण के लिए प्रोटोकॉल सक्षम करना, जिससे डाटा अर्थव्यवस्था का निर्माण करने में मदद मिल सके।

5. सामाजिक अधिकारिता के लिए उभरती हुई प्रौद्योगिकी; जैसे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन, 5जी, ऑगमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल रियलिटी आदि के जिम्मेदार उपयोग को प्रोत्साहन देना।
6. भविष्य की प्रौद्योगिकियों के लिए कुशल संसाधनों के बड़े पुल के निर्माण के माध्यम से भारत को उभरती हुई प्रौद्योगिकी का वैश्विक केंद्र बनाना।
7. महामारी जैसे व्यवधानों से निपटने के लिए मजबूत प्रौद्योगिकी समाधानों के साथ लचीला सरकारी बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करना।
8. चालू सरकारी सेवाओं में अनुसंधान और विकास और प्रक्रिया पुनर्रचना की भावना को बढ़ावा देना।
9. बेंचमार्किंग सेवाओं द्वारा राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के माध्यम से उच्‍च स्तर तक सुशासन का उत्थान।
10.ई-गवर्नेंस  परिदृश्य में सुधार के लिए एमईआईटीवाई के सहयोग से एनईएसडीए, 2021 (National e-Governance Service Delivery Assessment-NeSDA-2021) को अपनाया जाएगा।
11. लोक शिकायतों के निर्बाध निवारण के लिए सभी राज्य/जिला पोर्टलों को सीपीजीआरएएमएस (Centralized Public Grievance Redress And Monitoring System : CPGRAMS) के साथ एकीकृत करना
12. ई-गवर्नेंस, 2020-21 के लिए राष्ट्रीय पुरस्कारों के तहत, सम्मानित परियोजनाओं की प्रतिकृति और क्षेत्रीय सम्मेलनों के माध्यम से सर्वोत्तम कार्य-प्रणाली के प्रसार के लिए उनका नामांकन ।
13. सभी मंत्रालयों और विभागों में ई-ऑफिस वर्जन 7.0 को अपनाना ।
14. जमीनी स्तर पर नागरिकों को मानवीय हस्तक्षेप के बिना शुरू से अंत तक सेवा मुहैया करवाने के प्रचार के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग ।
15. सरकारी सेवा डिजाइन और वितरण का प्राथमिक पहलू ’डिजिटल’ बनाना और इसे प्राप्त करने के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना प्रदान करना।
 

संकलन-मनीष प्रियदर्शी
 


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