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Post at: Dec 04 2021

आईएनएस वेला

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 25 नवंबर, 2021 को आईएनएस ‘वेला’ को भारतीय नौसेना में शामिल  किया गया ।
  • आईएनएस वेला पश्चिमी नौसेना कमान के पनडुब्बी बेड़े का हिस्सा होगी|
  • प्रोजेक्ट-75 की छह पनडुब्बियों की श्रृंखला में यह चौथी पनडुब्बी है|
  • प्रोजेक्ट-75 भारतीय नौसेना का एक कार्यक्रम है, जिसमें छह स्कॉर्पियन श्रेणी की ‘अटैक सबमरीन’ का निर्माण शामिल है।

प्रमुख बिंदु

  • वेला के शामिल होने के साथ ही नौसेना के पास वर्तमान में 16 पारंपरिक (Conventional) और एक परमाणु (Nuclear) पनडुब्बी सेवा में है ।
  • इसमें 8 रूसी किलो वर्ग की पनडुब्बी, 4 जर्मन एचडीडब्ल्यू पनडुब्बी, 4 फ्रांसीसी स्कॉर्पियन पनडुब्बी और स्वदेशी परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत शामिल हैं।
  • पनडुब्बी में उन्‍नत स्टील्थ विशेषताएं तथा लंबी दूरी की गाइडेड टारपीडो के साथ-साथ एंटी-शिप मिसाइलें हैं।

पृष्ठभूमि

  • नया आईएनएस वेला अपने नाम की विरासत को आगे बढ़ाता है, पूर्व वेला जिसे 31 अगस्त, 1973 को वेला श्रेणी की पनडुब्बियों की प्रमुख पोत के रूप में कमीशन किया गया था और 25 जनवरी, 2010 को सेवामुक्त कर दिया गया था।
  • 14 जुलाई, 2009 को पनडुब्बी का निर्माण शुरू हुआ |
  • 6 मई, 2019 को इसे लांच किया गया और  इसका नाम वेला रखा गया।
  • वेला, स्टिंगरे परिवार (stingray family) से संबंधित एक प्रकार की भारतीय मछली के नाम पर रखा जा रहा है|
  • अक्टूबर, 2005 में हस्ताक्षरित 3.75 बिलियन डॉलर के सौदे के तहत, फ्रांस के नेवल ग्रुप से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के तहत, मझगांव डॉक लिमिटेड (एमडीएल), मुंबई द्वारा प्रोजेक्ट -75 के तहत छह स्कॉर्पियन पनडुब्बियों का निर्माण किया जा रहा है।
  • पहली पनडुब्बी INS कलवरी(Kalvari) को दिसंबर, 2017 में, दूसरी पनडुब्बी INS खंदेरी (Khanderi) को सितंबर, 2019 में और तीसरी INS करंज (Karanj) को मार्च, 2021 में नौसेना में शामिल किया गया था। 
  • पांचवीं पनडुब्बी, वागीर (Vagir ) नवंबर, 2020 में लांच की गई थी, जिसका समुद्री परीक्षण जारी है।
  • जबकि छठी पनडुब्बी वाग्शीर (Vagsheer) निर्माणाधीन है।

स्कॉर्पियन श्रेणी 

  • स्कॉर्पियन श्रेणी की पनडुब्बियों का निर्माण भारत में मैसर्स नेवल ग्रुप (पहले डीसीएनएस), फ्रांस के सहयोग से मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल), मुंबई द्वारा किया जा रहा है।
  • प्रोजेक्ट-75’ के तहत शामिल स्कॉर्पियन श्रेणी की पनडुब्बियां ‘डीजल-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम’ द्वारा संचालित होती हैं।
  • स्कॉर्पियन पनडुब्बियां अत्यंत शक्तिशाली प्‍लेटफॉर्म हैं, उनके पास उन्‍नत स्टील्थ विशेषताएं हैं और ये लंबी दूरी के गाइडेड टॉरपीडो के साथ-साथ पोत-रोधी मिसाइलों से भी लैस हैं। 
  • इन पनडुब्बियों में अत्याधुनिक सोनार और सेंसर सूट हैं, जो उत्कृष्ट अभियानगत क्षमताएं प्रदान करते हैं।
  • पनडुब्बियों में प्रणोदन मोटर के रूप में एक उन्‍नत स्थाई चुंबकीय सिंक्रोनस मोटर भी है।

निष्कर्ष

  • भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट 75 और मेक इन इंडिया पहल के लिए एक और बड़ा मील का पत्थर है।
  • वेला की आपूर्ति भारतीय नौसेना द्वारा 'बिल्डर्स नेवी' के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करने की दिशा में दिए जा रहे जोर की एक बार फिर पुष्टि करती है और साथ ही एक प्रमुख जहाज और पनडुब्बी निर्माण यार्ड के रूप में एमडीएल की क्षमताओं का भी संकेत है। 
  • पनडुब्बी की कमीशनिंग ऐसे समय हो रही है,  जब 'आजादी का अमृत महोत्सव' और 'स्वर्णिम विजय वर्ष' समारोह भी मनाया जा रहा है।

​​​​​​​    संकलन-आदित्य भारद्वाज


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