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Post at: Dec 03 2021

स्वच्‍छ सर्वेक्षण, 2021

पृष्ठभूमि

  • शहरी स्वच्‍छता में सुधार लाने हेतु शहरों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने जनवरी, 2016 में 73 शहरों की रेटिंग के लिए ‘स्वच्‍छ सर्वेक्षण, 2016’ का आयोजन किया था।
    • स्वच्‍छ सर्वेक्षण, 2016 की सफलता को देखते हुए  434 शहरों की रैंकिंग हेतु स्वच्‍छ सर्वेक्षण, 2017 का आयोजन किया गया।
  • स्वच्‍छ सर्वेक्षण, 2018 विश्व का सबसे बड़ा स्वच्‍छता सर्वेक्षण था, जिसमें 4203 शहरों को रैंकिंग में शामिल किया गया।
  • स्वच्‍छ सर्वेक्षण, 2019 में 4237 शहरों को शामिल किया गया ।
  • यह अपनी तरह का पहला पूर्ण डिजिटल स्वच्‍छता सर्वेक्षण भी था, जो 28 दिनों के रिकॉर्ड समय में पूरा कर लिया गया।
  • स्वच्‍छ सर्वेक्षण, 2020 में 4242 शहरों को शामिल किया गया और इसमें 1.87 करोड़ नागरिकों की अभूतपूर्व भागीदारी रही।
  • 3 जुलाई, 2020 को स्वच्‍छ सर्वेक्षण, 2021 की शुरुआत केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी द्वारा स्वच्‍छ भारत मिशन के अंतर्गत की गई है।
  • स्वच्‍छ सर्वेक्षण, 2021 आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा संचालित शहरी क्षेत्रों के वार्षिक स्वच्‍छता सर्वेक्षण की श्रृंखला का 6वां संस्करण है।

प्रेरक ‘दौड़ सम्मान’

  • इस वर्ष केंद्र सरकार द्वारा पुरस्कारों की नई श्रेणी की घोषणा भी की गई है, जिसका नाम है ‘प्रेरक दौड़ (DAUUR) सम्मान’।
  • इस सम्मान के तहत, पांच अतिरिक्त उप श्रेणियां होंगी-
  1. दिव्य-प्‍लैटिनम (प्‍लैटिनम)
  2. अनुपम- गोल्ड (स्वर्ण)
  3. उज्‍ज्‍वल - सिल्वर (रजत)
  4. उदित-ब्रॉन्ज (कांस्य)
  5. आरोही-एस्पायरिंग (आकांक्षी)
  • ‘जनसंख्या श्रेणी’ पर शहरों का मूल्यांकन करने के वर्तमान मानदंड से अलग, यह नई श्रेणी शहरों को 6 चुने हुए संकेतकों पर प्रदर्शन के आधार पर वर्गीकृत करेगी।

प्रेरक दौड़ सम्मान :  6 संकेतक

  1. कचरे को गीला, सूखा और खतरनाक श्रेणियों में विभाजित करना, 
  2. गीले कचरे के खिलाफ प्रसंस्करण क्षमता,
  3. गीले और सूखे कचरे का प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण,
  4. निर्माण और विध्वंसक अपशिष्ट प्रसंस्करण,
  5. लैंडफिल (भूमि भराव) में जाने वाले कचरे का प्रतिशत तथा
  6. शहरों की स्वच्‍छता स्थिति।

स्वच्‍छ सर्वेक्षण , 2021 का उद्देश्य

  • विदित हो कि वर्तमान में भी बहुत से ऐसे शहर और कस्बे हैं, जहां साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दिया जाता है। वैश्विक महामारी कोविड-19 के प्रभावों को कम करने में स्वच्‍छता एक अहम भूमिका में है।
  • इस वर्ष के सर्वेक्षण के अंतर्गत्‍ा गीले, शुष्क और खतरनाक अपशिष्ट को अलग करने, गीले अपशिष्ट के निपटान की प्रक्रिया, गीले और शुष्क अपशिष्ट का निपटान और पुनर्चक्रण, निर्माण मलबा निस्तारण, कचरा स्थल पर फेंके जाने वाले कचरे की मात्रा और शहरों की स्वच्‍छता की स्थिति पर ध्यान दिया जाएगा, जिससे देश को स्वच्‍छ रखा जा सके।
  • ‘स्वच्‍छ सर्वेक्षण, 2021’ के संकेतकों को मुख्य रूप से ‘अपशिष्ट जल उपचार’ एवं ‘मल-कीचड़ के पुनर्उपयोग’ पर केंद्रित बनाया गया है।

स्वच्‍छ सर्वेक्षण, 2021
वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 20 नवंबर, 2021 को भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा ‘स्वच्‍छ सर्वेक्षण , 2021’ का परिणाम जारी किया गया।
  • ‘स्वच्‍छ सर्वेक्षण, 2021’ 28 दिनों तक सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के 4320 शहरों, 62 कैंटोनमेंट बोर्ड (छावनी परिषद) में संचालित किया गया।
  • इस प्रकार स्वच्‍छ सर्वेक्षण का यह छठा संस्करण विश्व का सबसे बड़ा शहरी स्वच्‍छता सर्वेक्षण बन गया है।
  • ‘स्वच्‍छ सर्वेक्षण, 2021’ में गंगा के किनारे बसे 91 ‘गंगा नगरों’ (Ganga Towns) को भी शामिल किया गया है।

रैंकिंग

  • ‘स्वच्‍छ सर्वेक्षण, 2021’ में राष्ट्रीय स्तर (1 लाख से अधिक जनसंख्या श्रेणी में) पर लगातार पांचवीं बार इंदौर को भारत का ‘सबसे स्वच्‍छ शहर’ (Cleanest City) घोषित किया गया है।
  • शीर्ष 10 शहरों की रैंकिंग (1 लाख से अधिक जनंसख्या श्रेणी में) इस प्रकार है-

  • शीर्ष 10 शहरों (1-10 लाख जनसंख्या श्रेणी में) की रैंकिंग इस प्रकार है-

  • सर्वेक्षण, 2021 के तहत 1-10 लाख जनसंख्या श्रेणी में बिहार के सासाराम को अंतिम स्थान (372वां) प्राप्त हुआ।
  • 10 लाख से अधिक जनसंख्या श्रेणी में शीर्ष 20 शहरों में उत्तर प्रदेश के 2 शहरों को स्थान प्राप्त हुआ, जिसमें लखनऊ (12वां) एवं गाजियाबाद (18वां) ने अपनी जगह बनाई।
  • 10 लाख से अधिक जनसंख्या श्रेणी में कानपुर (उ.प्र.) का 21वां, आगरा (उ.प्र.) का 24वां, प्रयागराज (उ.प्र.) का 26वां, मेरठ (उ.प्र.) का 27वां तथा वाराणसी (उ.प्र.) का 30वां स्थान है।
  • 1-10 लाख जनसंख्या श्रेणी में उत्तर प्रदेश के शहरों में नोएडा 
    • (चौथा), झांसी (18वां), अलीगढ़ (34वां), फिरोजाबाद (60वां) शामिल हैं।
  • राज्यों की रैंकिंग इस प्रकार है-

  • 100 शहरी स्थानीय निकायों से अधिक की श्रेणी वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश का स्थान 6वां है।
  • गंगा नगरों की रैंकिंग में एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले गंगा नगरों (गंगा नदी के किनारे बसे नगर) में उत्तर प्रदेश के वाराणसी नगर को शीर्ष स्थान प्राप्त हुआ, जबकि दूसरे, तीसरे तथा चौथे स्थान पर क्रमश : मुंगेर (बिहार), पटना (बिहार) तथा कानपुर (उत्तर प्रदेश) शामिल रहे।
  • 1 लाख से कम की जनसंख्या वाले गंगा नगरों की  श्रेणी में उत्तर प्रदेश का कन्‍नौज प्रथम स्थान पर तथा बिजनौर दूसरे स्थान पर है।
  • अहमदाबाद छावनी (Ahmedabad Cantonment) को भारत की सबसे स्वच्‍छ छावनी (Cleanest Cantonment) घोषित किया गया।
  • इस दृष्टि से मेरठ छावनी एवं दिल्‍ली छावनी क्रमश: दूसरे एवं तीसरे स्थान पर हैं।

प्रेरक दौड़ सम्मान :  परिणाम

  • नई प्रदर्शन श्रेणी ‘प्रेरक दौड़ सम्मान’ के तहत पांच शहरों यथा-तिरुपति (आंध्र प्रदेश), नई दिल्‍ली (दिल्‍ली), सूरत (गुजरात), इंदौर (मध्य प्रदेश) तथा नवी मुंबई (महाराष्ट्र) को दिव्य (प्‍लैटिनम) श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।
  • गोल्ड (अनुपम) श्रेणी में उत्तर प्रदेश के 5 शहरों (नोएडा, सहारनपुर, प्रयागराज, मेरठ एवं वाराणसी) सहित कुल 151 शहर शामिल हैं।
  • सिल्वर (उज्‍ज्‍वल) श्रेणी में कुल 67 शहर शामिल हैं।
  • ब्रॉन्‍ज (उदित) श्रेणी में कुल 143 शहर शामिल हैं।
  • कॉपर (आरोही) श्रेणी में कुल 63 शहर शामिल हैं।

कचरा-मुक्त शहरों को स्टार रेटिंग प्रोटोकॉल

  • वर्ष 2018 में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा ‘कचरा-मुक्त शहरों के स्टार रेटिंग प्रोटोकॉल’ (Star Rating Protocol of Garbage free Cities) को एक ‘स्मार्ट’ (SMART) फ्रेमवर्क के रूप में प्रारंभ किया गया था।
  • इसका उद्देश्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मानदंडों में शहरों का समग्र मूल्यांकन करना था।
  • 20 नवंबर, 2021 को कचरा-मुक्त शहरों के स्टार रेटिंग प्रोटोकॉल के तहत, 3-स्टार और 5-स्टार रेटिंग वाले शहरों के परिणामों की घोषणा की गई ।
  • कुल 9 शहरों यथा-इंदौर, सूरत, नई दिल्‍ली, नवी मंुबई, अम्बिकापुर, मैसूर, नोएडा, विजयवाड़ा तथा पाटन को 5-स्टार शहरों (5-Star Cities) के रूप में प्रमाणित किया गया है।
  • जबकि 143 शहरों को 3-स्टार प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया है।

सफाई मित्र सुरक्षा चुनौती

  • आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने नवंबर, 2020 में ‘सफाई मित्र सुरक्षा चुनौती’ नामक पहल को आरंभ किया था।
  • इस पहल का उद्देश्य सीवर एवं सेप्‍टिक टैंक सफाई कर्मियों की सुरक्षा एवं गरिमा को सुनिश्चित करना है।
  • साथ ही शहरी स्वच्‍छता के संदर्भ में खतरनाक सफाई (hazardous cleaning) के खतरे का उन्मूलन करना है।

संकलन-सौरभ मेहरोत्रा


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