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Post at: Nov 30 2021

वैश्विक बालिकावस्था रिपोर्ट, 2021 (Global Girlhood Report, 2021)

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 10 अक्टूबर, 2021 को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर एक गैर-सरकारी संगठन ‘सेव द चिल्ड्रन’ (Save the Children) द्वारा वैश्विक बालिकावस्था (Global Girlhood) रिपोर्ट जारी की गई।
  • इस रिपोर्ट का शीर्षक है ‘‘गर्ल्स राइट इन क्राइसिस (Girls' Rights In Crisis)
  • यह रिपोर्ट बाल विवाह और उससे होने वाले दुष्प्रभावों पर केंद्रित है।

प्रमुख निष्कर्ष

  • विश्व में सर्वाधिक बाल विवाह की दर पश्चिम एवं मध्य अफ्रीकी देशों में है।
    • विश्व स्तर पर बाल विवाह से संबंधित सभी अनुमानित मौतों का लगभग आधा (9600) इन्हीं देशों से संबंधित है।
  • विश्व स्तर पर बाल विवाह के कारण एक दिन में 60 से अधिक बालिकाओं की मृत्यु हो जाती है।
    • पश्चिम एवं मध्य अफ्रीका में एक दिन में  26 बालिकाएं तथा दक्षिण एशिया में 6 बालिकाओं की मृत्यु बाल विवाह के कारण होती है।
  • रिपोर्ट यह बताती है कि दक्षिण एशिया में प्रतिवर्ष 2000 बालिकाओं की मौत बाल विवाह के कारण होती है।
    • पूर्वी एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र में 650 मृत्यु तथा लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन क्षेत्र में 560 मृत्यु प्रतिवर्ष बाल विवाह के कारण होती है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिवर्ष 22000 बालिकाओं की मृत्यु गर्भावस्था से प्रसव के दौरान होती है, जिसका प्रमुख कारण बाल विवाह है।

कोविड-19 (COVID-19) का प्रभाव

  • कोविड-19 महामारी ने बाल विवाह के उन्मूलन को बढ़ावा देने वाले प्रयासों को मंद किया है।
    • जिससे असमानता में और वृद्धि हुई तथा बाल विवाह को बढ़ावा मिला है।
    • लाॅकडाउन के दौरान महिलाओं/बालिकाओं के प्रति हिंसा मंे वृद्धि हुई है।
  • यद्यपि पिछले 25 वर्षों में वैश्विक स्तर पर 80 मिलियन बाल विवाहों को रोका गया है।

स्वास्थ्य और शिक्षा पर कोविड-19 का प्रभाव

  • स्कूल बंद होने, स्वास्थ्य सेवाओं पर अत्यधिक दबाव होने या बंद होने के कारण स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसी आधारभूत जरूरतें प्रभावित हुई हैं, जिससे गरीबी की संख्या में वृद्धि हुई है।

भारतीय संदर्भ

  • अप्रैल, 2020 से मार्च, 2021 के मध्य तेलंगाना में प्रशासन ने 1355 बाल विवाहों को घटित होने से पूर्व रोका।
    • यह पिछले वर्ष की अपेक्षा 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
  • सेव द चिल्‍ड्रेन एनजीओ (NGO) के अनुमान के अनुसार, भारत बाल विवाह को रोकने में अग्रणी देश है। 
    • फिर भी कोविड-19 के कारण दक्षिण एशिया में वर्ष 2025 तक लगभग 1 मिलियन अतिरिक्त बाल विवाह होने की संभावना है। 
    • चार देशों के त्वरित सर्वेक्षण में यह पाया गया कि कोविड-19 के बाद लड़कों की तुलना में लड़कियों की स्कूल वापस आने की संभावना कम है। 
  • उन चार देशों में भारत भी शामिल है। अन्य तीन देश हैं-इथियोपिया, पाकिस्तान एवं नाइजीरिया।

संस्तुति

  • निर्णयन में भागीदारी
  • सार्वजनिक निर्णयन में बालिकाओं की सुरक्षित एवं सार्थक भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
  • लड़कियों की आवाज को सशक्त बनाया जाए।
  • लैंगिक समानता पर ध्यान
  • लिंग आधारित-हिंसा तथा मौजूदा जोखिमों का तत्काल समाधान।
  • बालिकाओं के अधिकारों के सुरक्षा की गारंटी
  • समावेशी नीतियों एवं कार्यक्रमों का क्रियान्वयन।
  • असमानता एवं भेदभाव के विभिन्‍न रूपों की समाप्ति ।

महिला कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करना

  • यूनिसेफ (UNICEF) के अनुमान के अनुसार, भारत में प्रत्येक वर्ष 1.5 मिलियन बालिकाओं का विवाह 18 वर्ष से कम उम्र में हो जाता है।
  • भारत में विश्व की सर्वाधिक बाल वधू (लगभग एक-तिहाई )निवास करती हैं।
  • वर्तमान में 15-19 आयु वर्ग की लगभग 16 प्रतिशत बालिकाओं का विवाह हो चुका है।
  • वर्ष 2005-2006 में 18 वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं के विवाह का आंकड़ा 47 प्रतिशत था,  जो 2015-16 में घटकर 27 प्रतिशत हो गया।
  • भारत में बालिकाओं के बाल विवाह का कारण


  • बालिकाओं के अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए पीढ़ीगत समानता संबंधित आंदोलन में सहभागिता।

भारत में बाल विवाह की स्थिति

  • बाल विवाह रोकने के भारत के प्रयास
    • बाल विवाह निरोधक अधिनियम, 1929
    • विशेष विवाह अधिनियम, 1954
    • बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006
    • जया जेटली समिति की नियुक्ति लड़कियों के विवाह की आयु को पुन: तय करने के लिए।

आगे की राह- यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार,

  • सूचना कौशल एवं सहायक कार्यकर्ताओं द्वारा बालिकाओं को सशक्त बनाया जाए।
  • बाल विवाह को समाप्त करने के लिए प्रभावी एवं सक्षम कानूनी तथा नीतिगत वातावरण को बढ़ावा देना।
  • लिंग संवेदनशील सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देना।
  • शिक्षा एवं प्रशिक्षण की पहुंच एवं गुणवत्ता को बढ़ाना।

संकलन-अशोक कुमार तिवारी


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