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Post at: Nov 30 2021

रूल ऑफ लॉ इंडेक्स, 2021

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 14 अक्टूबर को द वर्ल्ड जस्टिस प्रोजेक्ट (WJP) द्वारा रूल आॅफ लाॅ इंडेक्स, 2021 (Rule of law Index,2021) जारी किया गया।
  • यह सूचकांक विश्व के 139 देशों मंे कानून के शासन (Rule of Law) का मूल्यांकन करता है।
  • मार्च, 2020 के बाद पहली बार जारी होने वाला यह सूचकांक दर्शाता है कि विश्व में कानून के शासन मंे गिरावट आई है।
  • सतत विकास लक्ष्य, 2030 सभी के लिए न्याय तक पहंुच का वादा करता है, परंतु  इस संदर्भ में विगत 18 महीनों में दुनिया नकारात्मक दिशा में बढ़ी है।

वर्ल्ड जस्टिस प्रोजेक्ट (World Justice Project -WJP)

  • यह एक स्वतंत्र, बहु-विषयक मुद्दों पर काम करने वाला संगठन है, जो कानून के शासन (Rule of Law) को आगे बढ़ाने, प्रोत्साहित करने तथा जागरूकता पैदा करने के लिए विश्वभर में कार्य कर रहा है।
  • वर्ष 2008 से रूल ऑफ लॉ इंडेक्स, वर्ल्ड जस्टिस प्रोजेक्ट द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।
  • वर्ष 2021 का रूल आॅफ लॉ इंडेक्स इस रिपोर्ट का 12वां संस्करण है।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु

  • यह रिपोर्ट 139 देशों के 138,000 घरों एवं 4200 अधिवक्ताओं तथा कानूनी विशेषज्ञों पर किए गए सर्वेक्षण  पर अाधारित है।
  • सूचकांक में कानून के शासन के चार सार्वभौमिक सिद्धांत दिए गए हैं, जो निम्नवत हैं-
  • जवाबदेहिता (Accountability)
  • निष्पक्ष विधि (Just Law)
  • खुली सरकार (Open Government)
  • सुलभ एवं निष्पक्ष न्याय (Accessible and Impartial Justice)
  • इस सूचकांक में रैंकिंग एवं स्कोर निम्नलिखित आठ कारकों के आधार पर दिए गए हैं -
  1. सरकारी शक्तियों पर प्रतिबंध (Constraints on Government Powers)
  2. भ्रष्टाचार  की अनुपस्थिति (Absence of Corruption)
  3. खुली सरकार (Open Government)
  4. मौलिक अधिकार (Fundamental Rights)
  5. आदेश एवं सुरक्षा (Order and Security)
  6. नियामक प्रवर्तन (Regulatory Enforcement)
  7. नागरिक न्याय (Civil Justice)
  8. आपराधिक न्याय (Criminal Justice)

सूचकांक से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

  • वर्ष 2020 के मुकाबले इस वर्ष सूचकांक में 11 अतिरिक्त देशों को शामिल किया गया है, जिसमें पहली बार संपूर्ण यूरोपियन यूनियन शामिल है।
  • वर्ष 2021 सूचकांक यह प्रदर्शित करता है कि लगातार चौथे वर्ष कानून के शासन में संपूर्ण विश्व स्तर पर गिरावट दर्ज की गई है।
  • कोविड-19 महामारी के दौरान सर्वेक्षण में शामिल 74.2 प्रतिशत देशों (विश्व की कुल जनसंख्या का 84.7 प्रतिशत) में कानून के शासन में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि 25.8 प्रतिशत देशों में सुधार दर्ज हुआ है।
  • महामारी के दौर में सरकारी शक्तियों पर प्रतिबंध में 70 प्रतिशत देशों में गिरावट देखी गई यानि कि सरकार की शक्तियों में महामारी के दौर में वृद्धि हुई है।
    • दक्षिण एशिया, मध्य एशिया एवं उत्तरी अमेरिका में सरकार की शक्तियों में अधिक वृद्धि देखी गई है।
  • सूचकांक में शामिल 82 प्रतिशत देशों में नागरिक क्षेत्र (नागरिक भागीदारी, अभिव्यक्ति एवं मत की स्वतंत्रता तथा सभा करने एवं संघ बनाने की स्वतंत्रता) में गिरावट दर्ज की गई है।
  • कोविड-19 के दौरान भेद-भाव में वृद्धि तथा न्याय में देरी का चलन बढ़ा है।
    • वर्ष 2020 में सूचकांक में शामिल 67 प्रतिशत देशों में भेद-भाव में वृद्धि हुई है।
    • जबकि सूचकांक में शामिल 94 प्रतिशत देशों में प्रशासनिक, नागरिक एवं आपराधिक कार्यवाही में देरी दर्ज की गई है।
  • सूचकांक के अनुसार, 2021 में डेनमार्क, नाॅर्वे एवं िफनलैंड क्रमश: प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर हैं।
  • वर्ष 2020 के सूचकांक की तुलना में इस वर्ष सर्वाधिक सुधार करने वाले शीर्ष तीन देश क्रमश: उज्‍बेकिस्तान (4.1%), मोलडोवा (3.2%) एवं मंगोलिया (2.0%) हैं। 
  • सूचकांक में शामिल शीर्ष 5 देश

नोट- सूचकांक में 1 स्कोर के नजदीक का स्कोर कानून के शासन की बेहतर स्थिति को दर्शाता है, जबकि शून्य (0) के पास का स्कोर कानून के शासन की खराब स्थिति को दर्शाता है।

  • सूचकांक में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक आॅफ कांगो (137वें), कंबोडिया (138वें) तथा वेनेजुएला (139वें) स्थान पर कानून के शासन के अंतर्गत सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले देश हैं।
  • वहीं बेलारूस (-7.5%) , म्यांमार (-6.3 %) तथा नाइजीरिया, निकारगुआ, किर्गिस्तान एवं अर्जेंटीना (-3.7 %) सूचकांक में सर्वाधिक गिरावट दर्ज करने वाले देश हैं।

ब्रिक्स देशों का प्रदर्शन

भारत का प्रदर्शन

  • सूचकांक में शामिल 6 दक्षिण एशियाई देशों मंे नेपाल (70वें) तथा श्रीलंका (76वें) के बाद भारत (79वें) तीसरे स्थान पर है।
  • बांग्‍लादेश (124वें), पाकिस्तान (130वें) तथा अफगानिस्तान (134वें) दक्षिण एशिया में कानून के शासन में भारत से पिछड़े राष्ट्र हैं।
  • वर्ष 2020 के मुकाबले वर्ष 2021 में भारत की रैंकिंग में तीन स्थानों की गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2020 में जहां भारत को 76वां स्थान प्राप्त था, वहीं वर्ष 2021 में 79 वें स्थान आ गया है।
  • सूचकांक निर्माण के आठ आधार जो निम्नवत हैं, में भारत की रैकिंग है- सरकारी शक्तियों पर प्रतिबंध में 52वां, भ्रष्टाचार की अनुपस्थिति में 95वां, खुली सरकार में 40वां, मौलिक अधिकार में 93वां, आदेश एवं सुरक्षा में 121वां, नियामक प्रवर्तन में 79वां, नागरिक न्याय में 110वां तथा आपराधिक न्याय में 86वां।
  • भारत के रैंक में तीन स्थानों की गिरावट, आदेश एवं सुरक्षा तथा नियामक प्रवर्तन को छोड़कर लगभग सभी आधारों में आए गिरावट के कारण आई है।

संकलन-मनीष प्रियदर्शी
 


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