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Post at: Nov 30 2021

गुरु नानक देव

वर्तमान संदर्भ

  • 19 नवंबर, 2021 को गुरु नानक देव की 552वीं जयंती मनाई गई।
  • सिक्‍खों  के इस पर्व को ‘गुरु पर्व’ के नाम से भी जाना जाता है। 
  • सिक्‍खों का मानना है कि गुरु नानक देव जी इस दुनिया में ज्ञान लेकर आए थे।
  • सिख का अर्थ-‘सत्य का उपासक’ या ‘सत्य को खोजने वाला’ है।

परिचय

  • गुरु नानक देव का जन्म 14 अप्रैल, 1469 को ननकाना साहिब (पंजाब राज्य, वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था।
  • उनका देहावसान 22 सिंतबर, 1539 को हुआ। 
  • उन्होंने ‘लहना’ को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था।
  • गुरु नानक देव जी सिख धर्म के संस्थापक थे, जिन्होंने समानता, भाईचारे, प्रेम, सदाचार पर आधारित एक आध्यात्मिक समाज के स्थापना की परिकल्पना की।
  • गुरुनानक भक्तिकाल के निर्गुण परंपरा के ज्ञानश्री शाखा के संत थे। 
  • उनकी रचनाओं को संकलन गुरु अंगद द्वारा किया गया। इसी को ‘गुरु ग्रन्थ साहिब’ कहा जाता है ।
  •  गुरु नानक देव की दी गई सबसे प्रमुख शिक्षाओं में उनकी ‘एकेश्वरवाद’ की धारणा है, उनका मानना था कि ईश्वर एक है तथा उस तक सभी मनुष्य सीधे (बिना अनुष्ठान, पुजारी) के पहुंच सकते हैं।

प्रमुख कार्य
सामाजिक 

  • गुरु नानक जी ने सामाजिक समरसता स्थापित करने पर जोर दिया। समाज में व्याप्त जाति, वर्ण, क्षेत्र जनित विषमताओं पर प्रहार किया तथा  इसे मिथ्या माना।
  • उन्होंने समाज के हर व्यक्ति को समान तथा एक ही व्‍यवस्था का अंग माना। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति में ईश्वर के अंश को विद्यमान माना।

धार्मिक विचार

  • उन्होंने ‘एकेश्वरवाद’ की अवधारणा को प्रतिष्ठित करने का कार्य किया।
  • धार्मिक कट्‍टरता, अत्याचार, जड़ता पर सहिष्णुता तथा सद्‍भाव को सर्वोपरि माना।
  • सामाजिक सत्कार्यों तथा बलिदान को सिख धर्म का आधार बनाया ।

कीरत-श्रम और नियम से अपनी आजीविका प्राप्त करना।
वंडचखों- परहित में कुछ कमाए अंश का प्रयोग।
नाम जपो- ईश्वर का स्मरण करते रहो।

  • कालांतर में लंगर तथा पंगत का लक्ष्य भी सामाजिक समरसता तथा बंधुत्व को बढ़ाने वाला प्रयोग था।
  • गुरु नानक देव से लेकर ‘अंतिम गुरु गुरु गोविंद सिंह के बीच के कालक्रम में सिख धर्म ने उत्तरोत्तर विस्तार तथा सामाजिक स्वीकृति प्राप्त करते हुए, समाज को धार्मिक रूप से उदार, सहिष्णु तथा समावेशी बनाने का कार्य किया।

अन्य संबंधित तथ्य

  • गुरु- ‘अंधकार से प्रकाश’ की तरफ ले जाने वाला।
  • सबद गुरु- अपनी वाणी तथा शब्दों द्वारा ज्ञान के प्रकाश के फैलाने को नानक जी ने ‘सबद गुरु माना’।
     


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