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क्रिप्‍टोकार्य मुथुवरियाना

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • नवंबर, 2021 को केरल विश्वविद्यालय एवं जवाहरलाल नेहरू ट्रॉपिकल बोटेनिकल गार्डेन एंड रिसर्च इंस्टीट्‍यूट (केरल) के वैज्ञानिकों के समूह ने एक नए पौधे की प्रजाति की खोज की है।
  • इस पौधे का नाम क्रिप्‍टोकार्य मुथुवरियाना है।
  • इस प्रजाति की खोज दक्षिणी पश्चिमी घाट (केरल के इडुक्‍की जिले के एडमालक्‍कुडी जंगलों) में पाई गई है।
  • यह जीनस क्रिप्‍टाेकार्य की एक प्रजाति है।

प्रजाति के बारे में

  • ‘क्रिप्‍टोकार्य मुथुवरियाना’ का नाम एक स्थानीय जनजाति ‘मुथुवर’ के सम्मान में रखा गया है।
  • यह प्रजाति उसी क्षेत्र में मिली है, जहां यह जनजाति निवास करती है।
  • यह पहली बार है कि किसी प्रजाति का नाम किसी जनजाति के नाम पर रखा गया है।
  • मुथुवर जनजाति वनों के संरक्षण में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए जानी जाती है।
  • यह प्रजाति सी. फेरारी से मिलती-जुलती है, किंतु यह उससे भिन्‍न है।
  • सी. फेरारी पूर्वोत्तर भारत, अंडमान निकोबार और बांग्‍लादेश में पाया जाने वाला टेक्‍सोन है।
  • इस प्रजाति पर अध्ययन ने इसकी एक विशिष्ट प्रजाति होने की पुष्टि की है।
  • यह प्रजाति 10 से 15 मीटर की ऊंचाई तक बढ़ती है।
  • इसकी पहचान इसकी ‘कम चौड़ी’ पत्तियों से की जा सकती है।
  • शोधकर्ताओं ने इस क्षेत्र में 10 अलग-अलग प्रजातियों के पौधों को देखा।

जीनस क्रिप्‍टोकार्य

  • जीनस क्रिप्‍टोकार्य लॉरेसी परिवार से संबंधित है।
  • दक्षिण अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, मेडागास्कर, एशिया, ऑस्ट्रेलिया और ओशिनिया में इसकी 300 से अधिक प्रजातियां व्यापक रूप से पाई जाती हैं।
  • शोधकर्ताओं के अनुसार, पश्चिमी घाट में जीनस क्रिप्‍टोकार्य की 9 प्रजातियां पाई जाती हैं।
  • पश्चिमी घाट में स्थानिक और संकटग्रस्त प्रजातियों पर सर्वेक्षण करते समय शोधकर्ताओं को नई प्रजातियों का पता चला है।

मुथुवर आदिवासी समुदाय

  • मुथुवन लोग मदुरै राजवंश के वफादार लोग थे।
  • इस वंश के पतन के बाद वे लोग त्रावणकोर (केरल) की ओर पलायित हो गए।
  • अपनी यात्रा के दौरान वे लोग मदुरै ‘मीनाक्षी देवी’ की मूर्ति अपने साथ ले गए।
  • मदुरै मीनाक्षी (मदुरै राजवंश के) शाही परिवार की देवी थीं।
  • तमिलनाडु में मुथुवर शब्द इसी जनजाति (मुथुवन) के संदर्भ में प्रयोग किया जाता है।
  • यह जनजाति केरल एवं तमिलनाडु के सीमावर्ती पहाड़ी जंगलों में रहते हैं।
  • यह जनजाति केरल के इडुक्‍की जिले के आदिमाली और देवीकुलम वन क्षेत्रों में निवास करते हैं।
  • इस जनजाति की सर्वाधिक सघनता पश्चिमी घाट की सबसे ऊंची चोटी अनाईमुडी की पहाड़ियों पर है।
  • यह देश की सबसे पुरानी जनजातियों में से एक है।
  • यह समूह आत्‍मनिर्भर है तथा बाहरी लोगों के संपर्क के खिलाफ है।
  • यह समुदाय रागी, लेमन ग्रास और इलायची की खेती करता है।

संकलन-अशोक तिवारी
 

 


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