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Post at: Nov 25 2021

“वायुमण्डल और जलवायु अनुसंधान-मॉडलिंग प्रेक्षण प्रणाली और सेवाएं (एक्रॉस)”

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 24 नवंबर, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्य क्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमण्डलीय समिति ने “वायुमण्डल और जलवायु अनुसंधान-मॉडलिंग प्रेक्षण प्रणाली और सेवाएं (एक्रॉस)" की समग्र योजना को पुनः मंजूरी दे दी है। 
  • एक्रॉस की आठ उप-योजनाओं के साथ कुल 2,135 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से अगले पांच वर्ष यानी वर्ष 2021-2026 के वित्तीय चक्र तक जारी रहेगी। 

विवरण

  • एक्रॉस योजना, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के वायुमण्डलीय विज्ञान कार्यक्रमों से संबंधित है और यह मौसम एवं जलवायु से जुड़ी सेवाओं के विभिन्‍न पहलुओं पर ध्यान देती है। 
  • इनमें से प्रत्येक पहलू को “एक्रॉस” की समग्र योजना के तहत आठ उप-योजनाओं के रूप में शामिल किया गया है ।

पृष्ठभूमि

  • मौसम, जलवायु एवं समुद्र से संबंधित मापदंण्डों का पर्यवेक्षण करना और जलवायु विज्ञान एवं जलवायु सेवाओं को विकसित करना। 
  • सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों के लिए मौसम, जलवायु और खतरे से संबंधित घटनाओं की भविष्यवाणी करने की क्षमता को विकसित करना।
  • उसमें सुधार लाने के लिए अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को अंजाम देना, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के विभिन्‍न अधिदेशों में से एक है। 
  • वैश्विक जलवायु परिवर्तन के कारण बेहद खराब मौसम की बढ़ती घटनाओं और बेहद खराब मौसम से जुड़े जोखिमों ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) को विभिन्‍न लक्ष्य आधारित कार्यक्रम तैयार करने के लिए प्रेरित किया है। 
  • इन कार्यक्रमों को आईएमडी, आईआईटीएम, एनसीएमआरडब्ल्यूएफ और आईएनसीओआईएस के माध्यम से एकीकृत तरीके से लागू किया जाता है। 
  • इसी वजह से, इन गतिविधियों को “एक्रॉस” की समग्र योजना के तहत एक साथ रखा गया है।

कार्यान्वयन की रणनीति और लक्ष्य

  • एक्रॉस योजना के तहत आने वाली आठ उप-योजनाएं अपनी प्रकृति में बहुआयामी हैं और उन्हें मौसम एवं जलवायु के सभी पहलुओं को कवर करने के लिए आईएमडी, आईआईटीएम, एनसीएमआरडब्ल्यूएफ और आईएनसीओआईएस के माध्यम से एकीकृत तरीके से लागू किया जाएगा। 
  • निम्नलिखित आठ योजनाओं के माध्यम से उपरोक्त कार्यों को पूरा करने में इनमें से प्रत्येक संस्थान की एक निर्दिष्ट भूमिका है:

(i)   पोलारिमेट्रिक डॉप्‍लर मौसम रडार (पीडीडब्ल्यूआर) की शुरुआत-आईएमडी
(ii)   पूर्वानुमान प्रणाली का उन्‍नयन-आईएमडी
(iii)  मौसम एवं जलवायु से जुड़ी सेवाएं-आईएमडी
(iv)   वायुमण्डलीय प्रेक्षण नेटवर्क-आईएमडी
(v) मौसम एवं जलवायु की संख्यात्मक मॉडलिंग -एनसीएमआरडब्ल्यूएफ
(vi) मानसून मिशन III- आईआईटीएम/एनसीएमआरडब्ल्यूएफ/ आईएनसीओआईएस/ आईएमडी
(vii) मानसून संवहन, बादल और जलवायु परिवर्तन (एमसी4)-आईआईटीएम/ एनसीएमआरडब्ल्यूएफ/आईएमडी
(viii) उच्‍च प्रदर्शन वाली कंप्यूटिंग प्रणाली (एचपीसीएस)-आईआईटीएम/एनसीएमआरडब्ल्यूएफ
 

कार्यान्वयन 

  • यह योजना पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) द्वारा भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (एनसीएमआरडब्ल्यूएफ), भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) और भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) जैसी इकाइयों के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही है।

रोजगार सृजन की संभावना सहित प्रमुख प्रभाव:

  • यह योजना बेहतर तरीके से मौसम, जलवायु एवं समुद्र के बारे में पूर्वानुमान एवं सेवाएं और अन्य जोखिम संबंधी सेवाएं प्रदान करेगी, ताकि अंतिम उपयोगकर्ता को सार्वजनिक मौसम सेवा, कृषि-मौसम विज्ञान सेवाओं, विमानन सेवाओं, पर्यावरण निगरानी सेवाओं, जल-मौसम विज्ञान सेवाओं, जलवायु सेवाओं, पर्यटन, तीर्थयात्रा, बिजली उत्पादन, जल प्रबंधन, खेल और रोमांच आदि से संबंधित लाभ पर्याप्त रूप से सुनिश्चित हो। 
  • पूर्वानुमान से जुड़ी सूचनाओं को तैयार करने से लेकर इनके वितरण तक की पूरी प्रक्रिया में हर स्तर पर काफी संख्या में श्रमशक्ति की जरूरत होती है, जिससे कई लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।

संकलन-मनीष प्रियदर्शी
 


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