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Post at: Oct 11 2021

दूरसंचार क्षेत्र में सुधार

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 15 सितंबर, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दूरसंचार क्षेत्र में सुधारों को मंजूरी प्रदान की।  
  • इसके द्वारा दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के लिए नौ संरचनात्‍मक सुधारों एवं पांच प्रक्रियागत सुधारों के साथ ही कई राहत उपायों की घोषणा भी की गई।

पृष्ठभूमि

  • कोविड-19 के दौरान दूरसंचार क्षेत्र ने उत्‍कृष्ट प्रदर्शन किया था।
  • इस दौरान डाटा की खपत में वृद्धि हुई, आॅनलाइन शिक्षा का प्रसार हुआ, सोशल मीडिया के माध्यम से आपसी संपर्क बढ़ा तथा आभासी बैठकों में वृद्धि हुई।
  • इसी परिप्रेक्ष्य में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने तथा उपभोक्ताओं को और अधिक विकल्‍प उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इन सुधारों को मंजूरी प्रदान की गई है।

महत्‍वपूर्ण बिंदु
संरचनात्‍मक सुधार

  • समायोजित सकल राजस्व (Adjusted Gross Revenue) का युक्तिकरण : गैर-दूरसंचार राजस्व को एजीआर की रूपरेखा से संभावित आधार पर बाहर रखा जाएगा।
  • बैंक गारंटी को युक्तिसंगत बनाया गया : लाइसेंस शुल्‍क और अन्‍य समान करारोपण के एवज में बैंक गारंटी में भारी कमी (80%) की गई है।
  • देश में विभिन्‍न लाइसेंस सेवा क्षेत्रों में अब अनेक बैंक गारंटी के स्थान पर एक ही बैंक गारंटी पर्याप्‍त होगी।
  • अब आयोजित नीलामी में किस्त भुगतान सुरक्षित रखने के लिए किसी भी बैंक गारंटी की आवश्यकता नहीं होगी।
  • भविष्य की नीलामी में स्पेक्‍ट्रम की अवधि 20 वर्ष से बढ़कर 30 वर्ष कर दी गई है।
  • भविष्य की नीलामी (Future Auction) में प्राप्‍त स्पेक्‍ट्रम के लिए 10 वर्ष बाद स्पेक्‍ट्रम को त्‍यागने (Surrender) की अनुमति दी जाएगी।
  • भविष्य की स्पेक्‍ट्रम नीलामी में प्राप्‍त स्पेक्‍ट्रम के लिए कोई स्पेक्‍ट्रम उपयोग शुल्‍क (Spectrum Usage Charge : SUC) नहीं होगा।
  • स्पेक्‍ट्रम साझेदारी को प्रोत्‍साहित करते हुए स्पेक्‍ट्रम साझेदारी के लिए, स्पेक्‍ट्रम उपयोग शुल्‍क (SUC) में 0.5 प्रतिशत अतिरिक्त छूट दी गई है।
  • दूरसंचार क्षेत्र में निवेश को प्रोत्‍साहित करते हुए स्वचालित मार्ग के माध्यम से 100 प्रतिशत प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है।

प्रक्रियागत सुधार

  • स्पेक्‍ट्रम की नीलामी सामान्‍यत: प्रत्‍येक वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही में आयोजित की जाएगी।
  • बेतार (Wireless) उपकरणों के आयात के लिए 1953 की सीमा शुल्‍क अधिसूचना के तहत लाइसेंस की कठिन एवं बोझिल आवश्यकताओं को हटा दिया गया है। इसके लिए अब स्वघोषणा (Self Declaration) ही पर्याप्‍त होगी।
  • ऐप आधारित स्वघोषित केवाईसी (KYC : Know Your Customers) की अनुमति प्रदान की गई है। ई. केवाईसी (e-KYC) की दर को संशोधित करके 1 रुपये कर दिया गया है। 
    • प्रीपेड से पोस्टपेड (Prepaid to Post-paid) एवं पोस्टपेड से प्रीपेड (Post-Paid to Prepaid) में स्थानांतरण के लिए नए केवाईसी (KYC) की आवश्यकता नहीं होगी
    • कागजी ग्राहक अधिग्रहण फॉर्म (CAF) को डेटा के डिजिटल स्टोरेज से बदल दिया जाएगा।
    • सीएएफ (CAF) गोदाम लेखापरीक्षा (Warehouse Audit) से मुक्त होंगे।
      दूरसंचार टाॅवरों की स्थापना के लिए दी जाने वाली मंजूरी की प्रक्रिया को सरल कर दिया गया है।
    • दूरसंचार विभाग का पोर्टल अब स्वघोषणा के आधार पर आवेदन स्वीकार करेगा
      अन्‍य एजेंसियों के पोर्टल (जैसे- नागरिक उड्डयन विभाग) को दूरसंचार विभाग के पोर्टल से जोड़ा जाएगा। 

दूरसंचार कंपनियों की पूंजी की तरलता संबंधी आवश्यकताओं के लिए राहत उपाय

  • एजीआर (AGR) पर सर्वोच्‍च न्‍यायालय के फैसले से उत्‍पन्‍न होने वाली देय राशि के वार्षिक भुगतान में चार वर्ष तक की छूट/मोहलत प्रदान की गई है।
  • पिछली नीलामियों (वर्ष 2021 की नीलामी को छोड़कर) में खरीदे गए स्पेक्‍ट्रम के देय भुगतान में 4 वर्ष की छूट प्रदान की गई है।
  • दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को भुगतान के उक्त स्थगन (due to the said deferment) के कारण उत्‍पन्‍न होने वाली ब्याज राशि को इक्‍विटी (equity) के माध्यम से भुगतान करने का विकल्‍प दिया जाएगा।
  • सरकार के विकल्‍प पर अधिस्थगन/स्थगन (Moratorium/Deferment) अवधि के अंत में उक्त स्थगित भुगतान से संबंधित देय राशि को इक्‍विटी (equity) में परिवर्तित किया जा सकेगा, जिसके लिए वित्त मंत्रालय द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

लाभ 

  • मौजूदा रोजगार बचेंगे एवं नए रोजगार का सृजन होगा।
  • दूरसंचार क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा।
  • उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा होगी।
  • दूरसंचार कंपनियों की पूंजी की तरलता में वृद्धि होगी।
  • बोझिल नियमों से छुटकारा मिलेगा।

दूरसंचार क्षेत्र की चुनौतियां

  • अनुचित प्रतिस्पर्धा
  • आधारभूत संरचना की समस्या
  • टैरिफ की वर्तमान प्रणाली
  • सरकार एवं सेवा प्रदाताओं के मध्य विवाद (जैसे-एजीआर विवाद, वोडाफोन के साथ विवाद)

 


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