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Post at: Oct 09 2021

कार्बी आंगलोंग समझौता

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 4 सितंबर, 2021 को गृह मंत्री अमित शाह, असम के मुख्यमंत्री, कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद (Karbi Anglong Autonomous Council : KAAC) के प्रतिनिधियों एवं पांच उग्रवादी समूहों के प्रतिनिधियों के बीच कार्बी आंगलोंग समझौता संपन्‍न हुआ।

पृष्ठभूमि

  • कार्बी आंगलोंग मध्य असम में स्थित एक बड़ा जिला है तथा बृहद नृजातीय तथा आदिवासी समूहों यथा कार्बी, डिमासा, बोडो, कूकी, हमार, तिवा, गारो, मान, रेंगमा, नागा आदि का मिलन बिंदु है। इन आदिवासी समूहों में कार्बी का प्रमुख स्थान है, जो कि अपने विद्रोही गुटों के माध्यम से (1980 के दशक के उत्तरार्द्ध से ही) अपने लिए एक अलग राज्‍य की मांग कर रहा है।

स्मरणीय तथ्य
वर्ता में शामिल महत्‍वपूर्ण प्रतिनिधि (गुट)

  • पीपल्‍स (people's) डेमोक्रेटिक काउंसिल ऑफ कार्बी लोंगरी (PDCK)
  • कार्बी लोंगरी नॉर्थ चाचर हिल्‍स लिबरेशन फ्रंट (KLNLF)
  • कार्बी पीपल्‍स लिबरेशन टाइगर्स (KPLT)
  • कूकी लिबरेशन फ्रंट (KLF)
  • यूनाइटेड पीपल्‍स लिबरेशन आर्मी (UPLA)
  • नई दिल्‍ली में हस्ताक्षरित इस समझौते के साथ ही असम की क्षेत्रीय सुरक्षा, विकास एवं अखंडता सुनिश्चित होगी तथा ‘उग्रवाद मुक्त समृद्ध उत्तर-पूर्व’ की संकल्‍पना भी साकार होगी।

शांति स्थापना हेतु किए गए पूर्व प्रयास

  • केंद्र तथा राज्‍य सरकार विद्रोही गुटों के साथ समझौते तथा समस्या के समाधान हेतु लंबे समय से प्रयासरत थी।
  • इसी क्रम में शांति हेतु सहमति-पत्रों (MoU) पर दो बार क्रमश: 1995 तथा 2011 में तीनों पक्षों (केंद्र, राज्‍य, विद्रोही गुट) के बीच हस्ताक्षरित किए गए थे, परंतु व्याप्‍त मतभेदों तथा उदासीनता के कारण इसका प्रतिफल नहीं मिल पाया।
  • पुन: भारत सरकार ने 23 फरवरी, 2021 को कार्बी के प्रमुख उग्रवादी समूहों के हथियार डालने तथा वार्ता करने को राजी कर लिया।

समझौते के प्रमुख बिंदु

  • इस समझौते के तहत 5 प्रमुख उग्रवादी समूहों के 1000 से ज्‍यादा सशस्त्र उग्रवादियों ने हथियार डाल दिए।
  • कार्बी क्षेत्र के विकास के लिए अगले 5 वर्षों में 1000 करोड़ रुपये केंद्र तथा राज्‍य सरकार द्वारा आवंटित किए जाएंगे।
  • KAAC के अधिकार क्षेत्र के बाहर रहने वाले कार्बी लोगों के विकास के लिए असम सरकार द्वारा कार्बी कल्‍याण परिषद का गठन किया जाएगा।
  • असम की क्षेत्रीय और प्रशासनिक अखंडता को प्रभावित किए बिना, कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद को अधिक-से अधिक स्वायत्तता प्रदान करना।
  • कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद के संसाधनों को पूरा करने के लिए राज्‍य की संचित नीधि में संशोधन किया जाएगा।
  • कार्बी आंगलोंग क्षेत्र की सांस्कृतिक एवं भाषाई पहचान को सुरक्षा तथा संरक्षण प्रदान किया जाएगा।
  • उग्रवादियों के पुनर्वास का प्रावधान भी समझौते में शामिल है।

लाभ

  • इस समझौते से उत्तर-पूर्वी राज्‍यों में शांति एवं सुरक्षा की स्थिति सुदृढ़ होगी।
  • उत्तर-पूर्व के राज्‍यों में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा जो यहां भी भाषा, नृत्‍य संगीत एवं संस्कृति के प्रसार में सहायक होगा।
  • इस क्षेत्र में उद्योग एवं संबंधित व्यवसाय तेजी से बढ़ेंगे जिससे देश की अर्थव्यवस्था में उत्तर-पूर्व के योगदान में वृद्धि होगी।

उत्तर-पूर्व से जुड़े अन्‍य महत्‍वपूर्ण समझौते

  • नेशनल लिबटेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (ONLFT) समझौत 10 अगस्त, 2019।
  • समुदाय के त्रिपुरा में स्थायी बसाव हेतु जनवरी, 2020 में ब्रू एकॉर्ड।
  • बोडो शांति सहमति 27 जनवरी, 2020 बोडो समस्या के समाधान हेतु।

    संकलन - मनीष प्रियदर्शी
 


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