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Post at: Oct 07 2021

विश्व मौसम संगठन (WMO) की रिपोर्ट

वर्तमान परिप्रेक्ष्य 

  • 1 सितंबर, 2021 को विश्व मौसम संगठन (World Meteorological Organisation)  द्वारा ‘एटलस ऑफ मॉर्टेलिटी एंड इकोनॉमिक लॉसेस फ्रॉम वेदर, क्‍लाइमेट एंड वाटर एक्‍स्ट्रीम  फ्रॉम 1970-2019’ (Atlas of Mortality and Economic Losses from Weather, Climate and Water Extremes, from 1970-2019) शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 50 वर्षों मंे मौसम संबंधी आपदाओं के कारण 20 लाख लोगों की मौत हुई है।
  • यह रिपोर्ट (Atlas) 1970 से 2019 के बीच 50 वर्ष की अवधि में ईएम-डीएटी (EM-DAT: Emergency Event Database) में दर्ज आपदाओं का सांख्यिकीय विश्लेषण करती है।
  • यह रिपोर्ट मौसम, जलवायु तथा जल जनित आपदाओं के वितरण और प्रभावों का सटीक वर्णन करती है।
  • यह रिपोर्ट विशेष रूप से मौसम, जलवायु और आपदाओं के प्रभाव को उजागर करने के लिए आपदाओं को कई प्रकारों एवं उपप्रकारों में विभाजित करती है।

प्रमुख निष्कर्ष 

  • वर्ष 1970-2019 के मध्य जलवायु परिवर्तन द्वारा संचालित बाढ़ एवं गर्मी जैसी आपदाओं में 5 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
  • इस दौरान 11072 मौसम जलवायु एवं जल जनित आपदाओं की घटनाए रिकॉर्ड की गई।
  • जिससे 2.06 मिलियन मौतें एवं 3.64 ट्रिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ।
  •  इस प्रकार पिछले 50 वर्षों  में मौसम, जलवायु एवं जल जनित घटित आपदाएं सभी प्रकार की आपदाओं का 50 प्रतिशत, आपदाओं से होने वाली कुल मौतों का 45 प्रतिशत तथा आपदा से होने वाले कुल आर्थिक नुकसान का 74 प्रतिशत है।
  • इन मौतों में 91 प्रतिशत से अधिक मौतें विकासशील देशों में हुई हैं।
  • विश्व मौसम संगठन (WMO) के अनुसार, रोजाना औसतन 115 मृत्यु एवं 202 मिलियन अमेरिकी डॉलर का आर्थिक नुकसान इन आपदाओं की वजह से हुआ है
  • 1970 के दशक तुलना में की वर्ष 2010 में आर्थिक नुकसान 7 गुना बढ़ा है। 
  • पिछले 50 वर्षों में सबसे ज्यादा मृत्यु  सूखे के कारण (650000) हुई है।
  • तूफान की वजह से 577232 मौतें एवं बाढ़ की वजह से 58700 मृत्यु हुई है।
  • रिपोर्ट में पाया गया है कि आपदाओं और चरम जलवायु घटनाओं की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन मौतों की संख्या में लगभग 3 गुना कमी दर्ज की गई है।
  • पूर्व चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन में सुधार के कारण मृत्यु की संख्या में कमी आई है।
  • वर्ष 1970 में प्रतिदशक मृत्यु की संख्या 50000 थी, जो वर्ष 2010 में घटकर 20000 प्रति दशक हो गई।
  •  विश्व में 44 प्रतिशत आपदाओं का संबंध बाढ़ तथा 17 प्रतिशत आपदाओं का संबंध उष्णकटिबंधीय चक्रवात से है।

एशिया

  • वर्ष 1970-2019 के मध्य एशिया में 3454 आपदाएं रिकॉर्ड की गईं।
  • जिसके फलस्वरूप 975622 मौतें एवं 1.2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ।
  •  मौसम जलवायु एवं जल जनित कुल घटित आपदाओं का 31 प्रतिशत एशिया से संबंधित है।
  • आपदाओं से कुल मृत्यु का 47 प्रतिशत एवं कुल आर्थिक नुकसान का 31 प्रतिशत एशिया से संबंधित है।
  •  बाढ़ (45 प्रतिशत) एवं तूफान (36 प्रतिशत) एशिया में आने वाली सबसे बड़ी आपदाएं हैं।
  •  इस क्षेत्र में कुल मौतों में 72 प्रतिशत तूफानों के कारण हुई हैं।

भारत 

  •  पिछले 50 वर्षों में भारत में 550 से अधिक आपदाएं रिकॉर्ड की गईं, जिससे 134037 लोगों की मृत्यु हुई।
  • वर्ष 1971, 1977 एवं 1991 के तूफानों की वजह से 10000 लोगों की मृत्यु हुई।
  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात की वजह भारत में 46784 लोगों की मृत्यु हुई है, यह उष्णकटिबंधीय चक्रवात से मरने वालों की संख्या का मात्र 6 प्रतिशत है। (1970-2019 के मध्य)
  • भारत ने पिछले दशक में आपदा प्रबंधन एवं चेतावनी प्रणाली में सुधार कर चक्रवात से होने वाली मौतों में कमी लाई है।
  • भारत को वर्ष 2014 में बाढ़ की वजह से 16.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था।

कारण

जलवायु परिवर्तन 

  • जलवायु परिवर्तन की वजह से तापमान में वृद्धि हुई, जिससे ग्‍लेशियर पिघल रहा है तथा तटीय क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ा है।
  •  वायुमंडल में अधिक जलवाष्प ने अत्यधिक वर्षा एवं बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है।
  •  गर्म होते महासागरों ने तीव्र उष्णकटिबंधीय तूफानों की आवृत्ति बढ़ा दी है।
  •  जिससे दुनिया के कई निचले हिस्सों, डेल्टाई एवं द्वीपों की भेद्यता बढ़ गई है।
  • सेंडाई फ्रेमवर्क (2015) की आपदा विफलता
  •  यह रिपोर्ट बताती है कि सेंडाई फ्रेमवर्क, 2015 में निर्धारित आपदा नुकसान को कम करने में विफल रही है।

अनुशंसाएं

  • अनुकूलन क्षमता की आवश्यकता 
  • डब्‍ल्‍यू. एम.ओ. (WMO) के 193 सदस्यों में से केवल आधे देशों के पास बहु-खतरा पूर्व चेतावनी प्रणाली मौजूद है।
  • विकासशील एवं अल्पविकसित देशों में पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने की अत्यधिक आवश्यकता है।
  • व्यापक आपदा जोखिम प्रबंधन 
  • व्यापक आपदा जोखिम प्रबंधन में अधिक निवेश की आवश्यकता है।
  • राष्ट्रीय एवं स्थानीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों में एकीकरण एवं समन्वय की आवश्यकता है।
  •  जोखिम समीक्षा
  • देशों को बदलते मौसम पर विचार करने के लिए जोखिम एवं भेद्यता की समीक्षा करनी चाहिए। ताकि आपदाओं की तीव्रता का तुलनात्मक अध्ययन हो सके। (पूर्व की आपदाएं एवं वर्तमान की आपदाएं के बीच)
  • सक्रिय नीतियां
  • सूखे जैसे मंद गति से प्रारंभ होने वाली आपदाओं पर एकीकृत एवं सक्रिय नीतियों के विकास पर बल देने की आवश्यकता है

भारत द्वारा आपदा प्रबंधन पर की गई पहलें

  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (2006)
  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (2016)
  • आपदा रोधी अवसंरचना के लिए गठबंधन (2019

विश्व मौसम संगठन (WMO)

  • यह संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी है
  • स्थापना-23 मार्च, 1950
  •  सदस्य-193
  • मुख्यालय- जेनेवा, स्विट्जरलैंड
  • महासचिव-पटेरी तालास

    संकलन- अशोक कुमार तिवारी
 


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