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Post at: Oct 05 2021

शाकनाशी-सहिष्णु और गैर-जीएम चावल

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 28 सितंबर, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के पहले गैर-जीएम (आनुवंशिक रूप से संशोधित) शाकनाशी-सहिष्णु (Herbicide - Tolerant) चावल की दो किस्मों, पूसा बासमती 1979 और पूसा बासमती 1985 का उद््घाटन किया।
  • चावल की इन किस्मों का विकास भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा किया गया है। 
  • इन किस्मों को पारंपरिक रोपाई के स्थान पर सीधे बोया जा सकता है।
  • ये किस्में रोपाई की तुलना में पानी एवं श्रम की बचत करेंगी।

महत्‍वपूर्ण बिंदु

  • इन किस्मों में उत्‍परिवर्तित एसिटोलैक्‍टेट सिंथेज जीन [Acetalactate Synthase Gene (ALS)] शामिल है।
  • जिससे किसानों को खर-पतवारों को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक स्पेक्‍ट्रम शाकनाशी इमाजेथापायर का छिड़काव करना संभव हो जाता है।
  • एसिटोलैक्‍टेट सिंथेज जीन : एक एंजाइम (प्रोटीन) कोड है, जो फसल की वृद्धि एवं विकास के लिए अमीनो अम्ल का संश्लेषण करता है।
  • सामान्‍य चावल के पौधों पर छिड़काव किया जाने वाला शाकनाशी अमीनो अम्ल के उत्‍पादन को बाधित करता है।
  • इमाजेथापायर, चौड़े पत्ती, घास और खर-पतवारों के विरुद्ध प्रभावी होता है।
  • सामान्‍य धान की किस्मों पर इमाजेथापायार का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है, क्‍योंकि ये फसल  (धान) एवं खर-पतवार के मध्य अंतर नहीं कर पाता है।
  • पूसा बासमती 1979 और पूसा बासमती 1985 का विकास पूसा 1121 और 1509 को क्रमश: ‘रॉबिन’ के साथ संकरण कराकर विकसित किया गया है।
  • इस प्रक्रिया में किसी विदेशी जीन को शामिल नहीं किया गया है।
  • शाकहारी-सहिष्णु का गुण लाने के लिए उत्‍परिवर्तन प्रजनन का सहारा लिया गया है।

लाभ

  • धान की नर्सरी तैयार करने की आवश्यकता समाप्‍त होगी।
  • जल एवं श्रम की बचत होगी।
  • खर-पतवार नाशी के छिड़काव की आवश्यकता नहीं होगी।
  • स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी सुरक्षित है।
  • क्‍योंकि इस किस्म को जल की कम आवश्यकता होती है, इसलिए मीथेन उत्‍सर्जन कम होगा।
  • रोपाई की आवश्यकता न होने के कारण मिट्टी का क्षरण कम होगा।

निष्कर्ष

  • निष्कषर्त: हम कह सकते हैं कि विकसित की गई नई किस्में भारतीय कृषि के लिए महत्‍वपूर्ण सिद्ध होंगी। इससे कृषि उत्‍पादों (धान) का उत्‍पादन बढ़ेगा तथा लागत कम होगी, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।

संकलन - अशोक कुमार तिवारी
 


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