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वैश्विक वायु गुणवत्ता दिशा-निर्देश (डब्ल्‍यू.एच.ओ.)

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 22 सितंबर, 2021 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वायु गुणवत्ता दिशा-निर्देश जारी किए।
  • इस दिशा-निर्देशों के तहत 6 प्रदूषण श्रेणियों (ओजोन, नाइट्रोजन डाइऑक्‍साइड, सल्‍फर डाइऑक्‍साइड, कार्बन मोनोऑक्‍साइड, पीएम 2.5 एवं पीएम 10) के लिए और अधिक कठोर मानक की घोषणा की गई है।
  • नवीनतम दिशा-निर्देश पहले की तुलना में प्रदूषण की कम सांद्रता के बावजूद भी मानव स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण से होने वाले नुकसान के स्पष्ट प्रमाण प्रदान करते हैं।
  • ये दिशा-निर्देश प्रमुख वायु प्रदूषकों के स्तर को कम करके, आबादी के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए नए वायु गुणवत्ता मानकों की सिफारिश करते हैं।
  • 2005 के बाद से विश्व स्वास्थ्य संगठन का यह पहला अद्यतन दिशा-निर्देश है।

आवश्यकता

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के पिछले (वर्ष 2005) दिशा-निर्देश के बाद इस बात के प्रमाण में उल्‍लेखनीय वृद्धि हुई है कि वायु प्रदूषण स्वास्थ्य के विभिन्‍न पहलुओं को प्रभावित किया है।
  • वर्ष 2019 में, दुनिया की 99 प्रतिशत आबादी उन जगहों पर निवास कर रही थी, जहां की वायु गुणवत्ता डब्ल्‍यू.एच.ओ. के मानक को पूर्ण नहीं करती।
  • वर्ष 2016 में वायु प्रदूषण (वाह्य वायु प्रदूषण) के कारण दुनिया में 4.2 मिलियन लोगों की समय से पूर्व मृत्‍यु हो गई।
  • इन 4.2 मिलियन लोगों में 91 प्रतिशत का संबंध निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों से है।
  • इसमें दक्षिण-पूर्व एशिया एवं पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र के लोगों की संख्या अधिक है।
  • बाहरी वायु प्रदूषण के अलावा, आंतरिक वायु प्रदूषण (घर के अंदर का धुआं) लगभग 3 बिलियन लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम का कारण है।
  • यह स्वास्थ्य जोखिम जीवाश्म ईंधनों के प्रयोग से उत्‍पन्‍न होता है।

नए दिशा-निर्देश

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के नए दिशा-निर्देश उन 6 प्रदूषकों के लिए वायु गुणवत्ता के स्तर की अनुशंसा करते हैं, जिनके कारण स्वास्थ्य पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है।

WHO के नए मानक स्तर

  • पार्टिकुलेट्स मैटर 2.5 (PM 2.5) का वार्षिक औसत 5ug/M3
  • पार्टिकुलेट्स मैटर (PM 10) का वार्षिक औसत 15ug/M3
  • नाइट्रोजन डाइऑक्‍साइड (NO2) का वार्षिक औसत 10ug/M3
  • सल्‍फर डाइआॅक्‍साइड (SO2) दैनिक औसत 40ug/M3
  • कार्बन मोनोआॅक्‍साइड (CO) का दैनिक औसत 4mg/M3

भारत में वायु प्रदूषण की स्थिति

  • भारत विश्व के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में से एक है, जिसमें पदूषण स्तर अनुशंसित स्तरों से कई गुना अधिक है।
  • अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन ग्रीन पीस के अनुसार, वर्ष 2020 में नई दिल्‍ली में PM 2.5 की औसत सांद्रता प्रदूषण के अनुशंसित स्तरों से लगभग 17 गुना अधिक है।
     
  • मुंबई में प्रदूषण का स्तर आठ गुना अधिक, कोलकाता में नौ गुना और चेन्‍नई में पांच गुना अधिक था।
  • ग्रीन पीस की रिपोर्ट (2020) के अनुसार, राष्ट्रीय स्वच्‍छ वायु कार्यक्रम में सम्मिलित 102 शहरों के अलावा 200 से अधिक भारतीय शहर अत्‍यधिक प्रदूषित हैं।
  • भारत में वायु की गुणवत्ता के स्तर को मापने के लिए राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (National Ambient Air Quality Standards - NAAQS) निर्धारित किया है-

 

  • राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS) डब्ल्‍यू.एच.ओ. के मानकों को पूर्ण नहीं करते हैं।
  • हालांकि डब्ल्‍यू.एच.ओ. (WHO) के दिशा-निर्देश बाध्यकारी नहीं है।

वायु प्रदूषण का स्वाथ्य पर प्रभाव

  • फेफड़ों संबंधी बीमारियों में वृद्धि।
  • श्वसन प्रणाली में संक्रमण, अस्थमा।
  • वयस्कों में हृदय रोग एव हृदयघात में वृद्धि।
  • तंत्रिका तंत्र का कमजोर होना।
  • मधुमेह में वृद्धि

अनुशंसा

  • इस दिशा-निर्देश के अंतर्गत परिवहन, शहरी नियोजन, ऊर्जा उत्‍पादन और औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण कम करने के लिए कुछ सुझाव भी दिए गए हैं।

उद्योग

  • उत्‍सर्जन कम करने वाली स्वच्‍छ प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना।
  • शहरी एवं कृषि अपशिष्ट का बेहतर प्रबंधन।

ऊर्जा

  • भोजन पकाने के लिए स्वच्‍छ एवं किफायती घरेलू ऊर्जा सुनिश्चित करना।

परिवहन 

  • कम उत्‍सर्जन करने वाले परिवहन साधनों की तरफ रुख करना।
  • साइकिल एवं पर्यावरण मैत्री साधनों को अपनाना।

शहरी नियोजन 

  • इमारतों की ऊर्जा दक्षता में सुधार करना।
  • शहरों को हरा-भरा एवं ऊर्जा कुशल बनाना।

ऊर्जा उत्‍पादन

  • नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना।
  • मिनी ग्रिड एवं रूफटॉप सौर्य ऊर्जा उत्‍पादन को बढ़ावा।
  • नगरपालिका और कृषि अपशिष्ट प्रबंधन 
  • अपशिष्ट में कमी एवं अपशिष्ट पृथक्‍करण की रणनीतियां बताना।
  • पुनर्उपयोग, पुनर्चक्रण एवं अपशिष्ट का पुनर्संसाधन।

संकलन - अशोक कुमार तिवारी
 


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