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किशोर न्याय (बच्‍चों की देखभाल एवं संरक्षण) संशोधन अधिनियम

वर्तमन परिप्रेक्ष्य

  • 7 अगस्त, 2021 को किशोर न्याय (बच्‍चों की देखभाल एवं संरक्षण) संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त हो गई और यह अधिनियमित हो गया।
  • ध्यातव्य है कि 28 जुलाई, 2021 को संसद ने किशोर न्याय (बच्‍चों की देखभाल एवं संरक्षण) संशोधन विधेयक , [Juvenile Justice (Care and Protection of Children]Amendment Bill )2021 पारित किया।
    • 24 मार्च, 2021 को लोक सभा ने इस विधेयक को पारित किया था।
    • यह अधिनियम किशोर न्याय अधिनियम, 2015 का स्थान लेगा।
    • गौरतलब है कि ये संसोधन वर्ष 2018-19 में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (National Commission for Production of Child Rights : MCPCR) की रिपोर्ट के आधार पर किए गए हैं।

पृष्ठभूमि

  • किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के अनुसार, 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को किशोर माना जाता है।
  • भारत में किशोर न्याय अधिनियम बच्‍चों की देखभाल एवं सुरक्षा को सुनिश्चित करता है।
  • ये अधिनियम बच्‍चों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय , (1989), बच्‍चों के संरक्षण पर हेग अभिसमय (1993) के संबंध और अंतर-देशीय दत्तक ग्रहण (1993) के संबंध में सहयोग और अन्य संबंधित अंतरराष्ट्रीय उपकरणों के एक हस्ताक्षरकर्ता के तौर पर भारत की प्रतिबद्धता को पूर्ण करता है।

प्रमुख प्रावधान

  • किशोर न्याय अधिनियम, 2021 जिन प्रमुख प्रावधानों पर चर्चा करता है, वो निम्नलिखित हैं-
  • बच्‍चे को गोद लेना एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें बच्‍चे और दत्तक (एडप्‍टिव) माता-पिता के बीच एक स्थायी कानून संबंध कायम होता है।
  • जुलाई, 2018 तक विभिन्‍न अदालतों में एडाॅप्शन के 629 मामले लंबित थे।
    • एडाॅप्शन की प्रक्रिया में तेजी लाने हेतु विधेयक जिला मजिस्ट्रेट को इस संबंध में आदेश देने की शक्ति हस्तांतरित करता है।
  • मानव संसाधन विकास संबंधी स्थायी समिति (2015) के अनुसार कई राज्यों में एक्ट के अंतर्गत वैधानिक निकाय मौजूद नहीं हैं।
    • वर्ष 2019 में 35 में से सिर्फ 17 राज्य /केंद्रशासित प्रदेशों के सभी जिलों में अधिनियम के अंतर्गत अपेक्षित बुनियादी संरचानाएं और निकाय मौजूद थे।
  • किशोर न्याय (बच्‍चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन बिल, 2021 जैसा ही यह बिल वर्ष 2018 में पेश किया गया था।
    • इसमें जिला मजिस्ट्रेट को एडाॅप्शन के आदेश जारी करने का अधिकार दिया गया था।
    • परंतु 16वीं लोक सभा के विघटित होने के साथ यह विधेयक लैप्स हो गया था।
  • वर्ष 2020 में सर्वोच्‍च न्यायालय ‘‘इस अधिनियम (किशोर न्याय अधिनियम, 2015) में उन अपराधों से जुड़े प्रावधान शामिल नहीं है, जिनमें अधिकतम सजा सात वर्ष से अधिक की कैद है, लेकिन कोई न्यूनतम सजा नहीं है,या न्यूनतम सजा सात वर्ष से कम की कैद है।’’
    • अदालत ने आदेश दिया कि इन अपराधों को भी गंभीर अपराधों की श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए।

 

मुख्य प्रावधान

बाल कल्‍याण कमेटी के संबंध में प्रावधान

  • अधिनियम के तहत, राज्य प्रत्येक जिले में एक या एक से अधिक बाल कल्याण कमेटी (Child Welfare Committee: CWC) बनाएंगे।
  • विधेयक सीडब्ल्यूसी के सदस्यों की नियुक्ति के लिए अतिरक्त मानदंडों  को निर्दिष्ट करता है।

अधिनियम क्रियान्वयन संबंधित प्रावधान 

  • अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट सहित जिला मजिस्ट्रेट को जे. जे. अधिनियम (JJ Act) की धारा 61 के तहत गोद लेने के आदेश जारी करने के लिए करना शामिल हैं।
  • जिलाधिकारियों को इसके सुचारू कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के साथ-साथ संकट की स्थिति में बच्‍चों के पक्ष में समन्वित प्रयास करने हेतु और अधिकार दिए गए हैं।
  • किसी भी बाल देखभाल संस्थान को जिला मजिस्ट्रेट की सिफारिशों पर विचार के बाद ही पंजीकृत किया जाएगा।
  • जिला मजिस्ट्रेट  स्वतंत्र रूप से जिला बाल संरक्षण इकाइयों, बाल कल्याण समितियों, किशोर न्याय बोर्डों विशेष किशोर पुलिस इकाइयों, आदि के कामकाज का मूल्यांकन करेंगे।

विभिन्‍न देशों के किशोर न्याय कानूनों के बीच तुलना

संकलन- आदित्य भारद्वाज


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