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Post at: Sep 28 2021

प्रथम डुगोंग संरक्षण रिजर्व

वर्तमान संदर्भ

  • 3 सितंबर, 2021 को तमिलनाडु सरकार ने देश में पहले डुगोंग संरक्षण रिजर्व के स्थापना की घोषणा की।
  • इस डुगोंग संरक्षण केंद्र का क्षेत्रफल (500 वर्ग किमी.) आदिरामपट्टिनम से अमापट्टिनम तक (पाक की खाडी तथा मन्‍नार की खाड़ी के मरीन क्षेत्र में) विस्तारित रहेगा।

पृष्ठभूमि

  • समुद्र जीवविज्ञानी तथा संरक्षणवादी लंबे समय से एक डुगोंग रिजर्व की मांग कर रहे थे, क्‍योंकि भारतीय जल क्षेत्र में डुगोंग की आबादी अप्रत्‍याशित रूप से गिरती जा रही थी।

कारण 

  • डुगोंग की विलुप्‍ति के प्रमुख कारणों में (वन्‍यजीव संस्थान, भारत) के अनुसार-

 

  • भारतीय वन्‍यजीव संरक्षण संस्था के अनुसार, डुगोंग भारत में, मन्‍नार की खाड़ी, पाक की खाड़ी, कच्‍छ की खाड़ी तथा अंडमान निकोबार में पाए जाते हैं।
  • भारतीय वन्‍यजीव संस्थान के अनुसार, वर्ष 2010 में भारतीय जल क्षेत्र में डुगोंग की संख्या 250 थी जो कि अब 150 के करीब पहुंच चुकी।
  • डुगोंग अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) द्वारा जारी की जाने वाली लाल सूची में सुभेद्य (Vulnerable) श्रेणी के अंतर्गत शामिल है।
  • मानवीय अतिक्रमण तथा अार्थिक क्रिया कलापों ने डुगोंग के प्राकृतिक आवास, प्रजनन तथा खाद्य प्रणाली (समुद्री घास) को प्रभावित करने का कार्य किया है। 
  • डुगोंग तमिलनाडु में पाक खाड़ी तथा मन्‍नार की खाड़ी में पाए जाते हैं, जो दुनिया में डुगोंग के लिए अंतिम प्राकृतिक आवासों में से एक है।

महत्‍वपूर्ण तथ्य 

  • डुगोंग एक स्तनपायी जलीय जीव है, इसे समुद्री गाय (Seacow) के रूप में भी जाना जाता है।
  • इसका प्रमुख आहार समुद्री घास है जो कि समुद्री तटों से लगे क्षेत्रों में विस्तारित होती है। यही इसके आसान शिकार का प्रमुख कारण भी बनता है।

 

डुगोंग एक नजर में

संकलन - प्रवेश तिवारी
 


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