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Post at: Sep 28 2021

भारत-फिनलैंड वर्चुअल शिखर सहयोग

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 16 मार्च, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं फिनलैण्ड गणराज्य के समकक्ष सना मारिन ने एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन में भाग लिया। 
  • इस सम्मेलन के माध्यम से दोनों देशों के प्रमुखों ने द्विपक्षीय मुद्दों के साथ-साथ पारस्परिक क्षेत्रीय हित तथा वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत रूप से चर्चा की।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने िफनलैण्ड की समकक्ष मारिन को अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (15A)  और आपदा प्रतिरोधक आधारभूत संरचना गठबंधन (CDRI) में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।

पृष्ठभूमि

  • भारत एक वैश्विक बाजार है तथा विगत कुछ वर्षों में इसके आर्थिक एवं वैश्विक परिदृश्य में तेजी आई है।
  • हालांकि भारत एवं फिनलैण्ड के मध्य राजनयिक संबंध वर्ष 1949 मंे ही स्थापित किए गए थे।
  • इसके बाद ह्यूगो वल्वने भारत का दौरा करने वाले फिनलैण्ड के पहले राजदूत बने थे।
  • हाल के वर्षों के दोनों देशों के मध्य राजनीतिक और आर्थिक सहयोग के समेकन को संयुक्‍त पहल और प्रतिनिधिमण्डलों के सक्रिय आदान-प्रदान में वृद्धि हुई है।
  • भारत में फिनलैण्ड का दूतावास नई दिल्‍ली में स्थित है तथा चेन्‍नई, बैंगलोर, मुंबई और कोलकाता में वाणिज्य दूतावासों की स्थापना की गई है

भारत-फिनलैण्ड सहयोग

  • दोनों देशों के संबंध, स्वतंत्रता, लोकतंत्र और नियमानुसार अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के साझा मूल्‍यों पर आधारित हैं। 
  • दोनों देश शिक्षा, व्यापार, निवेश, विज्ञान और प्राद्यौगिकी, नवाचार, अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्रों में सहयोग करते है।
  • दोनों पक्षों के मध्य सामाजिक चुनौतियाें का सामना करने हेतु आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का उपयोग करते हैं तथा क्‍वांटम कंम्प्‍यूटर के विकास के लिए सहमति भी व्यक्त की है।
  • भारत में 100 से अधिक फिनिश कंपनियां विभिन्‍न क्षेत्रों में कार्यरत है, तथा भारत की लगभग 30 कंपनियां फिनलैंड में सेवा प्रदान करती है।

डिजिटल साझेदारी

  • भारत और फिनलैंड के संबंध में डिजिटल साझेदारी पहले से महत्‍वपूर्ण रही है।
  • चर्चा के अंतर्गत भविष्य में होने वाली डिजिटल साझेदारी में तीन सहयोगी क्षेत्रों को बढ़ावा देने का निर्णयन हुआ।
  1. भविष्य में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के अंतर्गत क्‍वांटम प्रौद्योगिकी एवं कम्प्‍यूटिंग को बढ़ावा दिया जाएगा।
  2. भविष्य की मोबाइल प्रौद्योगिकियां , को 6 जी अनुसंधान और विकास केंद्रित बनाया जाएगा।
  3. भविष्य में शिक्षा के अंतर्गत शिक्षण और अधिगम में डिजिटलीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • उपरोक्‍त सभी प्रमुख क्षेत्रों में सुधार के लिए कृत्रिम बुद्धि (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), साइबर सुरक्षा, एवं ब्लॉक चेन प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाएगा।
  • इस साझेदारी में दोनों देशों की कंपनिया एवं शिक्षण संस्थाएं आपसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु अपने सामर्थ्य अनुसार लाभान्‍वित हो सकेगी।
  • इससे दोनो देशो के मध्य संस्कृति, शिक्षा, एवं पर्यटन के क्षेत्र में महत्‍वपूर्ण बदलाव होगे।

ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी

  • दोनो देशों के लिए ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना स्वागत योग्य कदम है।
  • चर्चा में सहमति व्यक्त की गयी कि ऊर्जा से संबंधित कम्पनियो, मंत्रालयों में नवाचार के लिए प्रोत्‍साहित किया जाएगा।
  • ये निकाय गैस आधारित अर्थव्यवस्था, जैव ईंधन, नवीकरणीय ऊर्जा, अपशिष्ट से ऊर्जा और हाइड्रोजन जैसे उभरते ईंधन के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को सहयोग प्रदान करेगी।

पर्यावरण के क्षेत्र में साझेदारी 

  • दोनों देशों के मध्य हरित विकास और स्वच्‍छ ऊर्जा संवर्द्धन के लिए सहमति व्यक्‍ति की गयी।
  • जैव विविधता में ह्नास, भूमि उपयोग परिवर्तन, स्वच्‍छ जल एवं समुद्री निम्नीकरण, वनो की कटाई, प्रदूषण तथा जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए एक एकीकृत और सुसंगत पहल की आवश्यकता व्यक्‍त की गयी।
  • प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग, स्वच्‍छ जल एवं स्वच्‍छता पर सतत विकास लक्ष्य संबंधी नियमों का पालन करते हुए आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता व्यक्‍त की गयी।

बहुउद्देश्यी सहयोग

  • दोनो देशों के प्रधानमंत्रियों ने नियम-आधारित अंतरर्राष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्बता व्यक्‍त की
  • फिनलैंड और भारत ने संयुक्‍त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद के 75 वें सत्र के दौरान लिए गए रचनात्‍मक कदम एवं सुधारों के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्‍त की।
  • इस संदर्भ में फिनलैंड ने संयुक्‍त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार तथा भारत की सदस्यता का समर्थन किया
  • दोनों देशों ने खुले , समावेशी और नियम आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के अपने समर्थन की पुष्टि की।
  • 12वें विश्व व्यापार संगठन के मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में दोनों पक्षों ने द्वि-स्तरीय विवाद निपटान प्रणाली के हिस्से के रूप में पूर्ण क्षमता वाली अपीलीय न्याय की बहाली सहित डब्ल्‍यूटीओ की प्रासंगिकता बनाए रखने हेतु महत्‍वाकांक्षी समावेशी और अग्रगामी परिणामों की आवश्यकता पर बल दिया।
  • हरित विकास एवं पर्यावरण संरक्षण पर अपनी प्रतिबद्धता को प्रकट करते हुए दोनों देशों ने वर्ष 2021 में संयुक्‍त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन COP26 और जैव विविधता सम्मेलन COP-15 से सकारात्‍मक परिणाम की सकारात्‍मकता जाहिर की।

अन्य महत्वपूर्ण सहयोग

  • दोनों देशो ने आर्कटिक से जुड़े मामलों पर परिधुव्रीय सहयोग हेतु एक प्रमुख मंच के रूप में आर्कटिक परिषद की महत्‍वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
  • आर्कटिक परिषद में एक सक्रिय पर्यवेक्षक होने के नाते भारत ने इन प्रयासों में शामिल होने और सहयोग करने का स्वागत किया।
  • विश्व में अफ्रीकी महत्व को देखते हुए दोनो देशो ने अफ्रीका के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए आपसी सहयोग की चर्चा की।
  • दोनो देशों ने इस वर्ष के अंत में अफ्रीका पर द्विपक्षीय वार्ता के लेकर अपनी तत्‍परता व्यक्‍त की, जिससे पारस्परिक हितों के लिए बेहतर अवसर प्राप्‍त होगें।

निष्कर्ष

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा फिनिश समकक्ष सनाभारिन ने आशा व्यक्‍त की, कि भारत और फिनलैंड के मध्य आयोजित इस आभासी शिखर सम्मेलन से द्विपक्षीय संबंधों में एक बड़ा विकास देखने को मिलेगा। 
  • भारत ने 8 मई, 2021 को पोर्टो, पुर्तगाल में आयोजित होने वाले यूरोपीय संघ तथा भारत के बैठक को लेकर अपनी उत्‍सुकता जाहिर की।
  • फिनलैंड की प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी को फिनलैंड आगमन का निमंत्रण भी दिया। 

लेखक- अभय कुमार पाण्डेय
 


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