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मीडियम रेंज सरफेस टू एअर मिसाइल (MRSAM)

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

  • 9 सितंबर, 2021 को रक्षा अनुसंधान तथा विकास संगठन (DRDO) ने भारतीय वायु सेना को मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (MRSAM) प्रणाली की पहली इकाई वायु सेना स्टेशन, जैसलमेर, राजस्थान को सौंपी।
  • इस मिसाइल प्रणाली का विकास रक्षा अनुसंधान तथा विकास संगठन (DRDO) तथा इस्राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) के संयुक्त प्रयास से किया गया है। 

 

परिचय

  • भारतीय वायु सेना की 18 फायरिंग यूनिटस हेतु 450 मिसाइलों के निर्माण का लक्ष्य कार्यक्रम के अंतर्गत समाहित है।
  • यह मिसाइल सतह से हवा में मार करने में सक्षम है। ये मिसाइल मध्यम दूरी पर किसी भी संभावित लक्ष्य यथा एयरक्राफ्‍ट, हेलीकाॅप्‍टर्स, एंटी-शिप मिसाइलों तथा यूएवी (Unmaned Aerial Vehicle) को ध्वस्त करने में सक्षम है। 
  • 4.5 मीटर लंबी, 2 मैक की गति वाली यह मिसाइल 70 किमी. के परस में एक साथ अनेक लक्ष्यों को निशाना बना सकती है।
  • टर्मिनल चरण के दौरान उच्‍च गतिशीलता प्राप्‍त करने के लिए मिसाइल स्वदेशी रूप से विकसित राॅकेट मोटर और कंट्रोल प्रणाली द्वारा संचालित है।

 

  • इस्राइल की बराक-8 मिसाइल प्रणाली पर आधारित यह (MRSAM) मिसाइल प्रणाली भारत की हवाई सुरक्षा तथा निगरानी तंत्र को अपनी एकीकृत प्रणाली से मजबूत बनाएगा।
  • संभावित ड्रोन (UAV) जनित चुनौतियों तथा रणनीतिक रूप से युद्ध क्षेत्र में भारतीय सेना को बढ़त मिल पाएगी।

प्रमुख घटक

  • इसकी फायरिंग इकाई में मोबाइल लांचर सिस्टम (MLS), कम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम (CNS), एडवांस लांग रेंज रडार (ALR), रिलोडर व्हीकल (RV), मोबाइल पाॅवर सिस्टम (MPS), फील्‍ड सर्विस व्हीकल (FSV) आदि सम्मिलित हैं।
  • यह द्विचरणीय तथा राॅकेट मोटर आधारित मिसाइल है। यह अपने साथ 500-1000 किलोग्राम युद्ध सामग्री ले जा सकती है।
  • LRSAM इसकी लंबी दूरी तक मार करने वाली प्रणाली है।

संकलन - प्रवेश तिवारी
 


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