13वां प्रवासी भारतीय दिवस-2015

प्रवासी भारतीय दिवस समागम का आयोजन वर्ष 2003 से प्रति वर्ष भारत के विभिन्न शहरों में किया जाता रहा है। इस समागम का मूल उद्देश्य विश्व के 110 से भी अधिक देशों में निवासित 2.5 करोड़ से अधिक भारतीय मूल के लोगों और भारत के लोगों के बीच संबंध स्थापित करना, पारस्परिक विचार-विनिमय को प्रोत्साहित करने के साथ व्यापारिक एवं निवेश अवसरों की तलाश करना तथा विशाल प्रवासी भारतीय समुदाय को भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास से सन्नद्ध होने के लिए प्रेरित करना है। प्रख्यात न्यायविद डॉ. लक्ष्मीमल सिंघवी की अध्यक्षता में सितंबर, 2000 में गठित समिति द्वारा 9 जनवरी (महात्मा गांधी के वर्ष 1915 में दक्षिण अफ्रीका प्रवास से वापस लौटने की तिथि) को प्रवासी भारतीय दिवस समागम के रूप में आयोजित किए जाने का सुझाव दिया गया था। वार्षिक आयोजनों के इसी क्रम में 13वें प्रवासी भारतीय दिवस समागम का आयोजन गांधीनगर, गुजरात में किया गया।

  • महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से स्वदेश वापसी के 100 साल पूरे होने को समर्पित 13वें प्रवासी भारतीय दिवस समागम का आयोजन 7-9 जनवरी, 2015 के मध्य गुजरात के गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में किया गया।
  • गत वर्ष यह समागम नई दिल्ली में आयोजित किया गया था।
  • 13वें प्रवासी भारतीय दिवस का केंद्रीय विषय (Theme) था-‘‘अपना भारत, अपना गौरव’’ (Apna Bharat, Apna Gaurav)।
  • 13वें प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्रालय द्वारा युवा मामले एवं खेल मंत्रालय और गुजरात सरकार के सहयोग से किया गया।
  • इस वर्ष के प्रवासी भारतीय दिवस का भागीदार राज्य गुजरात था।
  • प्रवासी भारतीय दिवस-2015 में 44 देशों के लगभग 4000 प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।
  • इस वर्ष इस समागम के मुख्य अतिथि थे-गुयाना के राष्ट्रपति डोनाल्ड रामोतार।
  • जबकि दक्षिण अफ्रीका की अंतर्राष्ट्रीय संबंध और सहयोग मामलों की मंत्री मैते कोआना माशाबाने ने विशिष्ट अतिथि (Guest of Honour) के तौर पर प्रतिभाग किया।
  • समागम का पहला दिन (7 जनवरी) युवा प्रवासी भारतीय दिवस के रूप में मनाया गया।
  • युवा प्रवासी भारतीय दिवस के अवसर पर कई विशेष सत्रों का आयोजन किया गया, इनमें भारत को जानो, भारत को मानो तथा‘21वीं सदी के परिप्रेक्ष्य में गांधीवादी विचारधारा’ (Gandhian Thought in Context of the 21st Century) शामिल हैं।
  • भारत को जानो सत्र का उद्देश्य युवा प्रवासी भारतीयों को भारत की परंपराओं, इसकी कला एवं संस्कृति से परिचित कराना था।
  • जबकि भारत को मानो सत्र के तहत युवा प्रवासी भारतीयों को आधुनिक भारत द्वारा, विशेष रूप से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में, की गई आसाधारण प्रगति से अवगत कराया गया।
  • 8 जनवरी, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रवासी भारतीय दिवस-2015 का औपचारिक उद्घाटन किया गया।
  • 8 जनवरी को ही प्रधानमंत्री ने गांधीनगर में महात्मा मंदिर के सामने स्थित ‘दांडी कुटीर’ (Dandi Kutir) नामक संग्रहालय का उद्घाटन किया।
  • तीन मंजिला गुम्बदाकार इमारत में स्थित इस प्रदर्शनी में महात्मा गांधी के जीवन से संबंधित विभिन्न पहलुओं जैसे एक बैरिस्टर के रूप में, दक्षिण अफ्रीका में उनके संघर्ष, भारत वापसी और स्वाधीनता संग्राम के सफल नेतृत्व इत्यादि को दिखाया गया है।
  • 8 जनवरी, 2015 को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा मंदिर में महात्मा गांधी की स्वदेश वापसी के 100 वर्ष पूरे होने को समर्पित दो स्मारक डाक टिकटों का एक सेट जारी किया।
  • 9 जनवरी, 2015 को प्रवासी भारतीय दिवस समागम के अंतिम दिन ‘भारत के राज्यों में निवेश के अवसर’ (Investment Opportunities in States) विषय पर मुख्यमंत्रियों के एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा की गई।
  • इस सत्र में पंजाब, केरल, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, गुजरात, मेघालय, महाराष्ट्र, गोवा, हरियाणा और झारखंड राज्य के मुख्यमंत्रियों ने प्रतिभाग किया।
  • 9 जनवरी को ही कुछ अन्य विशेष सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें प्रमुख हैं :-
    (i) खाड़ी देशों में श्रम एवं रोजगार के मुद्दे।
    (ii) गिरमिटिया (Girmitiyas) प्रवासी भारतीयों पर एक सत्र।
    (iii) फ्रांकोफोन (Francophone) देशों या फ्रेंच बोलने वाले देशों में भारतीय मूल के व्यक्तियों पर सत्र।
    (iv) प्रवासी भारतीय संगठनों की भूमिका पर एक सत्र।
  • 9 जनवरी को समागम के अंतिम दिन उपराष्ट्रपति एम. हामिद अंसारी ने गुयाना के राष्ट्रपति डोनाल्ड रामोतार सहित 15 प्रवासी भारतीयों को ‘प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार’ प्रदान किया।
  • इनके अतिरिक्त पिछले वर्ष प्रवासी भारतीय सम्मान से सम्मानित ऑस्ट्रेलिया की सीनेटर लीजा सिंह को भी इस वर्ष उनका पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • ज्ञातव्य है कि वे पिछले वर्ष यह सम्मान ग्रहण नहीं कर पाईं थीं।
  • ज्ञातव्य है कि क्षेत्रीय प्रवासी भारतीय दिवसों के आयोजन के क्रम में 8वें ‘क्षेत्रीय प्रवासी भारतीय दिवस समागम’ का आयोजन 16-18 अक्टूबर, 2014 के दौरान लंदन, यू.के. में किया गया।
  • इससे पूर्व 7 क्षेत्रीय प्रवासी भारतीय दिवस क्रमशः न्यूयॉर्क (अमेरिका, 2007), सिंगापुर (2008), द हेग (नीदरलैंड्स, 2009), डरबन (दक्षिण अफ्रीका, 2010), टोंरटो (कनाडा, 2011), मॉरीशस (2012) एवं सिडनी (ऑस्ट्रेलिया, 2013) में आयोजित किए गए थे।

प्रवासी भारतीय सम्मान- 2015 प्राप्तकर्ता

1. माला मेहता, ऑस्ट्रेलिया
2. ईसॉप गुलाम, दक्षिण अफ्रीका
3. सत्यनारायण नडेला, अमेरिका
4. कमलेश लुला, अमेरिका
5. महेंद्र नांजी मेहता, युगांडा
6. लॉर्ड राज लुंबा यू.के.
7. प्रो. नाथूराम पुरी, यू.के.
8. संजय राजाराम, मेक्सिको
9. जस्टिस करुणाकरन, सेशैल्स
10. राजामल पारा, ओमान
11. भारत कुमार जयंतीलाल शाह, यूएई
12. अशरफ पेल्लार कुन्नमल, यूएई
13. नंदिनी टंडन, अमेरिका
14. डोनाल्ड रामोतार, राष्ट्रपति, गुयाना
15. कंवलजीत बक्शी, न्यूजीलैंड

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भूटान : मीगा का 181वां सदस्य

राजनीतिक अस्थिरता के कारण किसी देश विशेष की सरकार की नीतियों विचारधारा, अन्य राष्ट्रों से संबंधों आदि में परिवर्तन आता रहता है, जैसे अफसरशाही से संबंधित बाधाएं, अत्यधिक कानूनी प्रावधान जिससे उनका सही अर्थ जानना कठिन हो जाए, पारदर्शिता का अभाव, भ्रष्टाचार धीमी न्यायिक प्रक्रिया आदि। ये सभी राजनीतिक जोखिम में शामिल हैं। निवेशकों को विदेशों में निवेश करते समय विभिन्न राजनीतिक जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। राजनीतिक जोखिम विदेशी निवेश के अंतर्प्रवाह में बहुत बड़ी बाधा है। विदेशी निवेशक किसी ऐसे देश में निवेश करना पसंद नहीं करते जिसमें अस्थिर सरकार के कारण सरकार की नीतियों में परिवर्तन होता रहता है। इससे व्यावसायिक इकाइयों के लिए अनिश्चितता बनी रहती है। मीगा एक ऐसा अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान है जो निवेशकों को ‘राजनीतिक जोखिम बीमा’ (Political risk insurance) और क्रेडिट वृद्धि गारंटी प्रदान करता है।

  • मीगा (MIGA) अर्थात ‘बहुपक्षीय निवेश गारंटी एजेंसी’ (Multilateral Investment Guarantee Agency) एक अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान है जो विश्व बैंक समूह का सदस्य है।
  • विकासशील देशों में विश्वासपूर्ण निवेश को प्रोत्साहित करने हेतु इसकी स्थापना वर्ष 1988 में एक ‘निवेश बीमा सुविधा’ (Investment insurance facility) के रूप में की गई थी।
  • इस संस्था का घोषित मिशन विकासशील देशों में‘प्रत्यक्ष विदेशी निवेश’(FDI) को बढ़ावा देकर आर्थिक वृद्धि में मदद करना, गरीबी कम करना तथा लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है।
  • मीगा का मुख्यालय वाशिंगटन, डी.सी., अमेरिका में स्थित है।
  • 8 दिसंबर, 2014 को भूटान मीगा का 181वां सदस्य बन गया।
  • इसका अर्थ यह है कि अब भूटान में किया जाने वाला प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मीगा द्वारा दी जाने वाली निवेश गारंटी हेतु पात्र होगा।
  • इसी प्रकार मीगा के अन्य सदस्य देशों में निवेश करने पर भूटान के निवेशक निवेश की सुरक्षा के लिए पात्र होंगे।
  • वर्तमान में 156 विकासशील देशों तथा 25 औद्योगिक देशों सहित मीगा के कुल सदस्य देशों की संख्या 181 हो गई है।
  • भूटान के पूर्व म्यांमार दिसंबर, 2013 में मीगा का 180वां सदस्य बना था।
  • भारत भी जनवरी, 1994 से मीगा का सदस्य है।
  • वर्तमान में 7 देश ऐसे हैं जो विश्व बैंक के सदस्य तो हैं परंतु मीगा के सदस्य नहीं हैं, ये देश हैं ब्रुनेई, किरीबाती, मार्शल, आइलैंड, सैन मरीनो, सोमालिया, टोंगा एवं तुवालू।
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मध्य-वर्षीय आर्थिक विश्लेषण 2014-15

वित्तीय दायित्व तथा बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM Act), 2003 के प्रावधानों के अनुसार बजट की त्रैमासिक आधार पर समीक्षा की जाती है जिसमें व्यय और प्राप्तियों की समीक्षा की आवश्यकता होती है। मध्य-वर्षीय विश्लेषण वस्तुतः दूसरी त्रैमासिक समीक्षा होती है जिसमें अर्थव्यवस्था की प्रमुख गतिविधियों का प्रदर्शन किया जाता है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 19 दिसंबर, 2014 को वर्ष 2014-15 का मध्य-वर्षीय आर्थिक विश्लेषण (Mid Year Economic Analysis-2014-15) प्रस्तुत किया। यह वित्त वर्ष 2014-15 की दूसरी तिमाही के अंत में बजट के संदर्भ में प्राप्तियों और व्यय की प्रवृत्तियों की समीक्षा का परिणाम तथा एफआरबीएम एक्ट (FRBM Act) की धारा 7(1) और 7(3)(ख) के तहत सरकार के दायित्वों को पूरा करने में हुए फेर-बदल को स्पष्ट करने वाला विवरण है। मध्य-वर्षीय विश्लेषण 2014-15 की प्रमुख विशिष्टिताओं का विवरण अग्रलिखित बिंदुओं के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया है।

  • वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में चालू वित्त वर्ष (2014-15) की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में 5.5 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की गई।
  • यह विकास आर्थिक समीक्षा 2013-14 में 5.4 से 5.9 प्रतिशत की दर पर पूर्ण वर्ष की वृद्धि के अनुमान के अनुरूप रहने के साथ-साथ, विकास में क्रमिक तेजी आने के सरकारी अनुमानों पर भी आधारित थी।
  • कई वर्षों तक औसतन लगभग 9 प्रतिशत विकास दर के बाद लगभग 12 तिमाहियों में भारत की विकास दर में गिरावट आई है और वित्त वर्ष 2014 की अंतिम 2 तिमाहियों में यह कम होकर 5 प्रतिशत से नीचे पहुंच गई थी।
  • वृहत आर्थिक सुधार तथा सरकार द्वारा उठाए गए नीतिगत कदमों के परिणामस्वरूप भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। यह सुधार निम्न हैं-
  • डीजल की कीमतों को नियंत्रण मुक्त करना और इस क्षेत्र में निवेश के नए मार्ग बनाना।
  • गैस की कीमतें प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट 4.2 अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 6.17 अमेरिकी डॉलर करना (33 प्रतिशत की वृद्धि)।
  • रक्षा क्षेत्र में एफडीआई (FDI) सीमा में 49 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी करना और निवेश में 100 प्रतिशत एफडीआई का लक्ष्य रखना।
  • राष्ट्रीय स्तर पर कुकिंग गैस सब्सिडी के स्थान पर सीधे अंतरण करना।
  • व्यय प्रबंधन आयोग स्थापित करना जो व्यय को तर्कसंगत बनाने के लिए योजना की रूपरेखा तैयार करेगा।
  • नीलामी और बड़े निजी क्षेत्र की प्रविष्टि से कोयला क्षेत्र में सुधार।
  • प्रधानमंत्री जन धन योजना के माध्यम से वित्तीय समावेशन का प्रयास।
  • सोने पर प्रमात्रात्मक प्रतिबंध हटाना।
  • विनिवेश के कार्यक्रम को कार्यान्वित करना।
  • चालू खाते के संबंध में पिछले वर्ष स्वर्ण पर प्रशुल्क बढ़ाना और प्रतिबंध लगाना दो महत्त्वपूर्ण कदम थे; इनसे चालू खाता घाटे को कम करने में मदद मिली है।
  • मध्य-वर्षीय राजकोषीय समेकन के लिए वित्त वर्ष 2015 के बजट में सकल घरेलू उत्पाद के 4.1 प्रतिशत राजकोषीय घाटे का लक्ष्य रखा गया है जो कि पिछले वर्ष के 4.5 प्रतिशत से कम है।
  • नवंबर, 2014 में मुद्रास्फीति 4.4 प्रतिशत दर्ज की गई है जो कि इसी महीने के वर्ष 2013 में 11.2 प्रतिशत के उच्च स्तर पर थी, में अप्रत्याशित गिरावट दर्ज की गई है।
  • वित्त वर्ष 2014 की तीसरी तिमाही में 2.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो लगभग 11.8 प्रतिशत से नीचे गिरी है।
  • मुद्रास्फीति में गिरावट निम्न चार कारणों से रही है-
  • कृषि उत्पादों की कीमतों में गिरावट
  • पण्य, खासतौर से तेल की कीमतों में गिरावट
  • क्षमता की अपेक्षाकृत निरंतर कायम आर्थिक कमजोरी (Continued Economic weakness Relative to Potential)
  • नीति निर्माण संबंधी विश्वसनीयता
  • पिछली तिमाही में चालू खाता घाटा GDP का 2.1 प्रतिशत दर्ज किया गया। यह पूरे वर्ष 2 प्रतिशत के स्तर पर रहने की आशा है।
  • वर्ष 2014-15 के बजट अनुमान में राजकोषीय घाटा और राजस्व घाटा क्रमशः GDP का 4.1 प्रतिशत और 2.9 प्रतिशत रहने की व्यवस्था की गई है।
  • प्रभावी राजस्व घाटा, जो पूंजी परिसंपत्तियों के सृजन हेतु प्रयुक्त किए गए अनुदानों को घटाने के पश्चात राजस्व घाटे में असंतुलन प्रतिबिम्बित करता है, उसका अनुमान GDP का 1.6 प्रतिशत लगाया गया है।
  • 2014-15 के आयोजना भिन्न व्यय में 9.9 प्रतिशत और आयोजना व्यय में 26.9 प्रतिशत की वृद्धि के चलते 2013-14 के अनंतिम वास्तविक आंकड़ों की तुलना में समग्र व्यय में 14.8 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।
  • वर्ष 2014-15 के बजट अनुमान में निवल कर राजस्व और कर-भिन्न राजस्व मिलाकर केंद्र की राजस्व प्राप्तियां 2013-14 के अनंतिम वास्तविक आंकड़ों की तुलना में 17.2 प्रतिशत की वृद्धि प्रतिबिंबित करते हुए 11,89,763 करोड़ रुपये अनुमानित थी।
  • वर्ष 2014-15 के पूर्वार्ध के दौरान कुल राजस्व प्राप्तियों में वृद्धि 2013-14 की तदनुरूपी अवधि की तुलना में 7.2 प्रतिशत तथा त्रैमासिक परिणाम के अर्थ में असमान वृद्धि प्रतिबिंबित हो रही है।
  • वर्ष 2012-13, 2013-14 और 2014-15 के दौरान निवल कर-भिन्न राजस्व प्राप्तियों में वर्षानुवर्ष तिमाही वृद्धि बजट अनुमानों के प्रतिशत के रूप में क्रमशः 37.5 प्रतिशत, 36.9 प्रतिशत तथा 35.1 प्रतिशत है।
  • सकल कर राजस्व प्राप्तियां सितंबर, 2014 तक बजट अनुमान का 36 प्रतिशत थी और इन्होंने पिछले वर्ष की तदनुरूप अवधि में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाई है।
  • सकल प्रत्यक्ष कर संग्रहण 2013-14 के पूर्वार्ध की तुलना में 2014-15 के पूर्वार्ध के दौरान 8.3 प्रतिशत बढ़े हैं।
  • निगम कर, सकल कर राजस्व का सबसे बड़ा घटक बना हुआ है। वर्ष 2014-15 के पूर्वार्ध के दौरान इसने 2013-14 की तदनुरूप अवधि की तुलना में 5.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाई है।
  • सकल अप्रत्यक्ष कर संग्रहण ने 2014-15 के पूर्वार्ध के दौरान पिछले वर्ष की तदनुरूप अवधि के दौरान संग्रहण की तुलना में 5.5 प्रतिशत की वृद्धि दशाई है। यह 2013-14 के अनंतिम वास्तविक आंकड़ों की तुलना में 2014-15 के बजट अनुमान में 25.8 प्रतिशत की अंतर्निहित वृद्धि की तुलना में काफी कम है।
  • सीमा शुल्क में वर्ष 2013-14 की तुलना में 2014-15 में 17.2 प्रतिशत की वृद्धि की परिकल्पना की गई है।
  • केंद्रीय उत्पाद शुल्क में 2013-14 की तुलना में 2014-15 के बजट में 22.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाई गई है।
  • सेवाकर 2013-14 की तुलना में 2014-15 में 39.7 प्रतिशत की वृद्धि प्रतिबिंबित हुई है।
  • समग्र रूप से कर राजस्व पक्ष में मध्य वर्ष में वृद्धि की प्रवृत्ति अनुमान से कम है। फिर भी, यह आशा है कि पहले से चल रहे नीतिगत उपायों, पेट्रोलियम पदार्थों पर आयात शुल्क तथा चुनिंदा मदों पर आयात शुल्क में वृद्धि उत्तरार्ध में राजस्व अंतराल को पाटने में सरकार की सहायता करेगी।
  • कर भिन्न राजस्व, सितंबर, 2014 तक 2014-15 बजट अनुमान का 44.6 प्रतिशत है।
  • कुल व्यय, बजट 2014-15 में GDP का 13.9 प्रतिशत अनुमानित है जो 2013-14 के वास्तविक आंकड़ों की तुलना में 14.8 प्रतिशत अधिक है।
  • 2013-14 की तुलना में आयोजना व्यय में वृद्धि 26.9 प्रतिशत तथा आयोजना भिन्न व्यय 9.9 प्रतिशत अनुमानित है।
  • 2014-15 के पूर्वार्ध के दौरान कुल व्यय 2014-15 के बजट अनुमान का 48 प्रतिशत है। जो पिछले वर्ष तदनुरूप अवधि की तुलना में 6.6 प्रतिशत की वृद्धि प्रदर्शित करता है।
  • 5, 31, 177 करोड़ रुपये के बजट अनुमान की तुलना में, सितंबर, 2014 तक राजकोषीय घाटा 4,38,826 करोड़ रुपये रहा, जो बजट अनुमान 2014-15 का 82.6 प्रतिशत है।
  • सितंबर, 2014 तक सरकार का कुल व्यय बजट अनुमान वर्ष 2014-15 का 48 प्रतिशत था।
  • चालू वित्त वर्ष में (नवंबर, 2014 तक) रुपये का मूल्य व्यापक रूप से स्थिर रहा। यह 2014-15 की प्रथम तिमाही में 59.8 रु./अमेरिकी डॉलर तथा दूसरी तिमाही में 60.6 रु./अमेरिकी डॉलर औसत रूप में बढ़ा है।
  • बाह्य ऋण 2013-14 के दौरान GDP का 23.4 प्रतिशत और ऋण सेवा अनुपात (Debt Service Ratio) का 5.9 प्रतिशत रहा है जो कि प्रबंधकीय सीमाओं के भीतर बना हुआ है।
  • भारत का बाह्य ऋण मार्चांत 2014 के मुकाबले 7.9 बिलियन (1.8 प्रतिशत) अमेरिकी डॉलर की वृद्धि दर्शाते हुए जून, 2014 के अंत में 450.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर पर रहा।
  • दीर्घावधि बाह्य ऋण कुल बाह्य ऋण का 80.5 प्रतिशत रहा, जबकि शेष अल्पावधि ऋण था।
  • जून अंत 2014 में कुल बाह्य ऋण में सरकारी बाह्य ऋण (Government External Debt) का हिस्सा 19.0 प्रतिशत था, जबकि गैर-सरकारी बाह्य ऋण का हिस्सा, 81.0 प्रतिशत था।
  • कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में अनुमानों के अनुसार कम वृद्धि (3.5 प्रतिशत) दर्ज की गई है।
  • कृषि क्षेत्र में कमी अनुकूल मानसून न होने के कारण तथा अनाज, दालों एवं तिलहनों के कमतर उत्पादन के कारण हुआ। कृषि उत्पादन में वृद्धि फलों, सब्जियों, पशुधन उत्पादों, वानिकी एवं मात्स्यिकी आदि में हुआ।
  • वित्त, बीमा, स्थावर संपदा और कारोबारी सेवाएं, 2014 की पहली तिमाही तक लगातार 10 तिमाहियों में अर्थव्यवस्था का सबसे सक्रिय क्षेत्र रहा है जो 2014-15 के पूर्वार्ध में 10 प्रतिशत की दर पर बढ़ा। यह क्षेत्र 2014-15 के पूर्वार्ध में GDP के कुल वृद्धि में 38 प्रतिशत से अधिक योगदान दिया है।
  • स्थिर मूल्यों पर वस्तु एवं सेवाओं के निर्यात में चार तिमाहियों के दौरान 12.1 प्रतिशत की अच्छी औसत दर पर वृद्धि हुई।
  • साहू समिति द्वारा तैयार नई उदार एडीआर/जीडीआर स्कीम अधिसूचित कर दी गई है तथा यह 15 दिसंबर, 2014 से लागू हो गई।
    वर्ष 2014-15 के दौरान भारत का निर्यात 215.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर पहुंच गया, जिससे 2013-14 की इसी अवधि की तुलना में 5.0 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
  • आयात वृद्धि जो कि 2012-13 में 0.3 प्रतिशत रही और 2013-14 में (-) 8.3 प्रतिशत रही। वर्ष 2014-15 (अप्रैल-नवंबर) में बढ़कर 4.6 प्रतिशत हो गई।
  • 2013-14 के दौरान आयात बढ़कर 450.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया जबकि 2014-15 (अप्रैल-नवंबर) में 316.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।
  • 2012-13 के दौरान भारत का व्यापार घाटा 190.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर से गिरकर 2013-14 में 135.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।
  • वर्ष 2014-15 (अप्रैल-नवंबर) के दौरान व्यापार घाटा 100.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा जो कि 2013-14 के पहले आठ महीनों की तुलना में 3.8 प्रतिशत अधिक था।
  • विदेशी मुद्रा आरक्षित निधि की संरचना में फेरबदल विदेशी मुद्रा आस्तियां में हुए घट-बढ़ से, व्यापक रूप में हुआ।
  • सितंबर, 2014 के अंत की स्थिति के अनुसार विदेशी मुद्रा आस्तियां जो समग्र कार्यक्रम निधि का बड़ा घटक है, 288.01 बिलियन
  • डॉलर पर रहीं, जबकि एसडीआर मामूली रूप से घटकर 4.283 बिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया।
  • आईएमएफ में देश का आरक्षित मुद्रा हिस्सा भी घटकर 1.540 बिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया।
भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दरें (स्थिर मूल्यों पर वर्षानुवर्ष प्रतिशत)
मदें
2013-14
2014-15
  पूर्वार्ध1 पूर्वार्ध2 तिमाही1 तिमाही2 पूर्वार्ध1
कृषि, वानिकी एवं मत्स्यिकी
4.5
4.9
3.8
3.2
3.5
उद्योग
1.1
-0.3
4.2
2.2
3.2
खनन एवं उत्खनन
-2.0
-0.8
2.1
1.9
2.0
विनिर्माण
0.1
-1.5
3.5
0.1
1.8
बिजली, गैस एवं जलापूर्ति
5.8
6.1
10.2
8.7
9.5
निर्माण
2.7
0.7
4.8
4.6
4.7
सेवाएं
6.8
6.8
6.8
7.7
6.9
व्यापार, होटल, परिवहन एवं संचार
2.6
3.4
2.8
3.8
3.3
वित्त, बीमा, स्थावर संपदा और कारोबारी सेवाएं
12.5
13.2
10.4
9.5
10.0
सामुदायिक, सामाजिक एवं वैयक्तिक सेवाएं
6.8
4.4
9.1
9.6
9.4
उत्पादन लागत पर सकल घरेलू उत्पाद
4.9
4.6
5.7
5.3
5.5
स्रोतः केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय